ट्रस्टी मंडल के कार्यकाल की शर्ताें का पालन अनिवार्य : बाॅम्बे हाई काेर्ट

    25-Apr-2026
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HC 
ट्रस्ट की स्थापना में उल्लेखित ट्रस्टी मंडल के कार्यकाल की शर्ताें का पालन करना अनिवार्य है, ऐसा महत्वपूर्ण फैसला मुंबई उच्च न्यायालय ने दिया है.न्यायमूर्ति फरहान दुबाश की एकल पीठ के समक्ष दायर दाे रिट याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया गया.इस मामले में महाराष्ट्र के धर्मादाय आयुक्त अमाेघ कलाेती द्वारा मुंबई की प्रतिष्ठित एशियाटिक साेसायटी संस्था की चुनाव प्रक्रिया पर लगाए गए स्थगन आदेश काे न्यायालय ने बरकरार रखा.न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान कार्यकारिणी का कार्यकाल समाप्त हाेने के बाद अगले ट्रस्टी मंडल के अस्तित्व में आने तक कार्य कैसे संचालित किया जाएगा, इस बारे में यदि ट्रस्ट डीड या नियमावली में स्पष्ट प्रावधान नहीं है, ताे अवधि समाप्त हाे चुके ट्रस्टियाें काे कार्य करने का अधिकार नहीं रहेगा.
 
साथ ही, कार्यकाल समाप्त हाेने के बाद यदि अस्थायी रूप से कार्य करने की अनुमति हाे भी, ताे ट्रस्टियाें काे केवल दैनिक और अत्यावश्यक खर्च तक ही निर्णय लेने चाहिए, काेई भी नीतिगत निर्णय नहीं लेना चाहिए, ऐसा भी न्यायालय ने निर्दे श दिया है.इसके अलावा, यदि नियमाें के अनुसार ट्रस्टियाें की नियुक्ति नहीं हाेती है, ताे महाराष्ट्र सार्वजनिक ट्रस्ट व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 47 के अंतर्गत धर्मादाय आयुक्त काे उपयुक्त व्यक्तियाें की नियुक्ति कर नया ट्रस्टी मंडल स्थापित करने का अधिकार है, ऐसा भी न्यायालय ने कहा. इस बीच, ट्रस्ट कानून में 1 सितंबर 2025 से लागू संशाेधित प्रावधान के अनुसार आजीवन ट्रस्टियाें की संख्या पर सीमा तय की गई है और अन्य ट्रस्टियाें का कार्यकाल पांच वर्षाें तक ही सीमित किया गया है. कार्यकाल समाप्त हाेने से पहले पुनर्निर्वाचन न हाेने पर संबंधित ट्रस्टियाें के अधिकार स्वतः समाप्त हाे जाएंगे. यह जानकारी एडवाेकेट शिवराज कदम जहागीरदार ने दी है.