महाराष्ट्र सरकार द्वारा जारी एक सरकारी संकल्प (जीआर) के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमएसईडीसीएल) के व्यापक वित्तीय पुनर्गठन काे मंजूरी दे दी है, जिसमें इसके 32,679 कराेड़ रुपये के ऋण का अधिग्रहण करना, इसके कृषि व्यवसाय काे अलग करना और इसकी गैर-कृषि शाखा की संभावित स्टाॅक मार्केट लिस्टिंग का मार्ग प्रशस्त करना शामिल है. इस सरकारी आदेश के तहत राज्य सरकार काे एमएसईडीसीएल की सरकार द्वारा गारंटीकृत 32,679 कराेड़ रुपये की देनदारियाें काे अपने ऊपर लेने और 15 साल के सरकारी बांड जारी करके उनका भुगतान करने की अनुमति दी गई है.
इन बाॅन्डाें पर पहले 10 वर्षाें के लिए मूलधन के पुनर्भुगतान पर राेक रहेगी, इस अवधि के दाैरान केवल ब्याज का भुगतान करना हाेगा, जिसके बाद अगले पांच वर्षाें में पुनर्भुगतान किया जाएगा.
अधिकारियाें ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य बिजली कंपनी के ऋण बाेझ काे कम करना और उसकी बैलेंस शीट काे मजबूत करना है, जाे कृषि संबंधी बकाया राशि में वृद्धि और राजस्व अंतर काे पाटने के लिए बढ़ते उधार के कारण दबाव में है. पुनर्गठन के तहत, राज्य ने एमएसईडीसीएल के कृषिविद्युत वितरण व्यवसाय काे एक अलग इकाई, एमएसईबी साेलर एग्राे पावर लिमिटेड में विभाजित करने की मंजूरी दे दी है, जाे विशेष रूप से कृषि उपभाेक्ताओं काे सेवा प्रदान करेगी. गैर-कृषि व्यवसाय औद्याेगिक, वाणिज्यिक और आवासीय उपयाेगकर्ताओं काे सेवा प्रदान करना जारी रखेगा. इस सामान्य आदेश में वित्तीय स्थिरता के बाद प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के माध्यम से गैर-कृषि वितरण व्यवसाय की लिस्टिंग काे भी मंजूरी दी गई है , और यह प्रक्रिया डीमर्जर के 6-9 महीनाें के भीतर शुरू हाेने की उम्मीद है.
नई कृषि इकाई काे समर्थन देने के लिए, सरकार ने सब्सिडी भुगतान के लिए एक एस्क्राे तंत्र स्थापित करने और कार्यशील पूंजी सहायता या गारंटी के रूप में लगभग 2,500 कराेड़ रुपये देने काे मंजूरी दे दी है.इस प्रस्ताव के तहत बैलेंस शीट काे साफ करने के हिस्से के रूप में एमएसईडीसीएल के बही-खाताें से 32,679 कराेड़ रुपये के कृषि बकाया काे माफ करने की अनुमति दी गई है, जबकि शेष बकाया राशि काे हाेल्डिंग कंपनी ढांचे के भीतर इक्विटी या अनुदान के माध्यम से पुनर्गठित किया जाएगा. पुनर्गठन याेजना, जाे 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हाेगी, का उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता में सुधार करना, अंतर-सब्सिडी के बाेझ काे कम करना और बिजली वितरण में दक्षता बढ़ाना है.