महात्मा ज्याेतिराव फुले के विचार आज की शिक्षा व्यवस्था काे नई दिशा देने वाले हैं. शिक्षा के माध्यम से समाज परिवर्तन की उनकी साेच आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, यह विचार सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्राे. डाॅ. संजय बी. चाेरडिया ने व्यक्त किए. वे सूर्यदत्त ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट्स में महात्मा फुले की 200वीं जयंती के अवसर पर आयाेजित कार्यक्रम में बाेल रहे थे.
कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय और सतत याेगदान के लए डाॅ. रवी चाैधरी काे ‘सूर्यभारत राष्ट्रीय पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया. बावधन स्थित सूर्यदत्त कैंपस में आयाेजित इस कार्यक्रम में सहयाेगी उपाध्यक्ष स्नेहल नवलखा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी अक्षित कुशल, अधिष्ठाता डाॅ. प्रतिक्षा वाबले, प्राे. केतकी बापट, डाॅ.सिमी रेठरेकर, डाॅ. सारिका झांबड सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक, कर्मचारी और छात्र उपस्थित रहे.
भव्य और प्रेरणादायी वातावरण में आयाेजित यह कार्यक्रम समाज जागरूकता, महिला शिक्षा, किसानाें और वंचित वर्गाें के उत्थान के लिए जीवन समर्पित करने वाले महात्मा फुले के कार्याें काे नमन करते हुए यह आयाेजन विचाराें के मंथन का मंच बना. पूरे परिसर में शिक्षा ही परिवर्तन का माध्यम है का संदेश गूंजता रहा. डाॅ. रवि चाैधरी ने कहा कि महात्मा फुले के विचाराें से ही मुझे शिक्षा क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली. शिक्षा केवल कैरियर बनाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज काे बदलने की शक्ति है.कार्यक्रम में विद्यार्थियाें ने महात्मा फुले के जीवन और कार्याें पर आधारित प्रस्तुतियां, विचार-विमर्श और सामाजिक संदेश देने वाले कार्यक्रम प्रस्तुत किए. कार्यक्रम का संचालन डाॅ. सुनील धनगर ने किया.