पाषाण, 20 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ साइन्स एजुकेशन एन्ड रिसर्च यानी आयसर पुणे से, साइन्स एन्ड रिसर्च में 20 साल में 2700 छात्रों ने पीएचडी ग्रेजुएशन पूरा किया है. आयसर पुणे को विभिन्न रिसर्च में अब तक 52 पेटेंट्स हासिल हुए है. साथ ही विदेश में स्थित विभिन्न साइन्स इन्स्टीट्यूट के साथ आयसर पुणे ने विभिन्न क्षेत्रों के रिसर्च के लिए एमओयू भी किए है. यह जानकारी आयसर पुणे के निदेशक प्रो. सुनील भागवत ने सोमवार को 11 बजे आयोजित पत्रकार वार्ता में दी. आयसर पुणे की स्थापना के 20 साल पूरे होने के अवसर पर पाषाण स्थित आयसर पुणे में आयोजित पत्रकार वार्ता में आयसर कोलकाता के बीओजी अध्यक्ष और मानद सदस्य आयसर पुणे के डॉ.अरविंद नातू, अनुसंधान एवं विकास विभाग के अधिष्ठाता प्रो.आर.बूमि शंकर, संकाय के अधिष्ठाता प्रो.एस.जी. श्रीवत्सन, शिक्षा विभाग के अधिष्ठाता प्रो. स्रबंति चौधुरी, योजना और संचार विभाग के अधिष्ठाता प्रो. सुरजीत सिंह, छात्र एवं परिसर गतिविधियों के अधिष्ठाता डॉ. चंद्रशील भागवत, जीवविज्ञान विभाग में संकाय सदस्य प्रो. सुतीर्थ डे, कुलसचिव उमेशकुमार मोते इन सदस्यों ने मीडिया के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की. निदेशक प्रो. सुनील भागवत ने जानकारी दी कि, आयसर पुणे की स्थापना के बाद शुरूआती दौर में पीएचडी ग्रेजुशन करने वाले छात्रों की संख्या सीमित थी. अब 20 साल में विभिन्न विषयों में रिसर्च को प्रावधान देनेवाले छात्रों की संख्या भी बढ गई है. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्र से भी छात्र और छात्राएं आयसर पुणे पीएचडी ग्रेजुएशन पूरा करने के लिए प्रवेश ले रहे है. 30 प्रतिशत छात्राएं हैं. देश के विभिन्न राज्यों से छात्र-छात्राएं रिसर्च में कॅरिअर करने के उद्देश्य से आयसर पुणे में प्रवेश लेते हैं. भविष्य में विदेशी साइन्स इन्स्टीट्यूट के साथ ज्ञान का आदान-प्रदान करने के उद्देश्य से जरूर बातचीत की जाएगी. इससे हमारे यहां के छात्र-छात्राओं को विदेश के साइन्स इन्स्टीट्यूट में रिसर्च करने के उद्देश्य से भेजा जाएगा. और वहां के छात्र-छात्राओं को आयसर पुणे में रिसर्च करने के उद्देश्य से प्रवेश दिया जाएगा. डॉ. नातू ने आयसर पुणे की स्थापना के उद्भव और आयसर पुणे के शुरुआती दिनों के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि आयसर पुणे ने ट्रांजिट कैंपस में पर्याप्त सुविधाएं स्थापित करके छात्रों और संकाय के विकास को प्राथमिकता दी है. इसके साथ ही, संस्थान ने बुनियादी ढांचे पर भी अलग से काम किया.
साइन्स पार्क की आवश्यकता अनुसार किया जाएगा मैनेजमेंट प्रो. सुनील भागवत ने कहा कि, आयसर पुणे से शिक्षा प्राप्त करने के बाद छात्र-छात्राएं शिक्षा तथा अनुसंधान के क्षेत्रों में अकादमिक जगत और उद्योग जगत में अपना योगदान दे रहे हैं. यहां बेसिक साइन्स के साथ ही एडवांस मटेरियल साइन्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे विभिन्न साइन्स बेस्ड रिसर्च को प्रधानता दी गयी है. आयसर पुणे ने अब तक 52 पेंटेंट्स प्राप्त किए है. साइन्स पार्क की आवश्यकता के अनुसार भी भविष्य में नियोजन किया जाएगा. इससे इंडस्ट्रीयल रिसर्च के लिए भी फायदेमंद हो सकेगा.