खराडी, 24 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) छोटे एवं मध्यम उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए बैंक सहयोग करें. यह प्रतिपादन शुक्रवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने किया. वे खराड़ी में स्टेट बैंक के अत्याधुनिक स्थानीय मुख्यालय का उद्घाटन कर रही थीं. उन्होंने लोगों से आह्वान करते हुए कहा-पुराने उद्योगों को पुनर्जीवित करना समय की मांग है. सीतारमण ने कहा- दुनिया में उथलपुथल मचा हुआ है. टैरिफ जंग के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था काफी मजबूत है. उन्होंने कहा- चुनौतियों के बीच हमारे निर्यातक उद्योगपति दुनिया में नए बाजार खोजकर विकास में बढ़चढ़ कर सहयोग कर रहे हैं. उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि वे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर फोकस करें. विकास की रफ्तार को बनाए रखने में अपना विशेष योगदान दें. पुणे में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के स्थानीय मुख्यालय, महाराष्ट्र सर्कल के नए परिसर का उद्घाटन करने के बाद वित्तमंत्री ने कहा कि अगर हम व्यापक भारतीय अर्थव्यवस्था पर नजर डालें, तो इसका विशाल घरेलू स्वरूप और मजबूत आंतरिक उपभोग बड़े बैंकों की आवश्यकता को जन्म देता है. यह घरेलू मांग स्वयं ही विकास को बनाए रखने में सक्षम है, जो वेिश में सबसे तेज गति से विकास करने वाले देशों में से एक है. मैं फिर से दोहराती हूं, घरेलू खपत और घरेलू अर्थव्यवस्था की अच्छी प्रगति ने हमारा साथ दिया है. वैेिशक बाजारों में उथल-पुथल के बावजूद हमारे निर्यात प्रभावित हो रहे हैं. लेकिन हमारे निर्यातकों की सराहना करनी होगी कि वैेिशक अनिश्चितताओं के कारण उत्पन्न सभी टैरिफ और अन्य चुनौतियों के बावजूद, वे अपनी सूझबूझ से नए बाजार खोज रहे हैं और अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. निर्यात इसलिए ठीक चल रहा है, क्योंकि वे नए बाजार खोजने और अपनी वृद्धि को बनाए रखने में सक्षम हैं, उन्होंने कहा. उपभोग की कहानी मंत्री जी ने आगे कहा, लेकिन जब आप भारत के आकार और उसकी आकांक्षाओं को देखते हैं, तो यह समझना हमारे लिए महत्वपूर्ण है कि भारतीय उपभोग को बनाए रखना होगा.
जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा
वित्तमंत्री ने विकसित भारत 2047 की दीर्घकालिक परिकल्पना के लिए भारत के बैंकिंग क्षेत्र को तैयार करने के महत्व पर प्रकाश डाला. केंद्रीय बजट की घोषणा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा जो यह सुझाव देगी कि भारतीय बैंकों को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के लिए कैसे विकसित होना चाहिए, जिसमें घरेलू विकास के अनुरूप बड़े, कुशल और दूरदर्शी संस्थानों की आवश्यकता भी शामिल है. पहुँच और समावेशिता में सुधार लाने में डिजिटलीकरण की बढ़ती भूमिका को स्वीकार करते हुए, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैंकिंग को मानवीय संपर्क बनाए रखना चाहिए, क्योंकि ग्राहक अभी भी वित्तीय निर्णयों में पेशेवर मार्गदर्शन और व्यक्तिगत बातचीत को महत्व देते हैं.