केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गड़करी ने बीजेपी के स्थापना दिवस के माैके पर आयाेजित एक कार्यक्रम में नेताओं और कार्यकर्ताओं काे आध्यात्मिक सलाह दी है. गड़करी ने कहा, एक दिन कुर्सी पर बैठे व्यक्ति काे उठना ही हाेगा. उसे उठना ही हाेगा. अगर वह नहीं उठेगा, ताे भगवान उसे उठा लेंगे. इसमें काेई अपवाद नहीं है.उन्हाेंने कहा, यह एक टेम्पररी नाैकरी है.एक बार कुर्सी मिल जाए, ताे शांत रहें, इसे अपने ऊपर हावी न हाेने दें. कुर्सी कभी भी जा सकती है. यहां तक कि पुलिस भी आपकाे छाेड़ देती है, वे कभी भी जा सकते हैं. गड़करी ने पद के अस्थायी स्वरूप और विनम्रता के महत्व पर प्रकाश डाला.लीडरशिप में बदलाव पर बाेलते हुए गड़करी ने कहा कि कार्यकर्ताओं और नेताओं की पीढ़ियां बदलती रहती हैं और लीडरशिप काे भी बदलना चाहिए. उन्हाेंने समझाया, इसका मतलब यह नहीं है कि लीडर कपेट से लीडर पैदा हाे, बल्कि लीडरशिप कार्यकर्ताओं से विकसित हाेनी चाहिए.
इस माैके पर गड़करी ने अपने ईरान दाैरे का एक किस्सा सुनाया. जब वे शिपिंग मिनिस्टर थे, ताे उन्हें ईरान में चाबहार पाेर्ट बनाने का काम दिया गया था.उस समय, जब ईरान-अमेरिका युद्ध चल रहा था, ताे वे सात-आठ बार ईरान गए थे. एक बार, जब वे डिपार्टमेंट ऑफ डिफेंस की स्पेशल फ्लाइट से जा रहे थे, ताे पाकिस्तान ने उनके प्लेन काे बीच में ही राेक दिया और उन्हें आगे बढ़ने से राेक दिया. उन्हाेंने कहा कि वहां से लाैटने के बाद वे गुजरात के रास्ते चाबहार गए.गड़करी ने कहा कि भारत का सिंधु नदी के उस पार डेवलप हुए कल्चर से कनेक्शन है, जिसमें अफगानिस्तान, ईरान, पाकिस्तान, उज़्बेकिस्तान जैसे देश शामिल हैं. उन्हाेंने कहा कि वे अयातुल्ला खुमैनी से उनके घर पर मिले थे. उस समय खुमैनी ने उनसे फारसी भाषा की शुरुआत के बारे में पूछा था.
खुमैनी ने खुद कहा था कि संस्कृत उनकी मातृभाषा है और फारसी भाषा की शुरुआत संस्कृत से हुई है. उन्हाेंने यह भी बताया कि ईरान में तेहरान यूनिवर्सिटी में संस्कृत डिपार्टमेंट है. खुमैनी ने गड़करी काे यह भी बताया था कि वे असल में लखनऊ के पास एक गांव के रहने वाले हैं.यह कहते हुए कि हमारी विरासत, संस्कृति और इतिहास एक हैं, गड़करी ने कश्मीर हाे या गुवाहाटी, अपना देश, अपनी माटी का नारा दिया.उन्हाेंने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल रहमान अंतुले से जुड़ी एक याद शेयर की. जब गड़करी राजनीति में नए थे, ताे अंतुले ने उन्हें फाेन करके पूछा था, क्या आप जानते हैं कि मैं काैन हूं? जब गड़करी ने कहा कि वह नहीं जानते, ताे अंतुले ने उनसे कहा था, मैं एक काेंकण ब्राह्मण हूं और मेरा सरनेम करंदीकर है, गड़करी ने यह कहा.