चुनावाें के शाेर में हम आंखें नहीं मूंद सकते: सुप्रीम काेर्ट

    15-Apr-2026
Total Views |
 

SC 
 
सुप्रीम काेर्ट ने साेमवार काे पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) मामले पर सुनवाई के दाैरान गंभीर सवाल उठाए. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जाॅयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि यह राज्य बनाम चुनाव आयाेग की लड़ाई नहीं है, बल्कि वाेटर दाेनाें के बीच फंसा हुआ है. जस्टिस बागची ने आयाेग से कहा- मान लीजिए कि जीत का अंतर 2% है और 15% मतदाता वाेट नहीं डाल सके, ताे हमें इस पर साेचना हाेगा. यह चिंता का मामला हाे सकता है. यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है. हालांकि काेर्ट ने मतदाता सूची से हटाए गए बंगाल के करीब 35 लाख लाेगाें काे इस महीने हाेनेवाले विधानसभा चुनाव में वाेट देने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है.काेर्ट ने कहा कि ऐसा करने से अपीलीय ट्रिब्यूनल पर भारी बाेझ पड़ेगा और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हाेगी.
 
जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रियमें काम कर रहे न्यायिक अधिकारियाें से भी जांच प्रक्रिया के दाैरान कुछ गलतियां हुई हाेंगी. उन्हाेंने कहा- न्यायिक अधिकारियाें से 100% सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती, क्याेंकि वे बहुत प्रेशर में काम कर रहे हैं. जस्टिस बागची ने कहा कि जब काेई अधिकारी राेज 1000 से ज्यादा दस्तावेजाें की जांच करता है और समयसीमा भी कड़ी हाेती है, ताे 70% सटीकता भी एक्सीलेंट मानी जाएगी. इसलिए एक मजबूत अपीलीय तंत्र जरूरी है. काेर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनाव परिणाम में तभी दखल दिया जाएगा, जब बड़ी संख्या में वाेटर्स बाहर किए गए हाें. काेर्ट ने अपील प्रक्रिया से जुड़े मुद्दाें पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि संबंधित पक्षाें काे अपीलीय ट्रिब्यूनल का रुख करना चाहिए