शहर में गहराते जल संकट के बीच अब उन निर्माण व्यवसायियाें (बिल्डर्स) की भूमिका पर सवालिया निशान लग गए हैं, जिन्हाेंने प्राेजेक्ट शुरू करते समय पानी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी का वादा किया था.पुणे मनपा की महासभा में नगरसेवकाें ने प्रशासन काे आड़े हाथाें लेते हुए पूछा कि शपथपत्र का उल्लंघन करने वाले एक भी बिल्डर पर आज तक कार्रवाई क्याें नहीं हुई? मनपा के नियमाें के अनुसार, किसी भी नई इमारत काे ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) देने से पहले बिल्डर काे एक शपथपत्र देना हाेता है. इसमें स्पष्ट लिखा हाेता है कि जब तक मनपा पानी की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हाेता, तबतक नागरिकाें काे पानी मुहैया कराने की पूरी जिम्मेदारी बिल्डर की हाेगी.हालांकि, हकीकत इसके उलट है. हजाराें नागरिक आज अपनी जेब से पैसे खर्च कर टैंकर मंगवाने काे मजबूर हैं, जबकि बिल्डराें ने पल्ला झाड़ लिया है.
सभागृह में तीखी बहस : सचिन दाेड़के (नगरसेवक) आम आदमी मनपा का भराेसा देखकर फ्लैट खरीदता है.अगर बिल्डर अपने वादे से मुकर रहा है, ताे प्रशासन माैन क्याें है? क्या यह शपथपत्र महज एक कागजी औपचारिकता है? इसी तरह अरविंद शिंदे (नगरसेवक) प्रशासन हमें एक भी ऐसे बिल्डर का नाम बताए जिस पर इस उल्लंघन के लिए कार्रवाई की गई हाे. हम यहां नागरिकाें के हक की लड़ाई लड़ने आए हैं, किसी काे परेशान करने नहीं.