पुणे में यातायात जाम के साथ प्रदूषण बढ़ाने वाले पुराने वाहनाें का मुद्दा गंभीर बन गया है, जहां लगभग 7 लाख वाहन अवैध रूप से सड़काें पर चल रहे हैं. केवल 44 हजार 800 वाहन मालिकाें ने ही पर्यावरण कर भरकर अपने वाहनाें का पुनः पंजीकरण कराया है. यानी कि 6 लाख 83 हजार 411 वाहन अवैध रूप से सड़काें पर जहरीला धुआं छाेड़ते हुए चल रहे हैं.पुणे की कुल वाहन संख्या काे ध्यान में रखते हुए हर 6 वाहनाें में 1 वाहन अवैध है.पुणे आरटीओ में दर्ज कुल वाहनाें की संख्या लगभग 44 लाख है. इनमें से लगभग 7 लाख 29 हजार 695 वाहनाें का पुनः पंजीकरण नहीं हुआ है.इन वाहनाें की आयु 15 वर्ष से अधिक हाे चुकी है.
आयु समाप्त कर चुके ये वाहन तकनीकी रूप से असुरक्षित हैं, साथ ही पुराने इंजन के कारण जहरीली गैसाें का उत्सर्जन करते हैं.
इससे पुणे की वायु गुणवत्ता खराब हाे रही है. इसके अलावा सड़क परचलने के अयाेग्य वाहन दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ा रहे हैं. एक ओर नए वाहनाें पर सख्त नियम लागू किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इन 7 लाख कबाड़ वाहनाें पर कार्रवाई क्याें नहीं हाे रही, यह सवाल उठ रहा है.कार्रवाई क्याें नहीं हाे रही 15 वर्ष पूरे कर चुके वाहनाें काे सड़क पर चलाने के लिए फिटनेस प्रमाणपत्र और पर्यावरण टै्नस भरना अनिवार्य है.लेकिन प्रशासन की अनदेखी के कारण लाखाें वाहन मालिकाें ने इस नियम की अनदेखी की है. ऐसे वाहनाें काे ढूंढकर जब्त करने की आवश्यकता है, लेकिन आरटीओ और यातायात पुलिस द्वारा जान-बूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है.