नवकार महामंत्र आत्मशुद्धि का मंत्र है. यह मंत्र आत्मा को शुद्ध करता है और मन को शांत करता है. यह मंत्र मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए मार्गदर्शन करता है. यह मंत्र सभी धर्मों का सम्मान करता है. यह मंत्र अहिंसा का संदेश देता है और यह मंत्र शांति का प्रतीक है. जैन धर्म में नवकार महामंत्र का बहुत अधिक महत्व है. यह मंत्र जैन धर्म का मूलाधार है. जैन धर्म के सभी अनुयायी इस मंत्र का नियमित रूप से जाप करते हैं. इस मंत्र के जाप से व्यक्ति के मन में सकारात्मक विचार आते हैं और वह सभी जीवों के प्रति करुणा का भाव रखने लगता है. णमोकार महामंत्र जैनियों का मूल मंत्र है. जिसमें किसी भी एक व्यक्ति को नहीं पर जिन्होंने अपनी आत्मा के शत्रु अर्थात् राग, मोह, लोभ, माया, मद, मत्सर पर विजय प्राप्त की है, ऐसे सभी आचार्य साधुओं को प्रणाम किया गया है. गुरुवार (9 अप्रैल) विश्व नवकार दिवस मनाया जा रहा, इस अवसर पर इस मंत्र का विशेष ‘आज का आनंद’ बताया गया है...
नवकार महामंत्र का जाप नियमित करने से जो कंपन तैयार होते हैं, वे हमारी हर तरह से रक्षा करते हैं. आत्मा को शुद्ध कर मोह-माया को दूर करनेवाले और शांति-कल्याण-सयंम की सीख देनेवाले इस मंत्र के लिए अपनी भावना महिलाओं द्वारा प्रकट की है...
णमोकार महामंत्र : श्रद्धा, समता और आत्मशुद्धि का शोशत मंत्र
जैन धर्म की आराधना परंपरा में णमोकार महामंत्र को सर्वोच्च स्थान है. यह केवल एक धार्मिक मंत्र नहीं, बल्कि आत्मा की शुद्धि, समता और विनय का सार्वभौमिक संदेश है. इसकी महिमा का उल्लेख प्राचीन जैन आगम ग्रंथ भगवती सूत्र के प्रारम्भ में महामंगल वाक्य के रूप में मिलता है- णमो अरिहंताणं, णमो सिद्धाणं, णमो आयरियाणं, णमो उवज्झायाणं, णमो लोए सव्व साहूणं ॥ यह मंत्र अनादि और अविनाशी माना गया है| सभी तीर्थंकरों ने इसकी महत्ता को स्वीकार किया है. णमोकार महामंत्र की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी व्यक्ति- विशेष या देवता की स्तुति नहीं की गई, बल्कि उनके गुणों को नमन किया गया है. यह व्यक्ति-पूजा नहीं, बल्कि गुण-पूजा का संदेश देता है. इसमें किसी प्रकार की याचना या कामना नहीं है, केवल निस्वार्थ श्रद्धा, समर्पण और आत्मशुद्धि का भाव है. यही कारण है कि यह मंत्र किसी एक संप्रदाय या समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि सार्वभौमिक और सर्वग्राह्य है. यह महामंत्र जैन आराधना और साधना का ध्रुवकेंद्र है, इसकी शक्ति अपरिमेय है. इस महामंत्र के वर्णों के संयोजन पर चिन्तन करें तो यह बड़ा अद्भुत और पूर्ण वैज्ञानिक है. इसके बीजाक्षरों को आधुनिक शब्द विज्ञान की कसौटी पर कसने पर साधक यह पाते हैं कि इसमें विलक्षण ऊर्जा है और शक्ति का भण्डार छिपा हुआ है. प्रत्येक अक्षर का विशिष्ट अर्थ है, प्रयोजन और सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करने की क्षमता है. इस मंत्र में पंच परमेष्ठियों को नमस्कार किया गया है- अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु. आचार्य संघ के आध्यात्मिक पथप्रदर्शक हैं. उपाध्याय शास्त्रों के ज्ञाता एवं अध्यापक हैं. साधु वे तपस्वी आत्माएं हैं जो आत्मकल्याण और लोककल्याण हेतु धर्म का आचरण करती हैं. जैन दर्शन के अनुसार आध्यात्मिक उत्कर्ष में न तो वेष बाधक है और न ही लिंग. स्त्री हो या पुरुष, सभी आत्मिक उन्नति के अधिकारी हैं. वास्तव में, णमोकार महामंत्र केवल जैन धर्म का मूल मंत्र नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए आत्मजागरण का शोशत उद्घोष है. गुणों की आराधना ही आत्मा को परम शांति और मोक्ष की दिशा में अग्रसर करती है और यही इस महामंत्र का सार है. - श्रमण डॉ. पुष्पेंद्र
युद्ध की स्थिति में वेिश शांति नवकार महामंत्र जाप
वेिश शांति मंत्र- महानवकार मंत्र के चिंतन-मनन करने से मन की नकारात्मकता, तनाव, चिंता दूर होकर शांति मिलती है. अभी की जो युद्ध स्थिति है उसको शांति दिलाने, युद्ध बंद करने और विचारों में परिवर्तन करने हेतु यह वेिश शांति का मंत्र इसका जप पूरे वेिश में सामूहिक रूप में श्रद्धा भाव से करना जरुरी है. नवकार महामंत्र का उद्देश्य और इसका महत्व आत्मशुद्धि और शांति प्रदान करना और मिलाना है. इस वेिश मंत्र जप से सदैव अहिंसा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है. इसमे गुणों की पूजा की जाती है. हर एक के गुणों की पूजा करना और आत्मा विकसित होकर मोक्ष मार्गदर्शक की ओर चलने के लिए यह नवकार महामंत्र है. नवकार महामंत्र यह जैन धर्म का सर्वो च्च और अनादिकाल से आया हुआ मूल मंत्र है. यह मंत्र आत्मशुद्धि, मानसिक शांति, नकारात्मकता दूर कर और मोक्ष प्राप्ति के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है. यह किसी व्यक्ति का विशेष नहीं बल्कि आध्यात्मिक अवस्थाओं की वंदना है. - प्रो. सुरेखा प्रकाश कटारिया, चिंचवड़, पुणे
युगों से बहुत महत्वपूर्ण माना गया मंत्र
नवकार मंत्र को युगों से बहुत महत्वपूर्ण मंत्र माना जाता है. कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से पहले जैन लोग इस मंत्र का जाप करते हैं. नवकार मंत्र सांसारिक जीवन में मदद करता है. नवकार मंत्र बोलने से, आप सर्वश्रेष्ठ आत्माओं के नामों का पाठ कर रहे हैं और यह आपको उच्चतर ले जाएगा, लेकिन केवल तभी जब आप इसे समझ के साथ पाठ करेंगे. नवकार मंत्र ऐसा है कि यह न केवल किसी चिंता को दूर करता है, बल्कि व्यक्ति के घर से सभी संघर्षों को भी दूर करता है. इस मंत्र के प्रथम पांच पदों में 35 अक्षर और शेष दो पदों में 33 अक्षर हैं. इस तरह कुल 68 अक्षरों का यह महामंत्र समस्त कार्यों को सिद्ध करने वाला एवं कल्याणकारी अनादि सिद्ध मंत्र है. इसकी आराधना करने वाला स्वर्ग और मुक्ति को प्राप्त कर लेता है. - अनिता अशोक खाबिया, सातववाडी, हडपसर, पुणे
आत्मिक सुख को सुलभ करने वाला महामंत्र
नवकार महामंत्र वैेिशक कल्याणकारी शक्ति से युक्त मंत्र है. जैन समाज में अनादिकाल से जिस मंत्र का प्रारंभ हुआ जो पापों को नष्ट करता है और शोशत मंत्र कहलाता है. भगवती सूत्र, कल्प सूत्र, आवश्यक सूत्र, चंद्र प्रज्ञाप्ती सूत्र, सूर्य प्रज्ञाप्ती सूत्र, जम्मू दीप प्रज्ञाप्ती सूत्र इन शास्त्र में भी णमोकार महामंत्र हमें पढ़ने मिलता है. णमोकार मंत्र में पाच पद को नमस्कार किया गया है और ये नमस्कार अहंकार हटाने के लिए जरुरी होता है. काया से झुकना वचन से नमस्कार बोलना और मनसे अभिमान हटाना, ये तीन योगों का सम्मिलन नमस्कार मंत्र में होता है. पुण्य का बंध करनेवाला, अशुभ कर्म की निर्जरा करनेवाला, गुणग्राहकता बढानेवाला, मोक्ष प्राप्ति में आगे बढ़ानेवाला, विनम्रता लानेवाला और नीच गोत्र का क्षय करनेवाला नवकार महामंत्र - वेिशशांति महामंत्र है. कीर्तनकार डॉ. ेशेता नीलेश राठोड-कटारिया, उद्योगनगर, चिंचवड़
णमोकार महामंत्र : कल्याण और शांति का रास्ता
जैन धर्म का णमोकार मंत्र सत्य, अहिंसा, चोरी न करना, अनासक्ति और ब्रह्मचर्य जैसे महान सिद्धांतों को प्राथमिकता देता है, एक शोशत, पवित्र और शुभ महामंत्र है. यह मंत्र प्राकृत भाषा में है और आर्य छंद में लिखा गया है. इसमें पंच परमेष्ठी को यानी अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय और साधु को नमस्कार किया है. इस मंत्र की खासियत यह है कि यह सभी महापुरुषों को नमन करता है जिन्होंने तपस्या और ध्यान से अपनी आत्मा को लाभ पहुंचाया है और सर्वोच्च पद पाया है. जैन धर्म व्यक्तियों का नहीं बल्कि गुणों का उपासक है. इसमें जिन पांच सर्वोच्च आत्माओं को नमन किया जाता है. अरिहंत और सिद्ध सर्वज्ञ होते हैं. आचार्य, उपाध्याय, साधु महाव्रत, तपस्या, दशधर्मों का पालन, शुद्ध आचरण करते हैं और पांचों इंद्रियों पर विजय प्राप्त कर इस मार्ग पर अग्रणी होते हैं. मंत्र के माध्यम से इन्हीं गुणों को नमन करना और उनका चिंतन करना और यह भावना रखना कि मैं भी इन सभी को प्राप्त करना चाहता हूं, यही णमोकार मंत्र का सच्चा जाप है. यह आध्यात्मिक महामंत्र शरीर और मन को पॉजिटिव एनर्जी से भर कर नेगेटिव विचारों को कम करता है. - शुभा अजय फुलंबरकर, आकुर्डी, पुणे
विश्वशांति का मूलाधार: नवकार महामंत्र
हर धर्म के तत्व, सिद्धांत अलग-अलग पाये जाते हैैं और हर धर्म के मंत्र भी अलग हैं. जैसे- वैदिक का मूलमंत्र गायत्री मंत्र, बौद्ध का त्रिशरण मंत्र, सिख का 1 ॐ (एकोंकार) मंत्र तो जैनों का - नवकार मंत्र है. कहां जाता है सभी में नवकार मंत्र श्रेष्ठ है. इस मंत्र की कई विशेषताएं हैं. जिस मंत्र में पांच पद है, जिन पांच पदों में प्रथम दो पद देव के और तीन पद गुरु के है. हर में पद की शुरुआत ‘णमो’ शब्द होती है. ‘णमों अर्थात नमस्कार, जिसमें विनय का बोध होता है, विनय झुकना सिखाता है. हर एक आत्मा में परमात्मा है, बस उसे प्रकट करना है. परमात्मा है बस उसे प्रकार करना है. सभी मंगलों में यह उत्कृष्ट मंगल है और प्रथम है. अर्थात यह मंत्र न जातिवान है, न व्यक्तिवाचक है, न किसी धर्म की अपेक्षा से हर जीव जो इन गुणोंसे युक्त है, उन्हें किया हुआ नमस्कार निश्चित फलदायी है. कहते हैं- समरो मंत्र भलो नवकार, ये छे 14 पुरखानों सार | येना महिमानो नहीं पार, येनो अर्थ अनंत अपार ॥ जो भी शुद्ध मन से इसका जाप करता है, उसका बेड़ा पार होता है और यह निश्चित वेिशशांति के लिये है. - पुष्पा शिंगवी, मार्केटयार्ड, पुणे
‘नवकार’ की महिमा अपरंपार है
नवकार महामंत्र जैन धर्म का सबसे पवित्र, सार्वभौमिक और प्रभावशाली मंत्र माना जाता है. नवकार मंत्र का जप करने से मन में शांति, आत्मा में पवित्रता और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. यह मंत्र हमें अहंकार छोड़कर विनम्रता, श्रद्धा और आत्मजागृति का मार्ग दिखाता है. नियमित जाप से कर्मों का क्षय होता है और आत्मा धीरे-धीरे मोक्ष की ओर अग्रसर होती है. नवकार की महिमा अपरंपार है, हर दिल के लिए ये उपहार है ॥ जो श्रद्धा से इसका जाप करे, उसका जीवन सदा साकार है ॥ न शब्द मात्र, ये दिव्य प्रकाश है, हर संकट में ये वेिशास है ॥ नवकार से जो नाता जोड़ लिया, उसने पाया आत्मा का सच्चा वास है ॥ नवकार की धुन में जो खो जाता है, वो भीतर से उजाला पाता है ॥ हर सांस में बस जाए ये मंत्र अगर, तो जीवन खुद ही मंदिर बन जाता है ॥ - स्नेहल महावीर चोरड़िया, सैलिसबरी पार्क, पुणे