ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर जारी है, लेकिन इसी के साथ तनाव की स्थिति भी बरकरार है. दाेनाें देश शांति समझाैता करना चाहते हैं, लेकिन एक- दूसरे से सहमति नहीं बन रही है.इसी वजह से पाकिस्तान में दाेनाें देशाें के बीच दूसरे दाैर की शांति वार्ता नहीं हाे सकी. हालांकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस युद्ध काे खत्म कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है, लेकिन हाेर्मुज स्ट्रेट और परमाणु मुद्दे पर मामला अटका हुआ है. इसी बीच अब ईरान ने अमेरिका काे लगभग ललकारते हुए कहा है कि हाेर्मुज में अमेरिका ने नाकाबंदी नहीं हटाई ताे उसे अंजाम भुगतना पड़ेगा. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि ईरान बिना शर्त हाेर्मुज खाेले. अगर उसका न्यू्निलयर प्राेग्राम जारी रहा ताे हमला करेंगे.
ईरान ने मंगलवार काे कहा कि अब अमेरिका उस स्थिति में नहीं है कि वह दूसरे देशाें काे बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए.ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रेजा तलाएई-निक ने सरकारी टीवी से कहा कि वे ट्रंप का दबाव नहीं सहन करेंगे. ट्रंप युद्ध के गलत फैसले से घुटनाें पर आ गए हैं. र्रान का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका हाेर्मुज काे खाेलने से जुड़े ईरान के नए प्रस्ताव पर विचार कर रहा है.इस बीच ईरान पहली बार हाेर्मुज खाेलने काे तैयार हाे गया है. ईरान के परमाणु प्राेग्राम के मुद्दे पर बात नहीं बन पा रही है. घमासान के बीच यूएई ने ‘जझएउ’ से अलग हाेने का बड़ा फैसला लिया है. विश्व में पेट्राेल-डीजल के दाम बढ़ सकत हैं.बहरहाल, युद्ध के बाद दुनिया में खासताैर से ईरान में महंगाई बढ़ी है. ईरान में दवाओं से लेकर खानपान की चीजाें के दाम आसमान छू रहे हैं. दवाखानाें में दवाओं की भारी किल्लत हाे गई है.
ईरानी अधिकारियाें के मुताबिक, 28 फरवरी से अब तक अमेरिका-इजराइल ने देश के विभिन्न प्रांताें में लगभग 25 फार्मास्युटिकल सुविधा केंद्राें पर हमले किए हैं. ईरान से जुड़ी जंग का असर अब अफ्रीका के साेमालिया तक पहुंच गया है. जंग की वजह से समुद्री रास्ते बाधित हाे गए हैं, जिससे साेमालिया तक पहुंचने वाली जरूरी खाद्य सहायता में देरी हाे रही है और वहां भूख का संकट और गहरा गया है. लाखाें बच्चे भुखमरी की कगार पर हैं. इस बीच कतर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा है कि हाेर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल दबाव बनाने के हथियार की तरह नहीं किया जाना चाहिए. उन्हाेंने कहा कि हाेर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गाें में से एक है और इसे राजनीतिक दबाव या साैदेबाजी के साधन के ताैर पर इस्तेमाल करना गलत हाेगा.