जेम्स ज्वेलरी, आरबीआई द्वारा ‌‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम‌’ का पुनर्गठन

जीजेसी ने परिष्कृत, ज्वेलर-एकीकृत ढांचा प्रस्तुत किया; चालू खाता घाटा कम करने में मिलेगी मदद

    30-Apr-2026
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 मुंबई, 29 अप्रैल (आ. प्र.)

ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सक्रिय रूप से जुड़कर स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) के व्यापक पुनर्गठन को आगे बढ़ा रही है. जीजेसी ने स्वर्ण मुद्रीकरण योजना (जीएमएस) के लिए एक परिष्कृत, ज्वेलर-एकीकृत ढांचा प्रस्तुत किया है, जिसे बैंकिंग, रिफाइनिंग और आभूषण क्षेत्रों में संरचित हितधारक परामर्श के माध्यम से विकसित किया गया है. प्रस्तावित मॉडल मौजूदा संरचनात्मक अक्षमताओं को दूर करने और योजना के अपनाने तथा प्रभावशीलता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है. यह ढांचा मौजूदा योजना संरचना पर आधारित है, साथ ही इसमें परिचालन दक्षता और हितधारकों के बीच बेहतर तालमेल भी शामिल किया गया है. प्रस्ताव का एक केंद्रीय पहलू डिजिटल स्वर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का औपचारिक रूपांतरण है, जिसके तहत भौतिक सोने को संरचित खाता तंत्रों के माध्यम से बैंकिंग प्रणाली में रखे गए विमूर्त स्वर्ण शेष में परिवर्तित किया जाएगा. पिछले कुछ वर्षों में स्वर्ण बुलियन और सिक्कों में निवेश की मांग ने मजबूत और सतत वृद्धि दर्ज की है, जो भौतिक सोने को मूल्य के सुरक्षित भंडार के रूप में निवेशकों की बढ़ती प्राथमिकता को दर्शाती है. संशोधित जीएमएस ांचा इस प्रवृत्ति का प्रभावी ढंग से लाभ का प्रयास करता है, जिससे अपने ऐसे भंडार को सहजता मुद्रीकृत कर सक्‌ें‍. यह योजना निवेशकको निष्क्रिय स्वर्ण संपत्तियोंजैसे बुलियन, सिक्के और आभूषणपर प्रतिफल अर्जित करने का अवसर है, उन्हें औपचारिक वित्तीय प्रणाली में एकीकृत रके. इससे रक रूप से गैर- देने वाली संपत्तियाँ अर्जित करने वाले वित्तीय साधनों में परिवर्तित हो जाती हैं, जिससे स्वर्ण भंडार का परिसमापन किए बिना पोर्टफोलियो की दक्षता बढ़ती है. इस प्रस्तावित फ्रेमवर्क से उम्मीद है कि यह ज्वेलरी व्यापार की पहुँच और भरोसे का लाभ उठाकर सोने को जुटाने की प्रक्रिया में काफी सुधार लाएगा. बेकार पड़े सोने को अधिक मात्रा में जुटाने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है, घरेलू आपूर्ति को बढ़ावा मिल सकता है और चालू खाता घाटा कम करने में मदद मिल सकती है. इसके अतिरिक्त, विनियमित डिजिटल स्वर्ण ढांचे की ओर बदलाव औपचारिकता को मजबूत करेगा, अनुपालन मानकों में सुधार करेगा और समग्र बाजार दक्षता को बढ़ाएगा.  
 
 मजबूत स्वर्ण मुद्रीकरण ढांचा तैयार कर रहे
राजेश रोकड़े, अध्यक्ष, जीजेसी ने कहा, भारतीय रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय के साथ जीजेसी की निरंतर सहभागिता हमारे इस संकल्प को दर्शाती है कि हम एक मजबूत और भविष्य-उन्मुख स्वर्ण मुद्रीकरण ढांचा तैयार कर रहे ह्‌ैं‍. प्रस्तावित मॉडल ज्वेलर्स को एक विनियमित, डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में एकीकृत करता है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शिता, भरोसा और पहुँच में उल्लेखनीय वृद्धि होती है. निष्क्रिय सोने के मूल्य को उजागर करके यह योजना घरेलू आपूर्ति को मजबूत करने, आयात पर निर्भरता कम और भारत की व्यापक आर्थिक स्थिरता में सार्थक क्षमता रखती है.
 
समग्र बाजार दक्षता में सुधार होगा !
अविनाश गुप्ता, उपाध्यक्ष, जीजेसी ने कहा, संशोधित जीएमएस ढांचा व्यावहारिक, विस्तार योग्य और नियामक अपेक्षाओं के अनुरूप तैयार किया गया है. यह स्वर्ण मुद्रीकरण के लिए एक सुरक्षित और पारदर्शी मार्ग बनाता है, साथ ही सभी हितधारकों के बीच जवाबदेही सुनिश्चित करता है. महत्वपूर्ण रूप से, यह निवेशकों को निष्क्रिय सोनेजिसमें बुलियन, सिक्के और आभूषण शामिल हैंपर प्रतिफल अर्जित करने में सक्षम बनाता है, जिससे पारंपरिक रूप से गैर-उपज देने वाली संपत्ति एक उत्पादक वित्तीय साधन में परिवर्तित हो जाती है. यह क्षेत्र को औपचारिक बनाने और समग्र बाजार दक्षता में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.