पुणे, 24 अप्रैल (आ. प्र.) भारतीय बैंकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से पैदा हो रहे साइबर खतरों से निपटने के लिए अयादा बहुमुखी और सक्रिय रवैया अपनाना चाहिए. यह बात स्टेट बैंक के नए ऑफिस के उद्घाटन के बाद हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कही. उनकी यह टिप्पणी गुरुवार को केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अेिशनी वैष्णव के साथ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद आई, जिसमें रिजर्व बैंक, एनपीसीआई, सेबी और शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया था. इस बैठक का मकसद उन उन्नत एआई मॉडलों से होने वाले जोखिमों का आकलन करना था, जिनका गलत इस्तेमाल करके सॉफ्टवेयर की कमजोरियों को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. सीतारमण ने कहा कि दशकों से लगातार डिजिटलीकरण, नियमित सिस्टम अपग्रेड, फायरवॉल और ग्राहकों की सुरक्षा के उपायों की वजह से भारतीय बैंक साइबर सुरक्षा से जुड़े किसी भी बड़े हादसे से काफी हद तक सुरक्षित रहे हैं. उन्होंने कहा, यह एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया रही है और भारतीय बैंकों ने इस मामले में बहुत अच्छा काम किया है कि दशकों से कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है. हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि उन्नत एआई से मिलने वाली चुनौती अलग तरह की है और इसे अभी पूरी तरह समझा नहीं गया है. उन्होंने कहा, जो कुछ हमारे पास है और जिसके आधार पर हमने खुद को साबित किया हैकि हम अपने ग्राहकों के प्रति सावधान और सुरक्षात्मक हैं. वह शायद काफी न हो. वे उपाय जशरी हैं, उनमें सुधार होना चाहिए, उनका विस्तार होना चाहिए्. लेकिन हमें उन नए खतरों से निपटने के लिए कुछ नया और कहीं अयादा बहुमुखी तरीका चाहिए, जिनके आने की संभावना है. मंत्री ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार मंत्रालय, वैेिशक सरकारों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ मिलकर काम कर रहा है, ताकि बदलते जोखिमों और भारत की तैयारियों का आकलन किया जा सके. गुरुवार की बैठक के बादजिसमें डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज के सचिव एम. नागराजू और सर्ट-इन के महासंचालक डॉ. संजय बहल भी मौजूद थेबैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के नेतृत्व में एक समन्वित संस्थागत तंत्र के तहत मिलकर काम करें. आईबीए के प्रमुख के तौर पर स्टेट बैंक के चेयरमैन इस प्रयास का नेतृत्व करेंगे. आने वाले हफ्तों में बैंक इस बात का आकलन करेंगे कि और कहाँ निवेश की जशरत है, कौन-सी टेक्नोलॉजी अपनाई जा सकती है, और खतरों से निपटने के लिए खुद एआई का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है. सीतारमण ने साफ किया कि यह कोई नई समिति नहीं है, बल्कि आईबीए के नेतृत्व में चलने वाली एक प्रक्रिया है, जिसका मकसद कमजोरियों की पहचान करना और वेंडर पर निर्भरता की समीक्षा करना है. उन्होंने बैंकों से आग्रह किया कि वे अपनी सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उपलब्ध सबसे बेहतरीन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और विशेष एजेंसियों की मदद लें, और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत सर्ट-इन और अन्य संबंधित अधिकारियों को दें. बैंकों, CERT-In और दूसरी एजेंसियों के बीच एक मजबूत, रियल- टाइम थ्रेट इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम बनाने की भी सलाह दी गई, ताकि उभरते खतरों का जल्दी पता लगाया जा सके और उनके बारे में तेजी से जानकारी फैलाई जा सके. भू-राजनीतिक मोर्चे पर, सीतारमण ने पश्चिम एशिया संकट के असर को माना, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग बंद हो जाने के असर को, जिससे कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य संकट की वजह से, हम देखेंगे कि हम सबसे अच्छा क्या कर सकते ह्ैं. ये लगातार बदलते रहने वाली चुनौतियाँ ह्ैं. आप इन सभी को एक साथ नहीं रख सकते और यह नहीं कह सकते कि हर चुनौती का समाधान किया जा रहा है, उन्होंने आगे कहा कि हर मुद्दे का जवाब उसके अपने संदर्भ में दिया जाएगा.