प्रत्येक व्यक्ति, एक प्रकार से स्किज़ाे्रेनिया की दशा में है कम या अधिक; फर्क केवल मात्रा का है. प्रत्येक व्यक्ति विभक्त है, क्याेंकि धार्मिक और राजनीतिक दाेनाें तरह के शाेषक इस रणनीति पर निर्भर करते रहे हैं कि व्यक्ति काे विभक्त रखाे, उसे अखंड मत हाेने दाे, और वह गुलाम बना रहेगा. खुद के खिलाफ विभाजित घर का कमजाेर हाेना स्वाभाविक है. इस प्रकार तुम्हें शरीर के खिलाफ लड़ना सिखाया गया है; तुम्हें विभक्त रखना, विभाजन की मूल रणनीति है. मशरीर से लड़ाे, शरीर तुम्हारा दुश्मन है. यह शरीर ही है जाे तुम्हें नर्क की तरफ खींच रहा है. लड़ाे, हाथ में तलवार लेकर! रात-दिन लड़ाे! जन्माें-जन्माें तक लड़ाे! केवल तभी, एक दिन, तुम जीत सकाेगे.और जब तक तुम अपने शरीर पर विजय नहीं पा लेते, तुम परमात्मा की दुनिया में प्रवेश नहीं कर सकते. सदियाें से लाेगाें काे यह मूढ़ता सिखाई गई है.
जिसका परिणाम है कि हर व्यक्ति विभाजित, बंटा हुआ है, हर व्यक्ति अपने शरीर के विराेध में है. और यदि तुम अपशरीर के विराेध में हाे, तुम मुसीबत में हाेने काे बाध्य हाे. तुम अपने शरीर से लड़ाेगे, और तुम और तुम्हारा शरीर मएक हीफ उर्जा हैं. शरीर दृश्य आत्मा है, और आत्मा अदृश्य शरीर है. शरीर और आत्मा कहीं भी विभाजित नहीं हैं, वे एक-दूसरे के हिस्से हैं, वे एक पूर्ण के हिस्से हैं.तुम्हें शरीर काे स्वीकार करना है, तुम्हें शरीर काे प्रेम करना है, तुम्हें शरीर का सम्मान करना है, तुम्हें तुम्हारे शरीर का आभारी हाेना है. केवल तभी तुम एक तरह की समग्रता काे उपलब्ध हाे सकते हाे, तभी एक सघनता घटित हाेगी, अन्यथा तुम दुखी रहाेगे. और शरीर से तुम्हारा छुटकारा इतनी आसानी से नहीं हाेने वाला; सैकड़ाें जन्माें के बाद भी लड़ाई जारी रहेगी.
तुम शरीर काे हरा नहीं सकते.ध्यान रखना, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि तुम शरीर पर विजय नहीं पा सकते, लेकिन तुम शरीर काे हरा नहीं सकते. तुम इसके प्रति शत्रुवत हाेकर इसे हरा नहीं सकते. तुम मित्रवत हाेकर, प्रेमपूर्ण हाेकर, सम्मानपूर्ण हाेकर, भराेसा रखकर--इसके ऊपर विजय पा सकते हाे. यही मेरा दृष्टिकाेण है: कि शरीर मंदिर है, और तुम मंदिर के देवता हाे. मंदिर तुम्हारी रक्षा करता है; वर्षा, तूान और धूप में तुम्हें आश्रय देता है.यह तुम्हारी सेवा में है! तुम्हें इससे लड़ना क्याें है? यह ऐसे ही मूढ़तापूर्ण है जैसे काेई चालक अपनी कार से लड़े. यदि चालक अपनी कार से लड़ता है, ताे क्या हाेने वाला है? वह कार काे नष्ट कर देगा, और इससे लड़कर वह खुद काे नष्ट कर लेगा. कार एक सुंदर वाहन है, यह तुम्हें सुदूर यात्रा पर ले जा सकती है.
शरीर अस्तित्व का सबसे जटिल तंत्र है. यह एकदम अद्भुत है! और धन्य हैं वे जाे चमत्कृत हैं. अपने स्वयं के शरीर के साथ एक विस्मय-भाव से शुरू कराे, क्याेंकि वह तुम्हारे सबसे करीब है. शरीर के माध्यम से-- प्रकृति तुम्हारे जितने निकटतम आती है ,परमात्मा उतना निकटतम तुम्हारे पास आया है. तुम्हारे शरीर में समुद्राें का जल है, तुम्हारे शरीर में सिताराें और सूर्याें की अग्नि है, तुम्हारे शरीर में वायु है, तुम्हारा शरीर मिट्टी का बना है. तुम्हारा शरीर, पूरे अस्तित्व और इसके सभी तत्वाें का प्रतिनिधित्व करता है. और क्या गजब का रूपांतरण है! क्या गजब का कायापलट है!
मिट्टी काे देखाे और िफर अपने शरीर काे देखाे--क्या गजब का रूपांतरण है, और तुम इसके लिए कभी अचंभित नहीं हुए! एक धूल दिव्य हाे गई; इससे बडा और रहस्य क्या संभव है? तुम इससे बड़े और किस चमत्कार की प्रतीक्षा कर रहे हाे? और तुम प्रतिदिन चमत्कार घटित हाेते देखते हाे. कीचड़ से कमल पैदा हाे जाता है...और मिट्टी से उत्पन्न हाे जाती है--हमारी सुंदर काया. इतना जटिल तंत्र, और इतना सुचारु रूप से चलता हुआ...काेई आवाज नहीं. और यह वास्तव में जटिल है.वैज्ञानिकाें ने अधिक जटिल मशीनाें का निर्माण किया है, परन्तु शरीर की तुलना में वे कुछ भी नहीं हैं. यहां तक कि जटिल से जटिल कम्प्युटर भी, शरीर की आंतरिक संरचना की तुलना में एक खिलाैने जैसा है.