1.74 लाख कराेड़ के 5 बड़े प्राेजे्नट काे कैबिनेट की मंजूरी

    10-Apr-2026
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प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी की अध्यक्षता में बुधवार काे हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. बैठक में कुल 1,74,207 कराेड़ रुपये के पांच बड़ी परियाेजनाओं काे मंजूरी दी गई है. इन फैसलाें में जयपुर मेट्राे फेज-2, किसानाें के लिए खाद सब्सिडी, एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी और अरुणाचल प्रदेश के दाे बड़े हाइड्राे की परियाेजनाएं भी शामिल हैं.सरकार ने जयपुर मेट्राे फेज-2 काे 13,038 कराेड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी है. यह 41 किलाेमीटर लंबा काॅरिडाेर हाेगा जिसमें 36 स्टेशन बनेंगे और यह प्रहलादपुरा से टाेडी माेड तक जाएगा. वहीं, खरीफ 2026 के लिए 41,534 कराेड़ रुपये की खाद सब्सिडी भी मंजूर की गई है.
 
इससे किसानाें काे डीएपी और अन्य उर्वरक सस्ती कीमत पर मिलेंगे और खेती की लागत कम हाेगी. आइए, सरकार द्वारा सभी लिए गए फैसलाें पर नजर डालते हैं.और आसान भाषा में समझने की काेशिश करते हैं.जयपुर मेट्राे फेज-2 शहर के ट्रांसपाेर्ट सिस्टम काे पूरी तरह बदलने वाली परियाेजना मानी जा रही है. यह 41 किलाेमीटर लंबा नाॅर्थ-साउथ काॅरिडाेर हाेगा, जाे प्रहलादपुरा से टाेडी माेड तक जाएगा. इस रूट में 36 स्टेशन हाेंगे और यह शहर के बड़े इलाकाें जैसे एयरपाेर्ट, सीतापुरा इंडस्ट्रियल एरिया, टाेंक राेड और एसएमएस अस्पताल काे जाेड़ेगा. इससे लाेगाें काे तेज, सस्ता और आसान सफर मिलेगा.
 
इस परियाेजना का सबसे बड़ा फायदा यह हाेगा कि शहर में ट्रैफिक जाम कम हाेगा और प्रदूषण भी घटेगा. अभी मेट्राे के पहले चरण में राेज करीब 60 हजार लाेग सफर करते हैं, लेकिन फेज-2 आने के बाद यह संख्या कई गुना बढ़ने की उम्मीदै. यह परियाेजना 2031 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और इससे जयपुर काे आधुनिक शहर बनाने में मदद मिलेगी.सरकार ने खरीफ 2026 सीजन के लिए 41,534 कराेड़ रुपये की न्यूट्रिएंट बेस्ड सब्सिडी काे मंजूरी दी है. यह सब्सिडी फाॅस्फेटिक और पाेटाश उर्वरकाें पर दी जाएगी, जिसमें डीएपी और एनपीके जैसे खाद शामिल हैं. इसका मकसद किसानाें काे सस्ती कीमत पर खाद उपलब्ध कराना है, ताकि खेती की लागत कम हाे सके. अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकाें की कीमताें में उतार-चढ़ाव काे देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है. इस याेजना के तहत कंपनियाें काे सब्सिडी दी जाएगी, जिससे किसान काे सीधे सस्ता खाद मिलेगा. सरकार का दावा है कि इससे खेती काे बढ़ावा मिलेगा और उत्पादन में सुधार हाेगा.