वैश्विक शांति के लिए प्रधानमंत्री मोदी पहल करें

सूर्यदत्त नेशनल स्कूल के छात्रों ने व्यक्त कीं अपेक्षाएं 300 से अधिक विद्यार्थियों द्वारा महत्वपूर्ण पहल

    07-Apr-2026
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बावधन, 6 अप्रैल (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में ही सूर्यदत्त नेशनल स्कूल के 300 छात्रों ने शिक्षा के पारंपरिक दायरे से बाहर निकलकर वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण और मानवतावादी पहल की है. वैेिशक स्तर पर बढ़ते संघर्षों के प्रति जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की गहरी भावना को ध्यान में रखते हुए, छात्रों ने एक सामूहिक ज्ञापन तैयार कर देश के प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किया है. इस ज्ञापन के माध्यम से छात्रों ने विनती की है कि प्रधानमंत्री स्वयं पहल कर इन संघर्षों को रोकने में सक्रिय भूमिका निभाएं और वेिश में शांति, संवाद व समन्वय स्थापित करें. इस ज्ञापन में युद्ध के मानवीय परिणामों पर विशेष रूप से प्रकाश डाला गया है. छात्रों ने उल्लेख किया है कि राजनीतिक और सामरिक स्तर के संघर्षों के परिणाम केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इसका सबसे बुरा प्रभाव निर्दोष नागरिकों, विशेष रूप से बच्चों पर पड़ता है. वेिश शांति की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए विद्यार्थियों ने एक सात-सूत्रीय रणनीतिक खाका प्रस्तुत किया है. इसमें मानव जीवन और मूलभूत सुविधाओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के साथ-साथ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों को भी शामिल किया गया है. इस पहल के बारे में सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया ने कहा, विद्यार्थियों के इस मानवतावादी विचार की सराहना की जानी चाहिए. छात्रों द्वारा व्यक्त किए गए इन विचारों से वेिश शांति के लिए एक सक्षम और आशाजनक दिशा स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है. बताया गया है कि, यह गतिविधि सूर्यदत्त एजुकेशन फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष प्रो. डॉ. संजय बी. चोरडिया की संकल्पना से साकार हुई. इसे सफल बनाने में सुषमा चोरडिया (उपाध्यक्ष एवं सचिव, सूर्यदत्त फाउंडेशन), स्नेहल नवलखा (सहयोगी उपाध्यक्ष) समेत सूर्यदत्त नेशनल स्कूल की प्रधानाचार्या, सभी शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का विशेष सहयोग रहा.  
 
संघर्ष के बजाय संवाद का मार्ग अपनाने की मांग

 विद्यार्थियों ने अपनी अपेक्षा व्यक्त करते हुए कहा कि नफरत पर प्यार की जीत होनी चाहिए. संघर्ष के बजाय संवाद का मार्ग अपनाया जाना चाहिए. हमारी ईमानदारी से यह इच्छा है कि इस पूरी प्रक्रिया में भारत नेतृत्व करे.