बच्चों को कौशल आधारित शिक्षा हेतु प्राथमिकता देनी चाहिए

डॉ. साइरस पूनावाला की प्राइमरी सेक्शन की प्रिंसिपल श्रीमती माधुरी के विचार

    14-Apr-2026
Total Views |

nfhm
 
आधुनिक शिक्षा की दिशा और चुनौतियों पर प्रख्यात शिक्षाविद्‌‍ एवं शोधकर्ता डॉ. संगीता पांडेय ने डॉ. साइरस पूनावाला की प्राइमरी सेक्शन की प्रिंसिपल श्रीमती माधुरी से विशेष बातचीत की. प्रस्तुत हैं उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश
सवाल : आपने शिक्षा क्षेत्र में अपना सफर कैसे शुरू किया?
जवाब: सच कहूं तो, बचपन से ही मेरा सपना एक टीचर बनने का था क्योंकि मैं अपने टीचर से बहुत अयादा प्रभावित थी. मैंने अपने टीचिंग कैरियर की शुरुआत साल 2001 में अहिल्यानगर के एक इंग्लिश मीडियम स्कूल से की थी. मेरी सास का जगदाले परिवार से रिश्ता है, वे शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ी हुई हैं और शरद पवार की छोटी बहन हैं. उन्होंने ही मुझे टीचर बनने के लिए प्रेरित किया, और आज मैं एक स्कूल की प्रिंसिपल हूं इस तरह मैंने अपने करियर की शुरुआत की.
सवाल: एक प्रधानाचार्य के रूप में आपको रोज किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है?
जवाब: एक प्रधानाचार्य के रूप में हर दिन नई चुनौतियाँ सामने आती हैं. सबसे बड़ी चुनौती होती है शिक्षकों और विद्यार्थियों का सही प्रबंधन करना, क्योंकि हर व्यक्ति की सोच और कार्यशैली अलग होती है. और अगर मुझे आपको पिछले कुछ सालों की तुलना में चुनौतियों के बारे में बताना हो, तो इन सालों में मौजूदा हालात में चुनौतियां अयादा हैं क्योंकि टीचर की नौकरी असुरक्षित हो गई है और एजुकेशन सिस्टम और सरकारी सिस्टम से स्टूडेंट्स को बहुत आजादी मिल गई है. स्टूडेंट्स और टीचर्स के लिए बहुत मुश्किल हो गया है क्योंकि स्टूडेंट्स को पता है कि अगर वे कुछ भी कर सकते हैं तो उन्हें सजा नहीं मिलेगी. माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को सही सभ्यता दें, और ये सिखाएं घर से ही कि आपको अपने शिक्षकों, बड़े-बुजुर्गों का भी सम्मान करना चाहिए.
सवाल: आपके विद्यालय का विजन और मिशन क्या है?
जवाब: हमारे स्कूल का लोगो है- ‌‘सेवा और बलिदान‌’ इसका मतलब है कि हम समाज को अपना योगदान देते ह्‌ैं‍. हमारे विद्यालय में 7वीं कक्षा के बाद छात्राओं को स्कॉलरशिप के माध्यम से निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है. साथ ही, विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जर्मन भाषा, रोबोटिक्स लैब, भारतीय एवं पाश्चात्य संगीत तथा खेल-कूद जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है.
सवाल: अगर शिक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव लाना हो, तो वह क्या होना चाहिए?
 जवाब: अगर मुझे शिक्षा प्रणाली में एक बड़ा बदलाव लाने का अवसर मिले, तो मैं रटने की बजाय समझ और कौशल आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दूंगी. आज की शिक्षा प्रणाली में बच्चों पर अंकों और परीक्षा का बहुत दबाव होता है, जिससे उनकी रचनात्मकता और वास्तविक सीखने की क्षमता प्रभावित होती है. इसलिए जरूरी है कि हम बच्चों को केवल किताबों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें जीवन के वास्तविक अनुभवों से जोड़्‌ें.
सवाल: अभिभावकों की अपेक्षाओं को कैसे संतुलित किया जाता है?
जवाब: हर अभिभावक अपने बच्चे के लिए सर्वोत्तम चाहता है. इसलिए उनकी बातों को ध्यान से सुनना और सही संवाद बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. संतुलन बनाना ही सबसे बड़ी चुनौती है.
 सवाल: आपके कैरियर का कोई ऐसा क्षण, जिसने आपको सबसे अधिक गर्व महसूस कराया हो?
जवाब: मेरे कई स्टूडेंट्स आज ISRO में काम कर रहे हैं, और कुछ जर्मनी व णड में हैं. उनमें से कई MBBS डॉक्टर भी ह्‌ैं‍. यही मेरे लिए गर्व का विषय है.
सवाल: आज के बच्चों को पढ़ाई के लिए कैसे Motivate किया जा सकता है?
 जवाब: आज के दौर मेंC_Creative learning भी एक प्रभावी माध्यम है| केवल किताबों तक सीमित रहने के बजाय Activity-based learning, storytelling और practical approaches को अपनाना चाहिए, जिससे पढ़ाई रोचक बन सके.
 सवाल: आज के युवा शिक्षकों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
जवाब: आज के युवा शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं. भविष्य निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत अहम है. सभी शिक्षक अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें. जो बच्चा आपके सामने है, वह अभी सिर्फ एक कच्ची मिट्टी के ढेले जैसा है, आपको उसे तराशना है, उसे एक अच्छा आकार देना है. हर बच्चा अलग होता है, उसकी सीखने की क्षमता और रुचियां भिन्न होती हैं. एक ही तरीके से पढ़ाने के बजाय, बच्चों की जरूरतों के अनुसार अपनी शिक्षण शैली में लचीलापन लाना चाहिए.