गाैतमबुद्ध नगर यानी नाेएडा में सैलरी बढ़ाने की मांग काे लेकर दूसरे दिन भी श्रमिकाें द्वारा प्रदर्शन किया गया. इससे इलाके में भारी तनाव है. पुलिस के साथ झड़पें भी हुईं. कई स्थानाें पर प्रदर्शनकारियाें द्वारा पथराव किया गया. वहीं इसकी चिंगारी गाेरखपुर में भी भड़की. गाेला क्षेत्र में संचालित कम्प्रेस्ड बायाे गैस प्लांट मेतन वृद्धि की मांग काे लेकर कर्मचारी गेट पर प्रदर्शन किए. यहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया. नाेएडा में पुलिस कमिश्नर ने कहा-वाट्सअप ग्रुप बनाकर भीड़ काे भड़काया गया है. इसमें बाहरी लाेग भी प्रदर्शन में शामिल हैं. अब तक 350 लाेगाें काे गिरफ्तार किया जा चुका है.भीड़ ने 23 जगहाें पर पुलिस की गाड़ियाें पर पथराव किया. पुलिस ने थाेड़ी देर में ही हालात पर काबू पा लिया.
प्रदर्शनकारियाें काे वहां से खदेड़ दिया.फिलहाल, पुलिस और अर्द्धसैनिक बलाें के जवान इंडस्ट्रियल इलाकाें में सुबह 5 बजे से फ्लैग मार्च कर रहे हैं. सीसीटीवी और ड्राेन से निगरानी की जा रही है.इसके अलावा, पीएसी और आरएएफ की 15 कंपनियां, 26 अफसर (8 एडिशनल एसपी और 18 डीएसपी) नाेएडा भेजे गए हैं. आज ज्यादातर कंपनियां बंद हैं.डीजीपी राजीव कृष्ण लखनऊ के कंट्राेल रूम से माॅनिटरिंग कर रहे. कहा- क्षतिग्रस्त संपत्ति की भरपाई भी उपद्रवियाें से कराई जाएगी. वहीं, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा- अब तक 300 से अधिक गिरफ्तारियां की गई हैं. अफवाह फैलाने वाले कुछ ग्रुप आइडेंटिफाई किए गए हैं. कुछ ऐसे लाेग हैं, जाे अलग-अलग जगहाें पर भी पाए गए हैं. 50 ए्नस हैंडल के जरिए हिंसा के लिए उकसाया गया. इधर, यूपी सरकार ने साेमवार देर रात फैक्ट्री कर्मचारियाें की सैलरी बढ़ा दी.
न्यूनतम मजदूरी दराें में 3000 रुपए तक की बढ़ाेतरी की गई है. बढ़ी हुई सैलरी 1 अप्रैल से लागू हाेगी. साेमवार काे बवाल के बाद हाईलेवल कमेटी ने रात में कर्मचारियाें के साथ बैठक की. इसके बाद रात डेढ़ बजे सरकार ने आदेश जारी कर कमेटी की सिफारिशाें पर मुहर लगा दी.इससे पहले, नाेएडा में साेमवार काे अलग-अलग इलाकाें में फैक्ट्री कर्मचारियाें ने हिंसक प्रदर्शन किया.
9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग काे लेकर आंदाेलन कर रहे 42 हजार कर्मचारी सड़काें पर उतर आए.350 से ज्यादा फैक्ट्रियाें में ताेड़फाेड़ की. 50 से ज्यादा गाड़ियां फूंक दीं. पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने गाेंडा में कहा- मजदूराें की मजदूरी बहुत कम है. मजदूर गांव छाेड़कर शहराें में जाते हैं, इसलिए मजदूरी थाेड़ी बढ़ाई जानी चाहिए.