‌‘रुबी हॉल‌’ में फेफड़ों की जटिल बीमारी का इलाज संभव

न्यूरो-इंटेंसिव केयर यूनिट के प्रमुख डॉ. कपिल जिरपे ने जानकारी साझा करते हुए बताया

    23-Apr-2026
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पुणे, 22 अप्रैल (आ.प्र.)
 
एक दुर्लभ और उल्लेखनीय मामले में, पैराक्वाट नामक अत्यधिक विषैले खरपतवारनाशक के सेवन के बाद एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति का सफलतापूर्वक इलाज किया गया. इलाज के दौरान उन्हें पल्मोनरी थ्रोम्बोम्बोलिज्म (पीटीई) नामक एक गंभीर और दुर्लभ जटिलता हो गई. 25 फरवरी, 2026 को भर्ती हुए इस मरीज के मुंह के अंदरूनी हिस्से में गंभीर क्षति, तीव्र गुर्दे की विफलता और सांस लेने में तकलीफ थी. न्यूरो-इंटेंसिव केयर यूनिट के प्रमुख डॉ. कपिल जिरपे के नेतृत्व में लंबे इलाज के बाद, 34 दिनों तक अस्पताल में रहने के पश्चात 30 मार्च, 2026 को मरीज को स्थिर हालत में, बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के और सामान्य गुर्दे के कार्य के साथ छुट्टी दे दी गई्‌‍. पूरा इलाज रूबी हॉल क्लिनिक में किया गया. पैराक्वाट विषाक्तता को एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा चिकित्सा आपात स्थिति माना जाता है, जिसमें मृत्यु दर 70% से अधिक है. इसका व्यापक रूप से आत्महत्या के प्रयासों में उपयोग किया जाता है, विशेषकर विकासशील देशों म्‌ें‍. एक विशिष्ट एंटीडोट की कमी और फेफड़ों व गुर्दों पर इसके तीव्र प्रभाव से कई अंगों के विफल होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे जीवित रहना बेहद दुर्लभ हो जाता है. इस मामले में फुफ्फुसीय एम्बोलिज्म (पीटीई) नामक एक दुर्लभ जटिलता उत्पन्न हुई, जिसने रोगी की पहले से ही गंभीर ेशसन स्थिति को और भी बदतर बना दिया. मरीज का इलाज पूरी लगन और निरंतरता के साथ किया गया. इसमें साइक्लोफॉस्फामाइड और उच्च खुराक वाली मिथाइलप्रेडनिसोलोन जैसी प्रतिरक्षादमनकारी दवाएं, 11 हीमोडायलिसिस सत्र, एक प्लाज्मा एक्सचेंज (प्लेक्स) सत्र और ऑक्सीजन सहायता शामिल थी. इलाज के दौरान पीटीई का शीघ्र पता चलने से डॉक्टरों को सही समय पर एंटीकोएगुलेशन थेरेपी शुरू करने में मदद मिली, जिसे जोखिमों को ध्यान में रखते हुए किया गया. निरंतर निगरानी, बहु-विषयक समन्वय और उन्नत गहन देखभाल के साथ मरीज की हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ और अंततः उसे बिना किसी दीर्घकालिक अंग क्षति के अस्पताल से छुट्टी दे दी गईजो ऐसे मामलों में अत्यंत दुर्लभ है. इस मामले पर टिप्पणी करते हुए न्यूरो-इंटेंसिव केयर यूनिट के प्रमुख डॉ. कपिल जिरपे ने कहा, पैराक्वाट जहर आईसीयू में सबसे चुनौतीपूर्ण स्थितियों में से एक है, क्योंकि इसमें मृत्यु दर बहुत अधिक होती है और कोई विशिष्ट एंटीडोट उपलब्ध नहीं है. पल्मोनरी एम्बोलिज्म जैसी अतिरिक्त जटिलताएं मामले को और भी जटिल बना देती हैं. शीघ्र निदान, प्रभावी उपचार और निरंतर गहन निगरानी ने इसे एक दुर्लभ सफलता बना दिया है. रूबी हॉल क्लिनिक के मुख्य हृदयरोग विशेषज्ञ, अध्यक्ष और प्रबंध न्यासी डॉ. परवेज ग्रांट ने कहा, यह मामला गंभीर रूप से बीमार रोगियों के प्रबंधन में समयबद्ध, समन्वित और उन्नत चिकित्सा देखभाल के महत्व को उजागर करता है.