पुणे, 7 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
किसी भी क्षेत्र में प्रगति करने के लिए केवल पारंपारिक डिग्री लेना ही पर्याप्त नहीं होता बल्कि संबंधित विषय का ज्ञान प्राप्त कर लेने के बाद उससे जुड़ी नई टेक्नोलॉजी सीख कर स्वयं को समय के साथ अपडेटेड रखना भी आवश्यक है. सच्चाई, ईमानदारी से की गई निरंतर मेहनत के बल पर ही हम अपने क्षेत्र में सफलता के शिखर तक आसानी से पहुंच सकते हैं. हरेक विषय का प्रैक्टिकल ज्ञान रखना आगे बढ़ने में सहायक होता है. दै.आज का आनंद के लिए प्रो.रेणु अग्रवाल ने बातचीत में बताया. प्रस्तुत हैं बातचीत के मुख्य अंश
सेवा, संस्कार और समर्पण के बल पर जीवन में सफलता मिलती है
विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल नॉलेज जरूरी मेरी उम्र-39 साल है. मैं राजमाता जिजाऊ शिक्षण प्रसारक मंडल आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज, लांडेवाडी, भोसरी (पुणे) में FY, SY और TY BCA के विद्यार्थियों को कंप्यूटर लैंग्वेज पिछले 15 सालों से पढ़ा रही हूं. आजकल विद्यार्थी केवल डिग्री के लिए कॉलेज में एडमिशन लेते हैं, विद्यार्थी केवल परीक्षार्थी बन गए हैं. कॉलेज में विद्यार्थी हर रोज क्लास में आना जरूरी है, लेकिन कई विद्यार्थी क्लास में आ नहीं पाते इसके पीछे अनेक कारण हैं. इस वजह से आजकल बड़ी-बड़ी डिग्री होने के बावजूद अच्छी नौकरी नहीं मिल पाती. विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल नॉलेज भी होनी जरूरी है. नई टेक्नोलॉजी सीखना और खुद को समय के साथ अपडेट रखना बहुत आवश्यक है. - प्रोफेसर रूपाली माने, राजमाता जिजाऊ कॉलेज भोसरी, पुणे.
जीवन को संतुलित और साइड-इफेक्ट-फ्री बनाएं
मैं डॉ. कीर्ति रुणवाल पिछले 25 वर्षों से जालना में शुद्ध आयुर्वेदिक चिकित्सा कर रही हूं. संयुक्त परिवार में रहते हुए मैंने जीवन में सेवा, संस्कार और समर्पण को सबसे पहले सीखा. मेरे पति एक प्रतिष्ठित क्रिमिनल लॉयर हैं और मेरी बेटी आर्किटेक्चर की छात्रा है. जो रचनात्मकता और सौंदर्य की नई दुनिया गढ़ रही है. मेरी प्रैक्टिस का आधार हमेशा एक ही रहा है, 100% शुद्ध आयुर्वेद. बीते वर्षों में मैंने घुटनों, रीढ़, गर्भाशय, दमा जैसी कई जटिल समस्याओं को बिना सर्जरी, बिना साइड-इफेक्ट आयुर्वेदिक विजडम से संभालने का प्रयास किया है. कोविड के समय मैंने ‘Zero Medicine Program' की शुरुआत की जिसमें लोगों को अपने घर की रसोई से ही स्वास्थ्य पाने के लिए प्रेरित किया. इससे अनेक लोगों को वास्तविक राहत और आत्मवेिशास मिला. मेरे लिए आयुर्वेद सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और साइड-इफेक्ट-फ्री बनाने का विज्ञान है. - डॉ. सौ. कीर्ति नितिन रुणवाल, जालना
होम्योपैथिक में हर बीमारी का इलाज मेरी
उम्र-34 वर्ष है. मैं एक होम्योपैथिक डॉक्टर हूं, पिछले कई वर्षों से मैं होम्योपैथिक प्रैक्टिस कर रही हूं, इस प्रोफेशन में मुझे ज्यादातर कोई प्रॉब्लम नहीं आती है. अगर कोई प्रॉब्लम आती भी है तो, मैं उसे शांति से हल करने का प्रयास करती हूं. होम्योपैथिक ट्रीटमेंट एक ऐसी ट्रीटमेंट है, जिसमें हर बीमारी का इलाज होता है. बीमारी चाहे कितनी भी पुरानी हो और किसी भी उम्र में हो, हर बीमारी का इलाज होम्योपैथिक में हैं और सबसे खास बात यह है कि इन दवाइयों से मरीज को किसी भी प्रकार के साइड इफेक्ट नहीं होते हैं. जो भी विद्यार्थी इस क्षेत्र में आना चाहते हैं, मैं उन्हें यही सलाह दूंगी कि होम्योपैथिक प्रैक्टिस का इंडिया में ही नहीं बल्कि इंडिया के बाहरी देशों में भी काफी स्कोप है. इसलिए विद्यार्थी इस क्षेत्र में बिना किसी संकोच के प्रवेश कर सकते हैं. - डॉक्टर खान आसमा परवीन रोशन गेट, करीम कॉलोनी
नई पीढ़ी नवाचार को अपनाए
मेरी उम्र-44 साल है. मैं पिछले 9 साल से वकालत कर रहा हूं. मैं अपने परिवार में वकालत करने वाली पहली पीढ़ी में से हूं, और इस नेक पेशे में मेरा अनुभव बेहद संतोषजनक रहा है. मेरा दृढ़ वेिशास है कि एक वकील की सच्ची भूमिका कानून के दायरे में रहकर दूसरों की कठिनाइयों को दूर करना है. मजबूत कानूनी आधार के बिना, प्रौद्योगिकी पर निर्भरता भ्रामक और यहां तक कि खतरनाक भी हो सकती है. इसलिए, नई पीढ़ी को नवाचार को अपनाना चाहिए, लेकिन उन्हें सबसे पहले अपनी बौद्धिक क्षमता, ईमानदारी और पेशेवर नैतिकता के निर्माण में निवेश करना चाहिए, क्योंकि ये ही वकालत के सच्चे स्तंभ बने रहते हैं. एक वकील के रूप में, मैं अपना सर्वोपरि कर्तव्य मानता हूं कि मैं न केवल मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करू, बल्कि न्याय के लिए काम करूं और कानून के शासन को कायम रखूं. समाज को यह समझना चाहिए कि कानूनी व्यवस्था कोई दूरस्थ संस्था नहीं है, बल्कि एक सुरक्षात्मक ढांचा है जो प्रत्येक व्यक्ति के अधिकारों, गरिमा और हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है. - एडवोकेट सत्यदेव देवकीनंदन जोशी, मुंबई
कार्य क्षेत्र की पूरी जानकारी आवश्यक
मेरी उम्र 70 साल है. मैं संभाजी नगर जिला न्यायालय तथा लेबर कोर्ट में वकील व्यवसाय पिछले 26 सालों से कर रहा हू्ं. आज भी उम्र के 70 साल हो गए लेकिन मैं अब भी पूरी लगन और उत्साह से काम करता हू्ं. मैं दैनिक ‘आज का आनंद' के माध्यम से मैं नई पीढ़ी को यही कहना चाहता हूं कि हमें किसी भी क्षेत्र में काम करने के लिए उस क्षेत्र की पूरी जानकारी होना आवश्यक है. इसलिए अपनी पढ़ाई पूरी मन लगाकर करो. उसी के साथ अलग-अलग नई बात भी सदा सीखते रहें. आजकल सोशल मीडिया का जमाना है, तो ऑनलाइन ज्ञान लेना भी आसान हो गया है लेकिन हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल सही तरीके से करना बड़ा आवश्यक है. - मोरेेशर बालकृष्ण हुमणे मिटमिटा, छत्रपति संभाजीनगर
संस्थागत मध्यस्थता कानूनी रूप से सुदृढ़ हो
मेरी उम्र-45 वर्ष है. मैं मुंबई में रहती हूं. मैं यहीं वकालत भी करती हूं. ईमानदारी से कहूं तो, देरी सबसे बड़ी चुनौती है. कानूनी प्रणाली, अपनी सभी खूबियों के बावजूद, बहुत धीमी हो सकती है, और इस प्रतीक्षा के दौरान पक्षों को अक्सर बहुत कष्ट सहना पड़ता है. इसलिए मध्यस्थता और सुलह को वास्तविक और वेिशसनीय विकल्पों के रूप में बढ़ावा दिया जाए. आसरा आर्बिट्रिक्स हब के माध्यम से, हम एक संरचनात्मक कमी को दूर करने का भी प्रयास कर रहे हैं. यह सुनिश्चित करते हुए कि भारत में संस्थागत मध्यस्थता न केवल कानूनी रूप से सुदृढ़ हो, बल्कि व्यावहारिक रूप से सुलभ और पेशेवर रूप से संचालित भी हो. प्रक्रियात्मक अनुशासन और समाधान करने की सच्ची इच्छाशक्ति बहुत बड़ा फर्क लाती है. - अपर्णा आर श्रीवास्तव, मुंबई