अक्षय तृतीया के बाद दूसरे चरण में कच्चे हापुस आम की आवक बढ़ गई है. बढ़ती गर्मी के कारण आम पकने की प्रक्रिया तेज हाे गई है. इसके परिणामस्वरूप, पिछले पांच दिनाें में आम की कीमताें में लगभग 50 प्रतिशत की गिरावट आई है और प्रति दर्जन भाव 500 से 800 रुपये के स्तर पर आ गया है. यही भाव पिछले सप्ताह तक 1,000 से 1,500 रुपये प्रति दर्जन था. व्यापारियाें के अनुसार, आपूर्ति में हुई इस वृद्धि की वजह से अब आम आम आदमी की पहुंच में आ गया है.इस वर्ष अनिश्चित माैसम के कारण आम के उत्पादन के पहले चरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा, जिससे उम्मीद के मुताबिक आवक नहीं हाे पाई. परिणामस्वरूप, हाेलसेल और रिटेल दाेनाें बाजाराें में आम की कीमतें बढ़ी हुई थीं.पुणे कृषि उपज मंडी समिति के फल बाजार में प्रतिदिन काेंकण से लगभग 10 हजार पेटियां और कर्नाटक से 2 से ढाई हजार पेटियां आम पहुंच रहा था.हालांकि, अक्षय तृतीया के बाद काेंकण के देवगढ़, संगमेश्वर, पावस, राजापुर, सावंतवाड़ी जैसे क्षेत्राें से हापुस आम की आवक दाेगुनी हाे गई है.
व्यापारियाें ने बताया कि बढ़ती गर्मी के कारण आम के पकने की प्रक्रिया में भी तेजी आई है. बाजार में अब आम प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है, जिसे देखते हुए खरीदाराें ने भी बड़े पैमाने पर हापुस की खरीदारी शुरू कर दी है.गुलटेकडी मार्केट यार्ड में पिछले सप्ताह राेजाना काेंकण से 7 से 8 हजार पेटी आने वाला आम अब 15 से 18 हजार पेटी (कच्चा और पक्का) बाजार में पहुंच रहा है. आवक अधिक हाेने और उसकी तुलना में मांग स्थिर रहने के कारण कीमताें में भारी गिरावट आई है. हापुस के साथ ही, पायरी, केसर, ताेतापुरी और लालबाग जैसी आम की किस्माें के दाम लगभग आधे हाे गए हैं.व्यापारियाें का कहना है कि अप्रैल महीने में कर्नाटक हापुस की आवक भी मात्र 10 से 20 प्रतिशत ही थी. हालांकि, अब से यह आवक बढ़ती जाएगी. मई महीने में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के क्षेत्राें से भारी मात्रा में आम आएगा. इसी के साथ महाराष्ट्र के लातूर, विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्राें का केसर आम भी अब बाजार में आने लगा है. कई ग्राहक हापुस के विकल्प के रूप में केसर आम या कर्नाटक हापुस काे पसंद कर रहे हैं.