पुणे, 16 अप्रैल (आ.प्र.)
बहुआयामी और बहुमुखी व्यक्तित्व के धनी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने सबसे पहले ग्लोबल साउथ की संकल्पना प्रस्तुत कीं थी. वे जीयो और जीने दो तथा विश्व शांति के समर्थक थे. मूल्य-आधारित, मूल्य-वर्धित और सार्वभौमिक मूल्यों से युक्त शिक्षा की अवधारणा भी उन्होंने ही प्रस्तुत की थी. यह विचार एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कुलगुरु डॉ. आर.एम. चिटणीस ने व्यक्त किया. प्रबुद्ध नायक और महामानव भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की 135वीं जयंती एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी द्वारा मनाई गई. इस अवसर पर उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए. इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध वक्ता डॉ. संजय उपाध्ये मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. साथ ही एमआईटी डब्ल्यूपीयू के प्रा. डॉ. दत्ता दंडगे, विश्वविद्यालय के डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर अध्ययन केंद्र के प्रमुख प्रा. डॉ. विनोद जाधव तथा डॉ. विक्रम गायकवाड़ भी उपस्थित थे. इस अवसर पर लेखक डॉ. विनोद जाधव द्वारा लिखित पुस्तक डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का शैक्षणिक प्रवास का विमोचन गणमान्य व्यक्तियों के हाथों किया गया. एमआईटी डब्ल्यूपीयू के संस्थापक अध्यक्ष वेिशधर्मी प्रा. डॉ. वेिशनाथ दा. कराड के आशीर्वाद तथा कार्याध्यक्ष डॉ. राहुल वेिशनाथ कराड के मार्गदर्शन में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया.