मांसपेशियां व हड्डियों के दर्द में उनकी गंभीरता के अनुसार इलाज किया जाता है. इसमें सर्जरी एक महत्वपूर्ण उपाय होता है. पेशेंट को जल्दी ठीक होने और उसकी रोजमर्रा की जिंदगी पहले जैसी आसान करने में फिजियोथेरेपिस्ट बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. फिजियोथेरेपिस्ट की मदद से पेशेंट जल्दी ठीक हो सकता है. इस बारे में पूछे गए प्रश्नों के विस्तार से उत्तर देकर पुणे स्थित साईश्री विटालाइफ के संचालक और स्पोर्ट्स इंजुरी विशेषज्ञ डॉ. नीरज आडकर ने शंकाओं का समाधान किया.
सवाल : अतछ के जल्द महसूस होने वाले लक्षण कौन से हैं और इसका निदान कैसे किया जाता है?
जवाब : AVN के शुरूआती लक्षण यानि कूल्हा, पेट और जांघ के बीच का भाग अथवा घुटने में सौम्य वेदना, जो वजन उठाने से बढ़ती जाती है. जैसे-जैसे दुख बढ़ता है साथ में कड़ापन बढ़ता है तथा हलचल यानि मूवमेंट पर बंधन आ सकता है. हड्डियों को मिलने वाले खून की मात्रा कम होती है तब AVN की बीमारी होती है. इस बीमारी से हड्डियों में होने वाले टिश्यू नष्ट होते हैं. सामान्यत: एक्स-किरण जांच में दिखायी देने वाले बदलाव से पहले MRI द्वारा AVN का निदान हो सकता है. निदान जल्दी हो तो शल्यक्रिया के बदले अन्य उपचार पद्धति से उसकी वृद्धि नियंत्रित हो सकती है.
सवाल : अतछ के कौन से कदम पर कूल्हे का जाइंट बदलने की सलाह दी जाती है?
जवाब : AVN के बढ़ते कदम यानि तीसरे या चौथे स्टेज पर की स्थिति में होने वाली तीव्र वेदनाएं तथा गतिशीलता पर मर्यादा हो तो कूल्हे का जोड़ बदलने की सलाह दी जाती है. इस अवस्था में जोड़ का बाह्य भाग कमजोर होने से वह कड़ा और पीड़ादायक होता है इसलिए पुरानी पद्धति के उपचार यानि दवाओं अथवा हड्डियों के अंतर्भाग पर होने वाला दबाव कम करना प्रभावशाली नहीं होते. किन्तु कूल्हे का सम्पूर्ण जोड़ बदलने से फिर से काम शुरू हो सकता है और वेदना से आराम मिलता है. जोड़ों का स्वास्थ्य अच्छा रखने के लिए पहले से ही उपचार जल्दी करने से बहुत लाभ होता है.
सवाल : कूल्हे का बदला हुआ जाइंट टिकने की कालावधि क्या होती है और इस कालावधि पर कौन सी बातों का असर होता है? जवाब : कूल्हे का जोड़ बदलने की शल्यक्रिया अच्छे तरीके से हो तो वह 15 से 20 साल तक टिक सकता है. कई बार आधुनिक सामग्री तथा तकनीक के कारण यह कालावधि बढ़ सकती है. रुग्ण की कार्यक्षमता, वजन, हड्डियों की गुणवत्ता तथा पुन:रोपण शल्यक्रिया के दौरान सुयोग्य संरचना होना आदि मुद्दे टिकने की कालावधि पर असर कर सकते हैं. काम में व्यस्तता या मोटेपन के कारण जोड़ों में तनाव आता है और वे जल्दी कमजोर होते हैं. जाइंट घिसने के लक्षण अथवा ढीलापन ये बातें शल्यचिकित्सक के जांच चक्र का नियमित पालन करने से जल्दी पहचानी जाती हैं. पुन:रोपण अधिक समय टिकने के लिए स्वास्थ्यपूर्ण जीवनशैली तथा गिरने से बचना ये चीजें महत्वपूर्ण है.
सवाल : क्या आस्टियोआर्थराइटिस की शुरुआत जल्दी होने के पीछे विटामिन- बी 12 अथवा डी की तीव्र कमी के कारण हो सकते है?
जवाब : हां, जोड़ों की घिसाई जल्दी होने का कारण विटामिन-बी 12 अथवा डी इनकी तीव्र कमी अप्रत्यक्ष रूप से हो सकता है. विटामिन-डी हड्डियों में ताकत भरने में तथा स्नायु का कार्य चलाने में मदद करता है और विटामिन-बी 12 मज्जा तन्तुओं के स्वास्थ्य के लिए सहायक होता है. इन दोनों की कमी से हड्डियां और स्नायु दुर्बल होने तथा जोड़ों में तनाव आने जैसे असर होते हैं. परिणामत: नरम लचीली हड्डी के कार्य में रुकावट आने का खतरा बढ़ता है. किन्तु ये विटामिंस प्रत्यक्ष रूप में आस्टियोआर्थराइटिस का कारण नहीं हो सकते लेकिन उनकी कमी से जोड़ों को हानि पहुंच सकती है, इसलिए जोड़ों का स्वास्थ्य लंबे समय तक कायम रखने के लिए इनकी उचित मात्रा होना आवश्यक है.
सवाल : क्या जोड़ों के आसपास के स्नायु दुर्बल होने का कारण विटामिन-डी की कमी हो सकती है?
जवाब : निश्चित! स्नायु का बल कायम रखने के लिए और उन में समन्वय हो, इसलिए विटामिन-डी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस विटामिन की कमी के कारण खासकर कूल्हे का जोड़ और घुटने जैसे महत्वपूर्ण जोड़ों को आधार देने वाले स्नायु कमजोर हो सकते हैं. इससे असंतुलन, गिरने की अधिक संभावना एवं जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव आना ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं. इस दुर्बलता के कारण दिन-ब-दिन जोड़ों का दर्द अथवा जोड़ों में कमजोरी आ सकती है.
सवाल : जो रोगी या पीड़ित अस्थिभंग या जोड़ों सम्बंधी समस्या का सामना बार-बार करते हैं, उन्हें अपने विटामिन- बी 12 अथवा डी के लेवल की जांच बार-बार करानी क्या आवश्यक है?
जवाब : बार-बार अस्थिभंग, हड्डियों में पीड़ा या जोड़ों सम्बंधी जटिल बीमारी हो, तो ऐसे पीड़ितों को उनके विटामिन- बी 12 अथवा डी के लेवल की जांच साल में कम- से-कम एक बार अथवा कमी की जानकारी पहले से हो तो एक से अधिक बार जांच कराएं. खासकर वृद्ध, सूरज की रोशनी थोड़ी मात्रा में पाने वाले लोग, शाकाहारी अथवा विटामिन का शोषण करने में असमर्थ लोग इस लेवल के बारे में सतर्क रहें, यह आवश्यक है. इनके नियमित जांच से यह कमी पहले ही मालूम हो सकती है और उचित प्रावधान के लिए मार्गदर्शन मिल सकता है. निदान जल्द हो तो जोड़ों की अधिक हानि तथा हड्डियां दुर्बल होना रोका जा सकता है.