हिन्दी ‌‘हास्य कुंभ' में लगे ठहाके ही ठहाके !

अग्रवाल समाज, पूना द्वारा होली के उपलक्ष्य में शानदार हिंदी हास्य कवि सम्मेलन का रंगारंग आयोजन

    08-Mar-2026
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पुणे, 7 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

शुक्रवार, 6 मार्च की शाम को शहर के बालगंधर्व रंगमंदिर में हिंदी हास्य कवि सम्मेलन ‌‘हास्य कुंभ' में हजारों ठहाके लगे. अग्रवाल समाज पूना ने होली मिलन-2026 का आयोजन समाज के सदस्यों के लिये किया था. कार्यक्रम के शुरुआत में महाराज अग्रसेन जी की मूर्ती को माल्यार्पण कर, अग्रवाल समाज, पूना की कार्यकारिणी एवम्‌‍ कार्यक्रम के प्रायोजक पवन सराफ एवम्‌‍ अंजु सराफ ने दीप प्रज्वलित किया. सचिव संजय (प्रिन्स) अग्रवाल ने उपस्थितों का स्वागत किया.तत्पश्चात अध्यक्ष ईश्वरचंद गोयल ने समाज की उपलब्धियों के बारे में बताया, आने वाले दिनों में विवाह योग्य युवक-युवतियों के समुपदेशन, कारण मिमांसा और संशोधन हेतु एक आयोजन की जानकारी देकर इसमें उपस्थित रहने क ी अपील भी की. साथ ही हर वर्ष की सदस्यता फीस रु.1,100/- जमा करने के बजाय रु.21,000/- (लाइफ टाइम) जिंदगी में सिर्फ एक बार देने की भी विनती की. तत्पश्चात सभी आमंत्रित कवियों का फूलों से स्वागत किया गया. इनमें द्वारका जालान (पुणे), चेतन चर्चित (इंदौर), सुंदर कटारिया (गुड़गांव),बुध्दीप्रकाश दाधीच (केकड़ी/ राजस्थान) एवं दिलीप शर्मा (पुणे) आदि शामिल थे. ‌‘हास्य कुंभ' का मंच संचालन अपने चुटीले अंदाज में सुप्रसिद्ध मोटीवेशनल स्पिकर द्वारका जालान ने बखूबी से किया और खचाखच भरे हॉल में दर्शकों को खूब हंसाया और तालियां भी बटोरीं. सभी कवियों का अलग-अलग अंदाज था. चेतन चर्चित ने खुद के बौने होने पर कटाक्ष कर दर्शकों को पल-पल खूब हंसाया. तो सुंदर कटारिया ने हरियाणवी बातें, किस्से, कहानियां और कवितायें सुनाकर प्रेक्षकों को गुदगुदाया. पुणे के दिलीप शर्मा ने कवियों की कथा, बचपन के हास्यास्पद किस्से और पैरोडियां सुनायी. जिसमें विशेष थी- किस रावण की काटूं बाँहें, किस लंका में आग लगाऊँ, घर-घर रावण, पग-पग लंका, इतने राम कहाँ से लाऊंँ | तत्पश्चात केकड़ी राजस्थान से आये बुद्धिप्रकाश दाधीच ने अपने निराले ही अंदाज में राजस्थानी गीत, होली के, बिरहाके और हास्य व्यंग्यके किस्से सुना कर लोगों को हंसा-हंसाकर लोटपोट कर दिया. इस बीच मुख्य प्रायोजक पवन सराफ एवं अंजू सराफ का समाज की ओर से सम्मानित किया गया. पवनजी ने अपने मन के उद्गार में कहा- ‌‘बंटोगे तो कटोगे' यह केवल योगीजी का मुहावरा नहीं है, बल्कि यह हर समाज के लिये है. समाज का एक रहना सबसे ज्यादा जरुरी है. बिखर गये तो खत्म हो जायेंगे. इस आयोजन का आनंद समाज के करीब 800 लोगों ने उठाया. कवि सम्मेलन के पूर्व प्रीति भोज का भी आयोजन किया गया था. उपरोक्त आयोजन में, ईश्वरचंद गोयल (अध्यक्ष), विजय अग्रवाल (उपाध्यक्ष), संजय (प्रिन्स) अग्रवाल, मुकेश कनोडिया (सहसचिव), दीपक बंसल (कोषाध्यक्ष) व अन्य कार्यकारिणी के सदस्य उपस्थित थे. साथ ही श्री पवन सराफ, श्रीमती अंजू सराफ, विनोद मित्तल, सुनिल अग्रवाल (निर्माण ग्रुप), राजेश एवं किंजल अग्रवाल (कोहिनूर ग्रुप) आदि उपस्थित थे.