शहरी युवाओं में बढ़ती नशे की लत बेहद चिंताजनक

पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने ‌‘संयम द स्टेटस ऑफ क्ल्नरेबिलिटी टू एडिक्शन‌’ के विमोचन कार्यक्रम में कहा

    27-Apr-2026
Total Views |

bdgNb 
पुणे, 26 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

पुणे के युवाओं में बढ़ती व्यसनाधीनता और उनके व्यवहार के पीछे के मनोवैज्ञानिक कारणों का विश्लेषण करने वाली पहली शहरव्यापी रिपोर्ट ‌‘संयम‌’ द स्टेटस ऑफ क्ल्नरेबिलिटी टू एडिक्शन (लत के प्रति संवेदनशीलता) का औपचारिक प्रकाशन किया गया. पुणे शहर पुलिस आयुक्त कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार के हाथों इस रिपोर्ट का विमोचन हुआ. ताराचंद रामनाथ सेवा ट्रस्ट और ज्ञान प्रबोधिनी के ‌‘प्रज्ञा मानस संशोधिका‌’ विभाग द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गई यह रिपोर्ट शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के अध्ययन पर आधारित है. इसमें 13 से 22 वर्ष आयु वर्ग के 1887 युवाओं और किशोरों ने भाग लिया. साथ ही, 77 विशेषज्ञों (डॉक्टर, परामर्शदाता और शिक्षक) के अनुभवों को भी इसमें शामिल किया गया है. अध्ययन में शराब, तंबाकू, ड्रग्स, एनर्जी ड्रिंक्स और डिजिटल एडिक्शन जैसे पांच प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया. इस समय पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा, यह रिपोर्ट पुणे को नशे के खिलाफ एक स्पष्ट दिशा प्रदान करेगी. युवाओं को असुरक्षित बनाने वाले कारणों को पहचानकर समय पर सुधारात्मक कदम उठाना जरूरी है. पुलिस प्रशासन, स्कूल और परिवार को मिलकर एक जिम्मेदार दृष्टिकोण से काम करना होगा.  
 
जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे

स्कूलों के आसपास कानून प्रवर्तन (लॉ इंफोर्समेंट) को और मजबूत किया जाएगा. साथ ही कॉलेजों में इस रिपोर्ट के आधार पर जागरूकता सत्र आयोजित किए जाएंगे. स्कूल प्रिंसिपल्स के लिए कार्यशालाएं और विशेष सत्र आयोजित होंगे. पूरे महाराष्ट्र के लिए एक प्रिवेंशन मॉडल तैयार करने पर जोर दिया जाएगा. इस अवसर पर सह पुलिस आयुक्त रंजन कुमार शर्मा, अपर पुलिस आयुक्त संजय पाटिल, ताराचंद रामनाथ सेवा ट्रस्ट के ट्रस्टी नंदकिशोर राठी और ज्ञान प्रबोधिनी की डॉ. अनघा लवलेकर सहित अन्य गणमान्य उपस्थित थे.  
 
  
रिपोर्ट में चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए
शराब का सेवन: प्रत्येक 6 में से 1 किशोर ने कम से कम एक बार
शराब का सेवन किया है.
तंबाकू: 92% लोगों को इसके दुष्प्रभावों की जानकारी है, फिर भी लगभग
40% छात्रों ने इसका उपयोग करने की बात स्वीकार की.
ड्रग्स: करीब 20% छात्रों ने बताया कि उनके परिवेश में ड्रग्स आसानी से उपलब्ध हैं.
डिजिटल एडिक्शन: एक तिहाई किशोरों में डिजिटल लत के लक्षण दिखे. 20-22
आयु वर्ग के लगभग 60% युवा रोजाना 3 से 6 घंटे स्क्रीन पर बिता रहे हैं.