पुणे में कल होगा भव्य सामूहिक सुंदरकांड महापर्व

हनुमान जन्मोत्सव पर होगा ऐतिहासिक आयोजन : युवा पीढ़ी को जोड़ने के लिए ‌‘जैमिंग सेशन" भी होगा

    01-Apr-2026
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शिवाजीनगर, 31 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
 पुणे के सुप्रसिद्ध जॉयफुल सुंदरकांड ग्रुप द्वारा, आर्ट ऑफ लिविंग वैदिक धर्म संस्थान महाराष्ट्र के सहयोग से, इस वर्ष 8 वां सामूहिक सुंदरकांड महापर्व आयोजित किया गया है. बताया गया कि यह पुणे का सबसे बड़ा आध्यात्मिक आयोजन बनने जा रहा है. हनुमान जन्मोत्सव के पावन अवसर पर गुरुवार (2 अप्रैल) को दोपहर 3 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में सामूहिक सुंदरकांड पाठ एवं हनुमान चालीसा, ज्ञान, ध्यान और गान के साथ सभी के लिए महाप्रसाद भंडारा होगा. आयोजकों की ओर से बताया गया कि श्री वर्धमान सांस्कृतिक भवन (गंगाधाम चौक के आगे, बिबवेवाड़ी) में होनेवाले इस कार्यक्रम में 5,100 से अधिक भक्तों की सहभागिता होगी. यहां 51 लाख जय श्री राम नाम जाप किया जाएगा. भव्य सामूहिक सुंदरकांड पाठ एवं हनुमान चालीसा और आकर्षक सुंदर झांकियां प्रस्तुत की जाएंगी. सुंदरकांड पाठ का संचालन प्रसिद्ध भजन गायिका मीनू पोद्दार एवं संजय पारख द्वारा किया जाएगा तथा संगीत संयोजन विख्यात ढोलकी वादक गुरुनाथ केद्रेकर करेंगे. युवा पीढ़ी को जोड़ने के उद्देश्य से इस वर्ष The Sacred Rhythm Band द्वारा भजन जैमिंग सेशन भी आयोजित किया गया है. 54 दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के वरिष्ठ अंतरराष्ट्रीय शिक्षक प्रशासक स्वामी माधवानंदजी की दिव्य उपस्थिति भी रहेगी. यह आयोजन 54 दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत श्री कसबा गणपति मंदिर से 8 फरवरी 2026 को हुई थी. यह कार्यक्रम सभी के लिए निः शुल्क एवं खुला है. कार्यक्रम संबंधी जॉयफुल सुंदरकांड ग्रुप (पुणे) के सुनील पोद्दार: 9850909305, महेश सलूजा: 9822792929 से या salujamaheshgmail.com इस मेल आई-डी पर संपर्क किया जा सकता है.  
 
आखिर युवाओं के लिए क्यों जरूरी है सुंदरकांड का पाठ? आत्मविश्वास और निडरता : सुंदरकांड हमें हनुमानजी की तरह निडर और आत्मविश्वासी बनना सिखाता है. आज के समय में युवाओं को जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने के लिए इसी अटूट विश्वास और प्रेरणा की आवश्यकता है. लक्ष्य के प्रति एकाग्रता : हनुमानजी ने बिना रूके और बिना भटके लंका तक का सफर तय किया था. युवाओं को इससे यह सीख मिलती है कि अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह समर्पित रहें और रास्ते की रूकावटों से न घबराएं. तनाव मुक्ति और मानसिक शांति : आज की भागदौड़ भरी प्रतिस्पर्धा वाली जिंदगी में युवा अक्सर तनाव का शिकार होते हैं. सुंदरकांड का नियमित पाठ मन को शांत करता है और सकारात्मक ऊर्जा के साथ जीवन जीने की शक्ति देता है.