उद्योगपति अभय फिरोदिया को ‌‘पुण्यभूषण पुरस्कार‌’ प्रदान

बालगंधर्व रंगमंदिर में आयोजित भव्य समारोह में केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी द्वारा सम्मानित

    10-May-2026
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पुणे, 9 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

 विचारों में भिन्नता आज के समाज की समस्या नहीं है, बल्कि विचार शून्यता ही वास्तविक समस्या है. इस पृष्ठभूमि में गौतम बुद्ध, भगवान महावीर सहित महाभारत, रामायण और भगवद्गीता में बताए गए शोशत मूल्य ही दुनिया को बचाने के लिए आवश्यक हैं. यह विचार केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितीन गड़करी ने व्यक्त किए. पुण्यभूषण फाउंडेशन की ओर से वाहन उद्योग क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए वर्ष 2026 का ‌‘पुण्यभूषण पुरस्कार‌’ शनिवार को वरिष्ठ उद्योगपति और फोर्स मोटर्स के चेयरमैन डॉ. अभय फिरोदिया को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गड़करी के हाथों प्रदान किया गया. इस अवसर पर गड़करी बोल रहे थे. बाल गंधर्व रंग मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में मंच पर कार्यक्रम के अध्यक्ष केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गड़करी, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, राज्य के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं पुण्यभूषण पुरस्कार चयन समिति के अध्यक्ष रघुनाथ माशेलकर, सिंबायोसिस शिक्षण समूह के संस्थापक-संचालक एसबी मुजुमदार, सकाल समाचार समूह के प्रमुख प्र्रतापराव पवार, पुणे के उपमहापौर परशुराम वाडेकर, प्रसिद्ध व्यवसायी गजेंद्र पवार और पुण्यभूषण फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. सतीश देसाई उपस्थित थे. इस दौरान घायल सैनिकों का सम्मान चंद्रकांत पाटिल, नितिन गड़करी और रश्मि कुलकर्णी द्वारा किया गया. इसमें जवान लक्ष्मण जितेंद्र कुमार, सेलर जितेंद्र सिंह और वलसाराजन, द बॉम्ब कैचर बिनू तथा फ्लाइंग ऑफिसर वैभव भागवत की माता वीरमाता लता प्रल्हाद भागवत का सम्मान किया गया. नितिन गड़करी ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत बनाने का सपना ऑटोमोबाइल क्षेत्र ने पूरा किया है और भारत ने इस क्षेत्र में सातवें स्थान से तीसरे स्थान तक छलांग लगाई है. साढ़े चार करोड़ लोगों को रोजगार देने वाला यह क्षेत्र देश को सबसे अधिक वस्तु एवं सेवा कर प्रदान करने वाला क्षेत्र है. इस क्षेत्र में बिजनेस विथ एथिक्स की संकल्पना को अपनाने वाले चुनिंदा उद्योग समूहों में फोर्स मोटर्स शामिल है. यह गर्व की बात है. डॉ. अभय फिरोदिया में सामाजिक जागरूकता और संवेदनशीलता है. मूल्य आधारित जीवन और संयुक्त परिवार व्यवस्था हमारी ताकत है. 21वीं सदी में गुणवत्ता, ईमानदारी और वेिशसनीयता ही वास्तविक पूंजी है. उद्योग क्षेत्र को इस त्रिसूत्रीय को अपनाने की आवश्यकता है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि आज का यह पुरस्कार पुणे के नवरत्नों को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने वाला है. यह सम्मान केवल डॉ. अभय फिरोदिया व्यक्ति का नहीं, केवल फिरोदिया परिवार का नहीं और केवल फोर्स उद्योग समूह का नहीं, बल्कि यह सम्मान मूल्यों और विचारधारा का है. डॉ. अभय फिरोदिया केवल पुणे के ही नहीं, बल्कि देश के भी गौरव हैं. उनका योगदान केवल ऑटोमोबाइल क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. सामाजिक न्याय उनके परिवार की विशेषता है. मेरे पिता और डॉ. अभय फिरोदिया बचपन में एक ही कक्षा में पढ़ते थे. आज मेरे पिता मेरे साथ नहीं हैं, लेकिन फिरोदिया परिवार मेरे साथ है, यह मेरे लिए संबल जैसा है. कार्यक्रम का प्रास्ताविक पुण्यभूषण फाउंडेशन के संस्थापक-अध्यक्ष डॉ. सतीश देसाई ने किया.  
 
पुरस्कार ने साबित किया मैं ‌‘पुणेकर‌’ हूं : डॉ. फिरोदिया

पुरस्कार स्वीकार करते हुए डॉ. अभय फिरोदिया ने कहा कि मेरा जन्म तत्कालीन अहमदनगर में हुआ था. इसलिए कुछ लोग मुझे पुणेकर नहीं मानते. लेकिन आज के इस पुरस्कार ने यह साबित कर दिया है कि मैं पुणेकर हूं. उन्होंने कहा कि मेरे दादाजी की दूरदर्शिता के कारण उद्योग की स्थापना हुई. पिता ने उसे आगे बढ़ाया और मुझे उसे संभालने का अवसर मिला. पिछले 50 वर्षों से मैं इस उद्योग को संभाल रहा हूं. उस समय समाजवादियों की हठधर्मी नीतियों के कारण कई बार हड़तालें होती थीं, जिससे उत्पादन पर बड़ा प्रभाव पड़ता था. मैंने खून-पसीना एक कर काम किया. आज उसका परिणाम देखने को मिल रहा है. आज भारत में बनने वाली प्रत्येक कार का इंजन फोर्स मोटर्स में तैयार होता है, यह मेरे लिए गर्व और खुशी की बात है. उन्होंने कहा कि समाज का ऋण विभिन्न तरीकों से चुकाने का प्रयास मैं कर रहा हूं. समाज के सहयोग से ही हम बड़े बन सके, यही भावना इसके पीछे है. दादाजी और पिता ने व्यक्तिगत ट्रस्ट के माध्यम से समाज को आर्थिक सहायता दी थी, वही प्रयास मैं भी कर रहा हूं.