स्वास्थ्य क्षेत्र में परंपरा और आधुनिकता एक-दूसरे के पूरक

भारती विद्यापीठ डीम्ड यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने प्रतिपादन किया

    24-Apr-2026
Total Views |
 
bfgbg

 पुणे, 23 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए परंपरा और आधुनिकता परस्पर विरोधी शक्तियां नहीं हैं, बल्कि वे एक-दूसरे की पूरक हैं. जब इन दोनों का संतुलित और विचारपूर्वक समन्वय किया जाता है, तब चिकित्सा क्षेत्र में नई क्रांति संभव होती है, ऐसा प्रतिपादन आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने किया. वे भारती विद्यापीठ अभिमत वेिशविद्यालय के 27वें दीक्षांत समारोह में स्नातकों को संबोधित कर रहे थे. इस अवसर पर राज्यसभा सदस्य पद्मभूषण सुधा मूर्ति को डी.लिट. की उपाधि प्रदान की गईं. कार्यक्रम में कुलपति प्रो. डॉ. शिवाजीराव कदम, कुलगुरु प्रो. डॉ. विवेक सावजी, प्र-कुलगुरु डॉ. वेिशजीत कदम, स्वास्थ्य विज्ञान विभाग की कार्यकारी संचालिका डॉ. अस्मिता जगताप, कुलसचिव जी. जयकुमार, परीक्षा नियंत्रक डॉ. एंथनी रोज, विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता और प्रबंधन मंडल के सदस्य उपस्थित थे. इस दीक्षांत समारोह में 9066 विद्यार्थियों को स्नातक की डिग्री प्रदान की गईं जबकि 140 विद्यार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि दी गईं और 27 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया. जाधव ने कहा कि जब हम दूसरों को सफल होने में मदद करते हैं, तो वास्तव में हम स्वयं भी सफल होते हैं. ज्ञान और संसाधनों का सही उपयोग करते हुए सामूहिक सफलता सभी के लिए लाभकारी होती है. उन्होंने कहा कि सफलता के लिए लक्ष्य निर्धारित होना जरूरी है और उसे प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत, मजबूत इच्छाशक्ति, समय का उचित प्रबंधन, उत्कृष्ट शिक्षा, वरिष्ठों के प्रति सम्मान, सामाजिक जिम्मेदारी, नवीनता को अपनाने की प्रवृत्ति और आत्मवेिशास आवश्यक है. प्र-कुलगुरु डॉ. वेिशजीत कदम ने कहा कि डॉ. पतंगराव कदम द्वारा दिखाए गए मार्ग पर भारती विद्यापीठ का कार्य निरंतर जारी है और आज यह देश की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में शामिल है. कुलगुरु डॉ. विवेक सावजी ने वेिशविद्यालय की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्थान ने 200 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ शैक्षणिक सहयोग समझौते किए हैं. इस वर्ष वेिशविद्यालय को महत्वपूर्ण शोध परियोजनाओं के लिए 28 करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान प्राप्त हुआ है. डॉ. सुधा मूर्ति के सम्मान-पत्र का वाचन अनिता पाटिल ने किया. कार्यक्रम का संचालन प्रो. राजेंद्र उत्तुरकर और डॉ. ज्योति मंडलिक ने किया.  
 
युवा पीढ़ी में दुनिया बदलने की क्षमता : सुधा मूर्ति

 डी.लिट. प्राप्त करने पर पद्मभूषण सुधा मूर्ति ने ऑडियो-विजुअल माध्यम से विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का चरण पूरा कर अब वे जीवन के नए क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी कार्य में असफलता मिलने पर भी धैर्य और ईमानदारी के साथ दोबारा प्रयास करना चाहिए, सफलता अवश्य मिलेगी. युवा पीढ़ी में दुनिया बदलने की क्षमता है और वे समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं. जो परिस्थितियां बदली नहीं जा सकतीं, उन्हें स्वीकार करना चाहिए और जिन्हें बदला जा सकता है, उन्हें बदलने का प्रयास करना चाहिए.