पुणे, 18 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) विवाह भारतीय समाज की एक महत्वपूर्ण और पवित्र संस्था है, जो केवल दो व्यक्तियों को ही नहीं, बल्कि दो परिवारों को भी जोड़ती है. बदलते समय के साथ विवाह को लेकर युवाओं और अभिभावकों की सोच में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल रहा है. बढ़ती शिक्षा, करियर की प्राथमिकताएं और ऊँची अपेक्षाएं आज रिश्तों के बनने में बाधा बन रही हैं. ऐसे समय में समाज के कई अनुभवी और समर्पित लोग वर्षों से विवाह संबंध जोड़ने, परिचय सम्मेलन आयोजित करने और सामूहिक विवाह जैसी पहल के माध्यम से इस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास कर रहे हैं. इन गणमान्यों से दै.आज का आनंद के लिए प्रो.रेणु अग्रवाल ने बातचीत की.उनके अनुभव, सुझाव और विचार न केवल मार्गदर्शन प्रदान करते हैं, बल्कि समाज को सही दिशा में सोचने के लिए प्रेरित भी करते हैं. प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश- प्रो. रेणु अग्रवाल (मो. 8830670849)
सामूहिक विवाह और समाज की सोच
मैं पिछले 20 वर्षों से विवाह संबंध जोड़ने का कार्य कर रहा हूं. इस कार्य की प्रेरणा मुझे समाज से जुड़कर मिली. समय और धन की अधिकता को देखते हुए मैंने सामूहिक विवाह की शुरुआत की, और अब तक 261 शादियां सफलतापूर्वक संपन्न करवाई हैं. आज सबसे बड़ी चुनौती माता-पिता और बच्चों को समझाने की है, क्योंकि बढ़ती शिक्षा के साथ अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं. मेरा मानना है कि व्यवसाय करने वाले योग्य युवाओं को भी समान महत्व मिलना चाहिए. साथ ही, समय पर विवाह करना आवश्यक है, क्योंकि अधिक उम्र में विवाह से वैवाहिक जीवन में समस्याएं बढ़ती हैं. -रतनलाल एच. गोयल, पुणे (9422025049)
समाज सेवा और वैवाहिक मार्गदर्शन
मैं पिछले 25 वर्षों से सेवा भाव से वैवाहिक संबंध जोड़ने का कार्य कर रहा हूं. मेरा मुख्य व्यवसाय प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन का है, लेकिन समाज सेवा मेरी प्राथमिकता है. समाज की समस्याओं का समाधान संवाद और सकारात्मक प्रयासों से संभव है. जीवनसाथी के चयन में धैर्य, समझ और निरंतर प्रयास आवश्यक हैं. किस्मत को दोष देने के बजाय सही दिशा में प्रयास करना चाहिए, क्योंकि हर समस्या का समाधान संभव है यदि हम धैर्य और वेिशास बनाए रखें. -संजय अग्रवाल (टीकूपोते), अकोला (9822724414)
विवाह में संतुलन और सामाजिक जिम्मेदारी
मैं कई वर्षों से परिचय सम्मेलन के माध्यम से विवाह संबंध जोड़ने का कार्य कर रही हूं. यह प्रेरणा मुझे मेरे माता-पिता से विरासत में मिली. आज विवाह में देरी का एक बड़ा कारण बढ़ती अपेक्षाएं हैं, विशेषकर शिक्षित युवाओं में. विवाह केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारी भी है. हम अग्र सेतु के माध्यम से टूटते रिश्तों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं. समाज में संतुलित सोच और सही समय पर निर्णय लेना बेहद जरूरी है. - नीता चंद्रशेखर अग्रवाल, पुणे
परिचय सम्मेलन का महत्व और अपेक्षाएंमैं पिछले 32 वर्षों से परिचय सम्मेलन में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हूं. इस कार्य की प्रेरणा मुझे मेरे पति से मिली. आज सबसे बड़ी समस्या यह है कि युवक-युवतियां मंच पर आने से हिचकते हैं और बाद में जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं. समाज में लड़कों की संख्या अधिक और लड़कियों की अपेक्षाएं भी बढ़ रही हैं. मेरा सभी से अनुरोध है कि बायोडाटा को ध्यान से पढ़ें और अपेक्षाएं थोड़ी कम रखें, जिससे रिश्ते आसानी से बन सकें. -श्रीमती शीला सुरेश अग्रवाल, पुणे (9822568117)
संस्कार, शिक्षा और विवाह की आवश्यकता
मैं 49 वर्ष की हूं और वर्तमान में जिला न्यायालय सांगली में वकालत कर रही हूं. विवाह के बाद मेरे पति ने मुझे आगे पढ़ने के लिए प्रेरित किया. समाज सेवा के कार्य से जुड़कर मैंने महसूस किया कि आज की पीढ़ी में विवाह को लेकर असमंजस बढ़ रहा है. बेटियों को शिक्षित और सक्षम बनाना जरूरी है, लेकिन साथ ही संस्कार और पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है. हमें आने वाली पीढ़ी के लिए आदर्श स्थापित करना चाहिए. -एड. सारिका श्यामकुमार अग्रवाल, सांगली (9423871017)
सरल विवाह और सामाजिक जागरूकता
मैं पिछले 1112 वर्षों से विवाह संबंध जोड़ने का कार्य कर रही हूं. सामाजिक कार्य की प्रेरणा मुझे मेरे परिवार से मिली और मेरे पति ने भी मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया. इस कार्य में कठिनाइयां आती हैं, लेकिन सकारात्मक दृष्टिकोण से हर चुनौती को आसान बनाया जा सकता है. मेरा समाज से निवेदन है कि विवाह में अनावश्यक खर्च से बचें और इसे सरल एवं सार्थक बनाएं. -सीमा मनोज अग्रवाल, विमाननगर, पुणे (9049480829)