लवले, 12 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
एक महत्वपूर्ण मोड़ पर, जहां हमारी 65% से अधिक जनसंख्या 27 वर्ष से कम आयु की है, शिक्षा, कौशल विकास और नीतियों की भूमिका भारत के आर्थिक और वैेिशक भविष्य को परिभाषित करेगी, यह विचार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार (निवेश और रणनीति), कौस्तुभ धवसे ने व्यक्त किए. महाराष्ट्र के 2029 तक ट्रिलियन-डॉलर अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य पर जोर देते हुए, उन्होंने रेखांकित किया कि संस्थानों और नीति निर्माताओं द्वारा आज उठाए गए कदम भविष्य की जरूरतों के अनुरूप कार्यबल तैयार करने में निर्णायक साबित होंगे. सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने भारतीय वेिशविद्यालय संघ के सहयोग से, लवले कैंपस में वार्षिक इंटरनेशनलाइजेशन ऑफ हायर एजुकेशन सम्मेलन 2026 की मेजबानी की. परिवर्तन के दौर में अंतरराष्ट्रीय शिक्षा: प्रथाएं, नीतियां और दृष्टिकोण, इस विषय पर आधारित इस सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षा के बदलते परिदृश्य पर विचार-विमर्श करने के लिए शिक्षा जगत, सरकार और वैेिशक संस्थानों के प्रमुख विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया. सम्मेलन का उद्घाटन समारोह में डीकिन वेिशविद्यालय के कुलपति और अध्यक्ष प्रो. इयान मार्टिन प्रमुख रूप से उपस्थित थे. समारोह की अध्यक्षता एस.आई.यू. के कुलाधिपति डॉ. एस. बी. मजुमदार ने की. साथ ही डॉ. विनय पाठक (अध्यक्ष, ए.आई.यू.), डॉ. विद्या येरवडेकर (प्रो-चांसलर, एस.आई.यू.) डॉ. रामकृष्णन रमन (कुलपति, एस.आई.यू.) समेत गणमान्य भी उपस्थित रहे: महाराष्ट्र के रणनीतिक दृष्टिकोण पर विस्तार से चर्चा करते हुए, धवसे ने वैेिशक सहयोग और नवाचार के माध्यम से उच्च शिक्षा को मजबूत करने पर राज्य के ध्यान को रेखांकित किया. उन्होंने नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास 300 एकड़ में फैले एक महत्वाकांक्षी शिक्षा केंद्र इंटरनेशनल एजुसिटी परियोजना के बारे में बात की.
सार्थक वितरण और निरंतर साझेदारी पर ध्यान देना बेहद जरुरी अंतर्राष्ट्रीय दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए, प्रो. इयान मार्टिन ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रांसनेशनल शिक्षा की सफलता एकतरफा मॉडल के बजाय वास्तविक साझेदारी में निहित है. उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जहां भारत में अवसर अपार हैं, वहीं संस्थानों को इस क्षमता का वास्तविक लाभ उठाने के लिए सार्थक वितरण, अनुकूलनशीलता और निरंतर साझेदारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए.