पीएमपीएमएल के वर्ष 2025-26 के वित्तीय वर्ष में बढ़ती संचालन घाटे की पृष्ठभूमि में पुणे मनपा द्वारा लगभग 484.96 कराेड़ रुपये का अंश देने का निर्णय लिया गया है. इस प्रस्ताव काे स्थायी समिति ने मंजूरी दी है. इस राशि का समान मासिक किस्ताें में वितरण किया जाएगा, ऐसी जानकारी समिति के अध्यक्ष श्रीनाथ भिमाले ने दी.वर्ष 2024-25 में पीएमपी का कुल अनुमानित संचालन घाटा लगभग 808.26 कराेड़ रुपये माना गया है. शासन के निर्देशानुसार इस घाटे में से 60 प्रतिशत हिस्सा मनपा काे वहन करना है, जिसके अनुसार यह राशि 484.96 कराेड़ रुपये निर्धारित हाेती है. यह प्रावधान मनपा के बजट में पीएमपी के संचालन घाटे के हिस्से शीर्षक के अंतर्गत किया गया है. इस बीच, चुनाव कार्यक्रम और सेवा सुचारू बनाए रखने के दृष्टिकाेण से एमएनजीएल कंपनी काे बकाया देयकाें के लिए अपवादस्वरूप 10 कराेड़ रुपये अग्रिम रूप में देने की भी मंजूरी दी गई है. यह राशि आगामी देयकाें में समायाेजित की जाएगी. साथ ही कर निर्धारण और संकलन विभाग की कुछ बकाया राशि तथा अन्य समायाेजन के माध्यम से भी निधि जुटाने का प्रावधान प्रस्ताव में उल्लेखित है.
मनपा द्वारा यह संपूर्ण राशि अप्रैल 2026 से मार्च 2027 की अवधि में 12 समान मासिक किश्ताें में देने की याेजना बनाई गई है. इसके अनुसार प्रतिमाह लगभग 39.50 कराेड़ रुपये पीएमपी काे वितरित किए जाएंगे. हालांकि अंतिम लेखा परीक्षण के बाद घाटे के आंकड़े में हाेने वाली वृद्धि या कमी के अनुसार अंतिम किश्त में आवश्यक समायाेजन किया जाएगा, ऐसा भी स्पष्ट किया गया है. इस संबंध का प्रस्ताव मनपा की स्थायी समिति के माध्यम से मुख्य सभा के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा और मंजूरी के बाद क्रियान्वयन काे गति दी जाएगी.शहर में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था काे सुचारू बनाए रखने के लिए पीएमपी काे आर्थिक सहयाेग देना आवश्यक है, ऐसा प्रशासन का मत है.पुणे में बढ़ती यात्री संख्या, ईंधन व्यय में वृद्धि और रखरखाव खर्च के कारण पीएमपी के घाटे में निरंतर वृद्धि हाे रही है. इसके कारण मनपा पर प्रत्येक वर्ष बड़ा आर्थिक भार पड़ रहा है और इस वर्ष भी यही स्थिति बनी रहने का इस प्रस्ताव से स्पष्ट हाेता है.