UPSC परीक्षा में बापूसाहेब गायकवाड़ ने पूरे भारत में 561वीं रैंक हासिल की. जो लड़का एक चौकीदार के बेटे के रूप में संघर्ष करते हुए बड़ा हुआ, वही आज भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक सेवा तक पहुंच गया है. महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव में जन्मे बापूसाहेब गायकवाड़ बचपन से ही बहुत होशियार और मेहनती विद्यार्थी थे. गांव के साधारण स्कूल में पढ़ते समय ही उनकी बुद्धिमत्ता और लगन साफ दिखाई देती थी. लेकिन उनके जीवन की परिस्थितियां बहुत कठिन थीं. घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी बापूसाहेब की मां दूसरों के घरों में जाकर बर्तन मांजने का काम करतीं और मेस में भी काम करने जाया करती थीं, जबकि उनके पिता निर्माण स्थल पर चौकीदार के रूप में काम करते थे. घर चलाने के लिए दोनों दिनरात कड़ी मेहनत करते. घर का सहारा बनने के लिए बापूसाहेब भी बचपन से ही मेहनत करने लगे. वे छात्रों तक टिफिन पहुंचाने का काम करते, ताकि घर के रोजमर्रा के खर्च में मदद हो सके. गरीबी, संघर्ष और कठिनाइयों के बीच उनका बचपन बीता, लेकिन उनकी आंखों में बड़े सपने थे. कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई कभी नहीं छोड़ी. अपनी जिद और मेहनत के बल पर उन्होंने डिप्लोमा पूरा किया और उसके बाद उनका चयन L&T (Larsen & Turbo) जैसी बड़ी कंपनी में हो गया. अच्छी नौकरी मिलने से उनका जीवन स्थिर हो सकता था. लेकिन बापूसाहेब के मन में एक अलग सपना था, ‘देश की सेवा करने का, समाज के लिए काम करने का और एक दिन I S अधिकारी बनने का.' इसलिए उन्होंने एक बड़ा निर्णय लिया. सुरक्षित नौकरी छोड़कर उन्होंने अपने सपने को पूरा करने के लिए खुद को पूरी तरह समर्पित कर दिया. उन्होंने यशवंतराव चव्हाण महाराष्ट्र मुक्त वेिशविद्यालय (YCMOU) से कला शाखा में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और UPSC की तैयारी शुरू कर दी.
UPSC का सफर आसान नहीं था
इस यात्रा में उन्हें कई असफलताओं, बाधाओं और निराशाओं का सामना करना पड़ा. कई बार परीक्षा दी, कई बार सफलता करीब आकर भी हाथ न लगी. लेकिन बापूसाहेब ने कभी हार नहीं मानी. इसी दौरान उनका चयन CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट के पद के लिए भी हुआ था. यह भी बहुत प्रतिष्ठित नौकरी थी. लेकिन उनका लक्ष्य उससे भी बड़ा था. इसलिए उन्होंने वह नौकरी स्वीकार नहीं की और UPSC के सपने के लिए संघर्ष करते रहे. आखिरकार उनकी अथक मेहनत रंग लाई. UPSC परीक्षा में उन्होंने पूरे भारत में 561वीं रैंक हासिल की. जो लड़का एक चौकीदार के बेटे के रूप में संघर्ष करते हुए बड़ा हुआ, वही आज भारत की सबसे प्रतिष्ठित सेवाओं में से एक सेवा तक पहुंच गया है.