पुणे, 21 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) भारत में हेल्थकेयर को मजबूत बनाने के लिए और भविष्य के लिए तैयार हेल्थकेयर इकोसिस्टम की आवश्यकता हैं. साथ ही, महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जशरी है. यह विचार एमक्योर फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नमिता थापर ने सिमहेल्थ कॉन्फ्रेन्स के समापन समारोह में व्यक्त किए. सिम्बायोसिस इंटरनेशनल डीम्ड यूनिवर्सिटी ने अपने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विज्ञान संकाय के माध्यम से, 17 और 18 अप्रैल को लवले परिसर में सिमहेल्थ कॉन्फ्रेस का आयोजन किया गया था. समापन समारोह में नमिता थापर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थीं. नमिता थापर ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को मरीजों के साथ सार्थक जुड़ाव की ओर ले जाने की ताकत है. साथ ही, अगर हम एक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार हेल्थकेयर इकोसिस्टम चाहते हैं, तो वैकल्पिक इलाज को शामिल करना और महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जशरी है. उन्होंने डेलीगेट्स से देश भर में बदलाव के सक्रिय चैंपियन बनने का आग्रह किया. इस दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का विषय, स्मार्ट हेल्थकेयर के लिए पूर्वानुमानित, सटीक और वैयक्तिकृत स्वास्थ्य प्रणाली यह था. अपने 27वें वर्ष में सिमहेल्थ स्वास्थ्य सेवा, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक नीति के मिलन बिंदु पर भारत के प्रमुख शैक्षणिक प्लेटफार्मों में से एक के रूप में विकसित हुआ है. सम्मेलन में 1,400 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें चिकित्सक, शोधकर्ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य पेशेवर, आईटी नवप्रवर्तक और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी शामिल थे, जो मुख्य सत्रों, पैनल चर्चाओं, मौखिक प्रस्तुतियों और अंतःविषय संवाद में शामिल हुए. इस मौके पर फैकल्टी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेज के प्रोवोस्ट डॉ.राजीव येरवडेकर, सिम्बायोसिस की प्रिंसिपल डायरेक्टर और प्रो चांसलर डॉ. विद्या येरवडेकर, चांसलर डॉ. आर. रमन भी मौजूद थे. हेल्थकेयर के भविष्य के बारे में बताते हुए, नमिता थापर ने भारत के एक्सेस, अवेयरनेस और अफोर्डेबिलिटी पर ध्यान देने की अहमियत पर जोर दिया, साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अल्टरनेटिव थेरेपी और महिलाओं की हेल्थ पर फोकस करने वाले आगे के नजरिए की भी वकालत की. डॉ. राजीव येरवडेकर ने कहा कि प्रेडिक्टिव, प्रिसिजन और पर्सनलाइअड हेल्थकेयर अकेले नहीं मिल सकता; इसके लिए एक मजबूत, कोऑर्डिनेटेड टीम की जशरत होती है. सिमहेल्थ का असली असर इस बात में है कि इन लर्निंग्स को हेल्थकेयर सिस्टम, इंस्टीट्यूशन और कम्युनिटी में प्रैक्टिस में कैसे ट्रांसलेट किया जाता है, जिसमें टेक्नोलॉजी और नेचर से मिली इनसाइट्स दोनों पर आधारित इनोवेशन हो.