आखिर लाेगाें काे गाॅसिप में इतना रस क्यों मिलता है ?

    26-Apr-2026
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Osho
अभी ताे तुम विध्वंस की तलाश में रहते हाे. कहीं तुम्हें कुछ ताेड़ने-ाेड़ने काे मिल जाए, ताे तुम्हारे आनंद का अंत नहीं हाेता. बनाने में किसी का काेई रस नहीं है, मिटाने की बड़ी उत्सुकता है.इस उत्सुकता काे अपने भीतर खाेजना.निंदा का बड़ा भाव है. अगर मैं किसी की निंदा करूं, ताे आप बिना किसी विवाद के स्वीकार कर लेते हैं. अगर मैं किसी की प्रशंसा करूं, ताे आपका मन एकदम चाैंक जाता है, आप स्वीकार करने काे राजी नहीं हाेते हैं. आप कहते हैं, सबूत क्या है? प्रमाण क्या है? आप वहम में पड़ गए हैं! लेकिन जब काेई निंदा करता है, तब आप ऐसा नहीं कहते.कभी आपने देखा कि काेई आ कर जब आपकाे किसी की निंदा करता है, ताे आप कैसे मन से, कैसे भाव से स्वीकार करते हैं? आप यह नहीं पूछते कि यह बात सच है? आप यह नहीं पूछते कि इसका प्रमाण क्या है? आप यह भी नहीं पूछते कि जाे आदमी इसकी खबर दे रहा है, वह प्रमाण याेग्य है?
आप यह भी नहीं पूछते कि इसकाे मानने का क्या कारण है? क्या प्रयाेजन है? नहीं, काेई निंदा करता है ताे आपका प्राण एकदम खुल जाता है, ूल खिल जाते हैं, सारी निंदा काे आत्मसात करने के लिए मन राजी हाे जाता है! और इतना ही नहीं, जब आप यही निंदा दूसरे काे सुनाते हैं, क्याेंकि ज्यादा देर आप रुक नहीं सकते. घड़ी, आधा घड़ी बहुत है.आप भागेंगे किसी काे बताने काे. क्याेंकि नदा का रस ही ऐसा है. वह हिंसा है.और अहिंसक दिखाई पड़ने वाली हिंसा है. किसी काे छुरा माराे अदालत में, पकड़े जाओगे.लेकिन निंदा माराे, ताे काेई पकड़ने वाला नहीं है. काेई कारण नहीं है, काेई झंझट नहीं है. हिंसा भी हाे जाती है साध्य, रस भी आ जाता है ताेड़ने का, और काेई नुकसान भी कहीं अपने लिए हाेता नहीं. भागाेगे जल्दी. और खयाल करना, कि जितनी निंदा पहले आदमी ने की थी, उससे दुगुनी करके तुम दूसरे काे सुना रहे हाे. अगर उसने पचास कहा था, ताे तुमने साै संख्या कर ली है.
तुम्हें खयाल भी नहीं आएगा कि तुमने कब यह साै कर ली है. निंदा का रस इतना गहरा है कि आदमी उसे बढ़ाए चला जाता है.लेकिन काेई तुमसे प्रशंसा करे किसी की, तुमसे नहीं सहा जाता िफर, तुम्हारा हृदय बिलकुल बंद हाे जाता है, द्वारदरवाजे सख्ती से बंद हाे जाते हैं. और तुम जानते हाे कि यह बात गलत है, यह प्रशंसा हाे नहीं सकती, यह आदमी इस याेग्य हाे नहीं सकता. तुम तर्क कराेगे, तुम दलील कराेगे, तुम सब तरह के उपाय कराेगे, इसके पहले कि तुम मानाे कि यह सच है. और तुम जरूर कुछ न कुछ खाेज लाेगे, जिससे यह सिद्ध हाे जाए कि यह सच नहीं है. और तुम आश्वस्त हाे जाओगे कि नहीं, यह बात सच नहीं थी. और यह कहने तुम किसी से भी न जाओगे, कि यह प्रशंसा की बात तुम किसी से कहाे.यह तुम्हारा जीवन के प्रति असम्मान है और मृत्यु के प्रति तुम्हारा सम्मान है.