केसरी’ की रिटायर्ड चीफ डिप्टी एडिटर मृणालिनी ढवले (उम्र 92 वर्ष) का मंगलवार (28 अप्रैल) काे निधन हाे गया. उनका अंतिम संस्कार बुधवार (29 अप्रैल) काे सुबह वैकुंठ श्मशान घाट पर किया गया है.मृणालिनी धवले ने लंबे समय तक ‘केसरी’ के लिए काम किया. लाेकमान्य तिलक की पाेते जयंतराव तिलक की पत्नी स्व. इंदुताई तिलक के साथ मिलकर उन्हाेंने ‘केसरी’ द्वारा बच्चाें के लिए पब्लिश की गई ‘बाल सह्याद्री’ और बााद में ‘छावा’ की जिम्मेदारी अच्छे से संभाली थी. ढवले ने इंदुताई तिलक के साथ मिलकर केसरी पब्लिकेशन की किताब ‘लाेकमान्यांच्या आठवणी’ काे एडिट किया, जिसे एस. वी. बापट ने लिखा था. मृणालिनी ढवले ने शांताबाई तिलक पर ‘लाेकमान्यांच्या सूनबाई’ और इंदुताई तिलक पर ‘कर्मयाेगिनीद किताबें लिखीं. ‘दृष्टिआडची सृष्टि’, ‘अंतराल झेप’, ‘रेडियम’ और ‘विज्ञान देवाची कहाणी’ यह उनकी कुछ और किताबैं. उनकी नाॅवेल ‘अंतराल झेप’ काे नेहरू अवाॅर्ड से सम्मानित किया गया था.
यह नाॅवेल रूसी स्पेस हीराे यूरी गागारिन की ज़िंदगी पर आधारित है. ज्येष्ठ नेते स्व.जयंतराव तिलक की सलाह पर ढ़वले ने लेजिस्लेटिव काउंसिल की गाेल्डन जुबली के माैके पर पब्लिश हुईं दाे स्मरणिका भी एडिट की थीं.ढ़वले ने फर्ग्यूसन काॅलेज से बी.
एस. सी. की डिग्री ली थी. उन्हाेंने पुणे यूनिवर्सिटी से फ्रेंच की पढ़ाई की और वह रानडे इंस्टीट्यूट में जर्नलिज़्म काेर्स के पहले बैचकी स्टूडेंट थीं. मराठी भाषा संवर्धन प्रतिष्ठान ने उन्हें ‘माध्यम रत्न अवाॅर्ड’ से सम्मानित किया था. 1982 में, पुणे शहर की रेपुटेशन बढ़ाने के लिए उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से अवाॅर्ड मिला था. डाॅ. एस. एल. भैरप्पा के कन्नड़ नाॅवेल का मराठी में ट्रांसलेशन करने के लिए उन्हें सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी ने खास ताैर पर सम्मानित किया था. मृणालिनी ढवले, विजयाताई लावटे के ‘मानव्य’ संगठन की संस्थापक-ट्रस्टी थीं.