ईरान से बातचीत नाकाम हाेने और अमेरिकी राष्ट्रपति डाेनाल्ड ट्रंप द्वारा हाेर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी करने के ऐलान से मिडिल-ईस्ट में तनाव फिर बढ़ गया. जहां ट्रंप कह रहे हैं कि अमेरिका ने ईरान की नाैसेना काे लगभग खत्म कर दिया है, वहीं ईरान ने साेमवार काे कहा कि वह दुश्मन देशाें की हरकताें का मुंहताेड़ जवाब देने की पूरी ताकत रखता है. इस बीच एक रिपाेर्ट में दावा किया गया है कि वार्ता नाकाम हाेने के बाद अमेरिका एक बार फिर ईरान पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है. वाॅल स्ट्रीट जर्नल की रिपाेर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर दाेबारा एयरस्ट्राइक करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं. इस बीच चीन भी खुलकर ईरान के साथ आ गया है.
उसने ट्रंप द्वारा हाेर्मुज की नाकेबंदी की धमकी पर कि यह जलमार्ग पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है और इसे सुरक्षित रखना सबकी जिम्मेदारी है. साथ ही चीन ने चेतावनी भी दी कि ट्रंप हमारे जहाजाें के बारे में दखल न दें. हमारे जहाज राेके ताे अंजाम बुरा हाेगा. चीन ने यह भी कहा कि ईरान से हमारा व्यापारिक रिश्ता काेई नहीं राेक सकता. अमेरिका पहले ही हाेर्मुज स्ट्रेट पर नाैसैनिक नाकेबंदी का ऐलान कर चुका है.व्हाइट हाउस ने कहा है कि सभी विकल्प खुले हैं और हालात के अनुसार आगे फैसला लिया जाएगा. अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने पहले के दावे काे दाेहराया है कि अमेरिका पूर्वी समयानुसार सुबह 10 बजे (24:00 जीएमटी) से ईरानी बंदरगाहाें की नाकाबंदी शुरू कर देगा. समुद्री खुफिया एजेंसी लाॅयड्स लिस्ट का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नाकाबंदी की घाेषणा के बाद हाेर्मुज स्ट्रेट से कम गति से चल रहा यातायात तुरंत रुक गया और कुछ जहाज वापस लाैट गए.
ईरान ने साफ कहा है कि हमारे बंदरगाहाें काे ब्लाॅक किया ताे खाड़ी के सभी पाेर्ट तबाह कर देंगे. ईरान ने यह भी दाेहराया कि हाेर्मुज से केवल उन्हीं जहाजाें काे गुजरने दिया जाएगा, जाे उनके नियमाें का पालन करेंगे, जबकि दुश्मन से जुड़े जहाजाें काे राेक दिया जाएगा. ईरान में पिछले 45 दिनाें से इंटरनेट सेवाएं लगभग ठप हैं.साइबर निगरानी संस्था नेटब्लाॅक्स के अनुसार, सरकार ने देश की अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी काे 1,056 घंटे से ज्यादा समय से सीमित कर रखा है.इसका मतलब यह है कि लाेग न ताे ठीक से साेशल मीडिया चला पा रहे हैं और न ही बाहरी दुनिया से संपर्क कर पा रहे हैं.इस लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट का असर आम नागरिकाें, काराेबार और छात्राें पर साफ दिखाई दे रहा है. ऑनलाइन काम करने वाले लाेग सबसे ज्यादा परेशान हैं, क्याेंकि उनका काम पूरी तरह इंटरनेट पर निर्भर है.