वेदांत बाेलता है और भक्ति गाती, नाचती है

    08-Apr-2026
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Osho 
 
गाने का अर्थ हुआ: भक्ति का संबंध तर्क से नहीं, विचार से नहीं- हृदय और प्रेम से है. भक्ति का संबंध कुछ कहने से कम, कहने के ढंग से ज्यादा है.भक्ति काेई गणित की व्यवस्था नहीं है- हृदय का आंदाेलन है. गीत में प्रगट हाे सकती है. भाषा ताे वैसे ही कमजाेर है.फिर भाषा में ही चुनना हाे ताे भक्ति गद्य काे नहीं चुनती, पद्य काे चुनती है. ऐसे ताे पद्य से भी कहां कहा जा सकेगा, लेकिन शब्दाें के बीच में लय काे समाया जा सकता है.शब्द से न कहा जा सके, लेकिन शब्दाें के बीच समाहित धुन से शायद कहा जा सके. ताे भक्त के जब शब्द सुनाे ताे शब्दाें पर बहुत ध्यान मत देना. भक्त के शब्दाें में उतना अर्थ नहीं है जितना शब्दाें की धुन में है, शब्दाें के संगीत में है. शब्द अपने-आप में ताे अर्थहीन हैं. जिस रंग में और जिस रस में लपेटकर शब्दाें के भक्त ने पेश किया है, उस रंग और रस का स्वाद लेना.लेकिन अकसर अनुवाद में मूल खाे जाता है, और कभी-कभी ताे इतनी सरलता से खाे जाता है कि खयाल में भी नहीं आता. क्याेंकि हम साेचते हैं कि इससे क्या फर्क पड़ता है कि आचार्याें ने गाया कि आचार्याें ने कहा, बात ताे एक ही है.बात जरा भी एक ही नहीं है- बात बड़ी भिन्न है. आचार्याें ने गया, भक्ति के आचार्याें ने गाया- कहा नहीं. और जाेर धुन पर है, संगीत पर है. जाेर शब्द पर नहीं, शब्द के अर्थ पर नहीं, शब्द की तर्कनिष्ठा पर नहीं.