पुणे, 31 मार्च (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
राज्य में जमीन के रेडी रेकनर दर वर्ष 2026-27 के लिए पिछले वर्ष के स्तर पर ही बनाए रखे गए हैं. वर्ष 2025-26 में इन दरों में औसतन 3.92 प्रतिशत वृद्धि की गई थी, लेकिन आगामी वित्तीय वर्ष में इनमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है. यह जानकारी राज्य के सह पंजीकरण महानिरीक्षक राजेंद्र मुठे ने दी. राजेंद्र मुठे और उप पंजीकरण महानिरीक्षक धनंजय खोत ने बताया कि पिछले वर्ष महानगरपालिका क्षेत्रों में 5.95 प्रतिशत वृद्धि की गई थी, जबकि ग्रामीण और मुंबई क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम वृद्धि हुई थी. नगरपालिका क्षेत्रों में 4.97 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई थी. मुंबई को छोड़कर राज्य में औसतन 4.39 प्रतिशत वृद्धि हुई थी. उन्होंने बताया कि जिन क्षेत्रों में विकास योजना या प्रादेशिक योजना में बदलाव या मंजूरी मिली है, वहां इन परिवर्तनों को ध्यान में रखते हुए वार्षिक मूल्य दर तालिका में संशोधन किया गया है. इस वर्ष दर बढ़ने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन निर्माण क्षेत्र की मांग और वैेिशक परिस्थितियों को देखते हुए दर स्थिर रखने का निर्णय लिया गया. राजस्व का 95.38% लक्ष्य हासिल राज्य में स्टांप और पंजीकरण शुल्क के रूप में अब तक 60,568 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि लक्ष्य 63,500 करोड़ रुपये का था. इस प्रकार 95.38 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया गया है. वर्षभर में 30 लाख संपत्ति खरीद- बिक्री के दस्तावेज और 14.73 लाख किराया अनुबंध पंजीकृत किए गए.
पीएमआरडीए क्षेत्र में पुरानी योजना लागू धनंजय खोत ने बताया कि पीएमआरडीए क्षेत्र में पहले विकास योजना के अनुसार दर तय किए गए थे, लेकिन वह योजना रद्द हो गई है. इसलिए अब पुराने प्रादेशिक योजना के अनुसार ही दर लागू रहेंगे.
रेडी रेकनर कायम रखने का निर्णय स्वागत योग्य
निर्माण क्षेत्र में फिलहाल मंदी है और फ्लैटों की खरीद- बिक्री की गति भी धीमी हो गई है. रेडी रेकनर बढ़ने से बिक्री और कम हो जाती, जिससे सरकार के राजस्व में भी गिरावट आती. यदि रेडी रेकनर की दरें बढ़ाई जातीं, तो इसका सभी क्षेत्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता. यदि फ्लैटों की बिक्री कम होती है, तो उसका सीधा असर इससे जुड़े 200-250 उद्योगों पर पड़ता है, जो बड़े पैमाने पर रोजगार प्रदान करते हैं. इसलिए, रेडी रेकनर कायम रखने का निर्णय स्वागत योग्य है. - डॉ. नरेश मित्तल, निदेशक, मित्तल ग्रुप
पूरी इंडस्ट्री के लिए बहुत अच्छी खबर
वर्तमान में समग्र वेिश अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है और इसके कारण प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से भारत की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है. रेडी रेकनर दरें स्थिर रहना रियल एस्टेट इंडस्ट्री और घर खरीदने की इच्छा रखने वाले ग्राहकों के लिए बहुत बड़ा समर्थन है. एआई और युद्ध जैसी वजहों से समग्र अर्थव्यवस्था में कई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं. इस पृष्ठभूमि में रेडी रेकनर दरों का स्थिर रहना ग्राहकों, रियल एस्टेट डेवलपर्स और पूरी इंडस्ट्री के लिए बहुत अच्छी खबर है. - सचिन भंडारी, एमडी, वीटीपी डेवलपर्स
पूरी इंडस्ट्री को इससे समर्थन मिलेगा
यह सरकार द्वारा लिया गया एक अत्यंत सराहनीय निर्णय है, ऐसा मुझे लगता है. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रियल एस्टेट इंडस्ट्री को इसी तरह के समर्थन की आवश्यकता थी. रेडी रेकनर दरों में वृद्धि न होने से लेनदेन को गति मिल सकेगी. रेडी रेकनर रेट न बढ़ने से सेंटिमेंट्स सकारात्मक रहेंगे. - मनोज गुप्ता, निदेशक, महालक्ष्मी डेवलपर्स दरें न बढ़ाने के अच्छे परिणाम दिखेंगे युद्ध की पृष्ठभूमि में लोग असमंजस में हैं. भारत पर इसका कोई सीधा असर नहीं था, लेकिन लगातार नकारात्मक खबरों से लोगों में चिंता का माहौल बना हुआ है. सरकार ने रेडी रेकनर की दरें नहीं बढ़ाईं, यह वास्तव में एक बहुत अच्छा कदम है. मैं मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और पूरे मंत्रिमंडल का आभार व्यक्त करता हूं. - कृष्णकुमार गोयल, कोहिनूर ग्रुप
आम घर खरीदारों को राहत देने वाला निर्णय
कुल मिलाकर वैेिशक अशांति और युद्ध की स्थिति के कारण इसका प्रभाव हर व्यवसाय पर पड़ने वाला है. ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने इस बात पर संज्ञान लिया है. हर तरफ महंगाई बढ़ी है या बढ़ने वाली है. नए मध्यमवर्गीय लोग जो फ्लैट खरीदना चाहते हैं, उन खरीदारों पर बोझ न बढ़े, इसलिए सरकार ने एक अच्छा निर्णय लिया है. यदि रेडी रेकनर दरें बढ़ जातीं, तो लोगों को स्टैम्प ड्यूटी अधिक चुकानी पड़ती. इससे लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता, जो कि अब नहीं होगा. - राजेश सांकला, निदेशक सिद्धिविनायक ग्रुप
यह बेहद स्वागत योग्य कदम
वर्तमान स्थिति में बाजारों में सेंटीमेंट डाउन है. पूरे प्रोजेक्ट की लागत का सीधा 30% हिस्सा रेडी रेकनर पर निर्भर करता है. अगर लागत 4,000 रुपये है, तो 1,200 रुपये का सीधा संबंध इससे होता है. इसका मतलब यह है कि अगर रेडी रेकनर रेट 10% बढ़ता है, तो लागत में 120 रुपये की वृद्धि होती है और इसके कई अन्य कैस्केडिंग इफेक्ट भी होते हैं. इसलिए, रेडी रेकनर दरों में बढ़ोतरी न करना बेहद स्वागत योग्य कदम है. - सचिन गर्ग, सीएमडी, साहिल प्रॉपर्टीज
युद्ध जैसी स्थिति में राहत का फैसला
युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते बाजार पर पहले से ही दबाव बना हुआ है. ऐसे समय में सरकार द्वारा रेडी रेकनर दरों में बढ़ोतरी न करने का निर्णय बेहद संवेदनशील और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है. इस फैसले से रियल एस्टेट क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और घर खरीदने की योजना बना रहे लोगों को आर्थिक रूप से बड़ी राहत मिलेगी. यदि इस समय दरों में वृद्धि की जाती, तो पहले से महंगाई से जूझ रहे खरीदारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता. - प्रवीण बढेकर, सीएमडी, बढ़ेकर गु्रप
रियल एस्टेट बाजार में स्थिरता और ग्रोथ को बढ़ावा
पुणे में रेडी रेकनर रेट में वृद्धि न होने से प्रॉपर्टी खरीदना अधिक किफायती हो जाता है, क्योंकि स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क कम रहते हैं. इससे खरीदारों और निवेशकों को राहत मिलती है और बाजार में डिमांड बढ़ती है. स्थिर रेट्स डेवलपर्स के लिए भी फायदेमंद होते हैं, इस तरह, रेडी रेकनर रेट न बढ़ना रियल एस्टेट बाजार में स्थिरता और ग्रोथ को बढ़ावा देता है. - राजेश मित्तल, एमडी, शुभ डेवलपर्स
पूरी इंडस्ट्री को इससे समर्थन मिलेगा
यह सरकार द्वारा लिया गया एक अत्यंत सराहनीय निर्णय है, ऐसा मुझे लगता है. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए रियल एस्टेट इंडस्ट्री को इसी तरह के समर्थन की आवश्यकता थी. रेडी रेकनर दरों में वृद्धि न होने से लेनदेन को गति मिल सकेगी. रेडी रेकनर रेट न बढ़ने से सेंटिमेंट्स सकारात्मक रहेंगे. - मनोज गुप्ता, निदेशक, महालक्ष्मी डेवलपर्स