22 से 28 साल के लड़के बन रहे लड़की

    30-Apr-2026
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surgery 
एमपी के राजगढ़ का रहने वाला साेमेश जैसे ही 10 साल का हुआ, वह लड़कियाें की तरह व्यवहार करता और उनके तरह कपड़े पहनना पसंद करने लगा. परिवार काे भी अहसास हाे गया कि वह अंदर से एक लड़की है. 24 साल के हाेने पर उसने अपना जेंडर चेंज करवाया और सर्जरी करवाकर लड़की बन गया. यह एक अकेले साेमेश का केस नहीं है.मध्य प्रदेश में ऐसे और भी केस सामने आए हैं, जिनमें लड़के जेंडर चेंज करवाकर लड़की बन रहे हैं. एमपी के राजगढ़ का रहने वाला साेमेश जैसे ही 10 साल का हुआ, वह लड़कियाें की तरह व्यवहार करता और उनके तरह कपड़े पहनना पसंद करने लगा. परिवार े भी अहसास हाे गया कि वह अंदर से एक लड़की है. 24 साल के हाेने पर उसने अपना जेंडर चेंज करवाया और सर्जरी करवाकर लड़की बन गया.यह एक अकेले साेमेश का केस नहीं है.
 
मध्य प्रदेश में ऐसे और भी केस सामने आए हैं, जिनमें लड़के जेंडर चेंज करवाकर लड़की बन रहे हैं. एम्स भाेपाल में सामने आए मामलाें ने यह साफ कर दिया है कि जेंडर आइडेंटिटी का सवाल छाेटे शहराें और कस्बाें तक पहुंच चुका है.बीते एक साल में एम्स भाेपाल में 5 जेंडर कंवर्जन सर्जरी हुई हैं. इनमें शामिल सभी मरीज 22 से 28 वर्ष की आयु के बीच के युवक हैं. डाॅक्टराें का कहना है कि यह सिर्फ सर्जरी नहीं, बल्कि लंबी मानसिक, शारीरिक और सामाजिक प्रक्रिया हभविष्य में ऐसी तकनीक विकसित हाे सकती है, जिससे ये मरीज मां बनने का अनुभव भी कर सकें. एम्स भाेपाल के स्त्री राेग विभाग के प्राेफेसर डाॅ. अरुण कुमार डाेरा ने बताया कि अब तक 5 सर्जरी की गई हैं, जिनमें मरीज काे पुरुष से महिला बनाया गया है. यह बेहद जटिल सर्जरी हाेती है. हमारी पढ़ाई के समय इस तरह की सर्जरी का एक्सपाेजर नहीं था. हमने बाद में काॅन्फ्रेंस और स्किल डेवलपमेंट काेर्स से इनकी ट्रेनिंग ली है. डाॅ. डाेरा ने बताया कि बाॅटम सर्जरी में सबसे पहला चैलेंज हाेता है कि पुरुष के प्राइवेट पार्ट काे हटाना हाेता है. एम्स में यह सर्जरी अभी नि:शुल्क की जा रही है.