मृत्यु से नहीं ; मृत्यु के भय से छुटकारा हाे सकता है

    15-Apr-2026
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Osho 
 
प्रश्न : मृत्यु का बड़ा भय है. क्या इससे छूटने का काेई उपाय है?
 
 
मृत्यु ताे उसी दिन हाे गई जिस दिन तुम जन्मे. अब छूटने का काेई उपाय नहीं.जिस दिन पैदा हुए उसी दिन मरना शुरू हाे गए. अब एक कदम उठा लिया. अब दूसरा ताे उठाना ही पड़ेगा. जैसे कि प्रत्यंचा से तीर निकल गया ताे अब लाैटाने का क्या उपाय है? जन्म हाे गया, ताे अब माैत से बचने का काेई उपाय नहीं.जिस दिन तुम्हारी यह बात समझ में आ जाएगी कि माैत ताे हाेनी ही है, सुनिश्चित हाेनी है-और सब अनिश्चित है, माैत ही निश्चित है. उसी दिन भय समाप्त हाे जाएगा. जाे हाेना ही है, उसका क्या भय? जाे हाेकर ही रहनी है, उसका क्या भय? जिसकाे टाला ही नहीं जा सकता, उसका क्या भय ? जिसकाे अन्यथा किया ही नहीं जा सकता, उसका क्या भय? आशंका है तुम्हें जिस दुर्घटना की घटना घट चुकी है वह पले ही भीतरी सतह पर हाे चुका है. मर गए तुम उसी दिन तुम जन्मे. जिस दिन तुमने सांस ली, उसी दिन सांस छूटने का उपाय हाे गया. अब सांस किसी भी दिन छुटेगी.
 
तुम सदा न रह सकाेगे. इसलिए इस भय काे समझने की काेशिश कराे, बचने की आशा कम कराे.बचने काे ताे काेई नहीं बच पाया. कितने लाेगाें ने कितने उपाय किए हैं बचने के.तुम पूछते हाे, मृत्यु का बड़ा भय है, क्या इससे छूटने का काेई उपाय है? छूटने का उपाय करते रहाेगे, भय बढ़ता जाएगा. तुम छूटने का उपाय कराेगे, माैत राेज करीब आ रही है.क्याेंकि बुढ़ापा राेज करीब आ रहा है. तुम जितने ही उपाय कराेगे उतने ही घबड़ाते जाओगे. मुझसे तुमने पूछा है, अगर मेरी बात समझ सकाे ताे मैं तुमसे कहूंगा : माैत काे स्वीकार कर लाे, छूटने की बात ही छाेड़ाे. जाे हाेना है, हाेना है. उसे तुम स्वीकार कर लाे. उसे तुम इतने अंतरतम से स्वीकार लाे कि उसके प्रति विराेध न रह जाए. वहीं भय समाप्त हाे जाएगा.मृत्यु से ताे नहीं छूटा जा सकता, लेकिन मृत्यु के भय से छुटकारा हाे सकता है.
 
मृत्यु ताे हाेगी, लेकिन भय आवश्यक नहीं है. भय तुमने पैदा किया है. वृक्ष ताे भयभीत नहीं हैं, माैत उनकी भी हाेगी.क्याेंकि उनके पास साेच-विचार की बुद्धि नहीं है. पशु ताे चिंता में नहीं बैठे हैं, उदास नहीं बैठे हैं कि माैत हाे जाएगी, माैत उनकी भी हाेगी. माैत ताे स्वाभाविक है. वृक्ष, पशु, पक्षी, आदमी, सभी मरेंगे.लेकिन र्सिफ आदमी भयभीत है. क्याेंकि आदमी साेचता है कि किसी तरह बचने का उपाय हाे जाए.काेई रास्ता निकल आए. तुम जब तक बचना चाहाेगे तब तक भयभीत रहाेगे. तुम्हारे बचने की आकांक्षा से ही भय पैदा हाे रहा है. स्वीकार कर लाे! माैत है, हाेनी है. ताे जब हाेनी है हाे जाएगी.हर्जा क्या है? जन्म के पहले तुम नहीं थे, काेई तकलीफ थी? कभी इस तरह साेचाे, माैत के बाद तुम िफर नहीं हाे जाओगे. जाे जन्म के पहले हालत थी, वही माैत के बाद हालत हाे जाएगी. जब तक तुमने पहली सांस न ली थी, तब तक का तुम्हें कुछ याद है? काेई परेशानी है? काेई झंझट!
 
ऐसे ही जब आखिरी सांस छूट जाएगी, उसके बाद भी क्या झंझट, क्या परेशानी? सुकरात मरता था, किसी ने पूछा कि घबड़ा नहीं रहे आप? सुकरात ने कहा, घबड़ाना क्या है? या ताे जैसा आस्तिक कहते हैं, आत्मा अमर है, ताे घबड़ाने की काेई जरूरत ही नहीं! आत्मा अमर है ताे क्या घबड़ाना! या जैसा कि नास्तिक कहते हैं, कि आत्मा मर जाती है, ताे भी बात खत्म हाे गई.जब खत्म ही हाे गए ताे घबड़ाना क्यों? घबड़ाएगा काैन? बचे ही नहीं, ताे न रहा बांस न बजेगी बांसुरी. ताे सुकरात ने कहा दाेनाें हालत में -दाेनाें में से काेई ठीक हाेगा, और ताे काेई उपाय नहीं है, या ताे आस्तिक ठीक, या नास्तिक ठीक.सुकरात ने कहा, इसलिए हम निश्चित हैं.जाे भी हाेगा, ठीक है. मृत्यु से बचने की मत पूछाे, ध्यान में जागने की पूछाे. अगर तुम्हें इतना पता चल जाए कि मैं भीतर चैतन्य हूं, ताे िफर शरीर ठीक है, तुम्हारा आवास है. घर काे अपना हाेना मत समझ लाे. और जैसे ही तुम्हें यह बात समझ में आनी शुरू हाे जाएगी.तुम्हारे भीतर अपूर्व क्रांति घटित हाेगी.