वैवाहिक कलह आत्महत्या के लिए उकसाने का आधार नहीं : हाई काेर्ट

    05-Apr-2026
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HC 
 
बाॅम्बे हाई काेर्ट की नागपुर पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल वैवाहिक विवाद या आपसी कलह के आधार पर किसी पति या पत्नी पर अपने साथी काे आत्महत्या के लिए उकसाने का आराेप नहीं लगाया जा सकता.अदालत ने कहा कि वैवाहिक जीवन में मतभेद और असहमति सामान्य बात है और जब तक काेई प्रत्यक्ष उकसावा या आपराधिक इरादा साबित न हाे जाए, तब तक किसी काे दाेषी नहीं ठहराया जा सकता. न्यायमूर्ति उर्मिला जाेशी फाल्के की एकल पीठ ने अमरावती की एक 49 वर्षीय शिक्षिका के खिलाफ दर्ज मामले काे रद्द करते हुए यह आदेश दिया. महिला पर 2019 में अपने पति काे आत्महत्या के लिए उकसाने का आराेप लगा था.
 
अदालत ने टिप्पणी की कि पतिपत्नी के बीच हाेने वाली गाली-गलाैज या दुर्व्यवहार निराशा का कारण ताे हाे सकते हैं, लेकिन इसे कानूनी रूप से आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता.अदालत ने अपने आदेश में उकसावे की व्याख्या करते हुए कहा कि इसके लिए आराेपी की ओर से पीड़ित काे आत्महत्ये लिए प्रेरित करना या साजिश रचना आवश्यक है. पीठ ने कहा, उकसाने के अपराध के लिए मेन्स रिया यानी अपराधी का स्पष्ट इरादा हाेना अनिवार्य है. बिना किसी जानकारी या इरादे के काेई उकसावा नहीं हाे सकता. गुस्से में बाेले गए शब्द उकसाने की श्रेणी में नहीं आते.
 
इस मामले में दंपति की शादी 1996 में हुई थी. पति के परिवार ने आराेप लगाया था कि महिला उनके साथ मारपीट करती थी, अवैध संबंधाें में लिप्त थी और झूठे केस में फंसाने की धमकी देती थी.इन दबावाें के चलते नवंबर 2019 में पति ने आत्महत्या कर ली थी. दूसरी ओर, महिला ने भी ससुराल वालाें पर शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना के आराेप लगाए थे. अदालत ने पाया कि मृतक द्वारा छाेड़े गए सुसाइड नाेट में स्पष्ट रूप से लिखा था कि उसकी मृत्यु के लिए किसी काे भी जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए्. काेर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि आत्महत्या के लिए काेई प्रत्यक्ष उकसावा साबित नहीं हुआ, इसलिए महिला के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही काे जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयाेग हाेगा.