कई लोग महीनों या वर्षों तक शरीर के दर्द से जूझते रहते ह्ैं. पीठ में जलन, पैरों में झनझनाहट, गर्दन में अकड़न, सिरदर्द या पूरे शरीर में थकान लेकिन जब एमआरआई और एक्स-रे की रिपोर्ट आती है, तो डॉक्टर कहते हैं, सब नॉर्मल है.ऐसे में मरीज खुद को ही दोष देने लगता है. उसे लगता है शायद यह सिर्फ उसका वहम है. लेकिन सच यह है कि हर दर्द रिपोर्ट में दिखाई नहीं देता. कई दर्द ऐसे होते हैं जो शरीर से ज्यादा नर्वस सिस्टम और मस्तिष्क की पेन प्रोसेसिंग से जुड़े होते हैं. इन्हीं विषयों पर दै.‘आज का आनंद’ ने पेन मैनेजमेंट विशेषज्ञ डॉ. प्रिया राठी से खास बातचीत की. प्रस्तुत हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंशस
प्रश्न : डॉक्टर, कई मरीज कहते हैं कि एमआरआई और एक्स-रे नॉर्मल हैं, फिर भी दर्द बना हुआ है. ऐसा क्यों होता है?
उत्तर: यह बहुत आम समस्या है. लोग सोचते हैं कि अगर रिपोर्ट नॉर्मल है तो दर्द भी नहीं होना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है. एमआरआई और एक्स-रे सिर्फ शरीर की स्ट्रक्चर दिखाते हैं जैसे हड्डी, लिगामेंट, डिस्क या नस पर दबाव्. लेकिन कई दर्द ऐसे होते हैं जो फंक्शनल होते हैं, यानी दर्द की प्रणाली जरूरत से ज्यादा संवेदनशील हो जाती है. लंबे समय तक दर्द रहने पर मस्तिष्क और नसों की प्रतिक्रिया बदल जाती है. इसे सेंट्रल सेंसिटाइजेशन कहा जाता है. इसमें हल्की छुअन भी तेज दर्द जैसी महसूस हो सकती है. इसलिए रिपोर्ट नॉर्मल होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि दर्द नकली है.
प्रश्न : ऐसे कौन-कौन से दर्द हैं जो रिपोर्ट में नहीं दिखते?
उत्तर: कई प्रकार के इनविजिबल पेन होते हैं. फाइब्रोमायल्जिया इसमें पूरे शरीर में दर्द और भारी थकान रहती है. मरीज सुबह उठते ही टूटे हुए शरीर जैसा महसूस करता है. नींद पूरी नहीं होती और काम करने की क्षमता कम हो जाती है. यह किसी स्कैन में नहीं दिखता. न्यूरोपैथिक पेन यह नसों का दर्द होता है. इसमें जलन, करंट जैसा एहसास, सुइयाँ चुभने जैसी तकलीफ होती है. डायबिटीज के मरीजों में यह बहुत सामान्य है. 3. मायोफेशियल पेन मांसपेशियों में छोटे-छोटे ट्रिगर पॉइंट्स बन जाते ह्ैं. गर्दन या कंधे में एक जगह दबाने पर दर्द दूसरी जगह तक फैलता है. सीआरपीएस कई बार साधारण चोट या मोच के बाद भी महीनों तक सूजन, जलन और असहनीय दर्द बना रहता है. इसे कॉम्प्लेक्स रीजनल पेन सिंड्रोम कहते हैं क्रोनिक सिरदर्द और पेल्विक पेन कई लोगों को लगातार सिरदर्द या पेट के निचले हिस्से में दर्द रहता है, लेकिन सभी जांच सामान्य आती हैं.
प्रश्न : ऐसे मरीजों को अक्सर लोग गंभीरता से नहीं लेते. इसका मरीज पर क्या असर पड़ता है?
उत्तर : सबसे ज्यादा नुकसान मानसिक रूप से होता है. मरीज सोचने लगता है कि शायद वह ज्यादा सोच रहा है या लोग उसे नाटक समझेंगे. परिवार और ऑफिस में भी कई बार उसे समझा नहीं जाता. लेकिन हमें समझना चाहिए कि दर्द सिर्फ हड्डी टूटने से नहीं होता. नर्वस सिस्टम की गड़बड़ी भी वास्तविक दर्द पैदा करती है. मरीज को सहानुभूति और सही इलाज दोनों की जरूरत होती है.
प्रश्न : पेन क्लिनिक क्या है? यह सामान्य ओपीडी से अलग कैसे होता है?
उत्तर : पेन क्लिनिक खासतौर पर लंबे समय तक रहने वाले दर्द के इलाज के लिए बनाया जाता है. यहाँ मरीज की पूरी हिस्ट्री सुनी जाती है दर्द कब शुरू हुआ, किस तरह का है, नींद और काम पर उसका क्या असर है. उसके बाद एक पर्सनलाइज्ड ट्रीटमेंट प्लान तैयार किया जाता है.
प्रश्न : पेन क्लिनिक में दर्द का इलाज कैसे किया जाता है?
उत्तर : पेन क्लीनिक में निम्न प्रकार से इलाज होता है विशेष दवाइयां न्यूरोपैथिक पेन में सामान्य दर्द निवारक दवाइयाँ ज्यादा असर नहीं करत्ीं. ऐसे में गैबापेंटिन और प्रेगाबालिन जैसी दवाइयाँ दी जाती हैं, जो नसों की अति-संवेदनशीलता कम करती हैं. ट्रिगर पॉइंट इंजेक्शन जहाँ मांसपेशी में गांठ होती है, वहाँ सीधे दवा दी जाती है. इससे अकड़न और दर्द में तेजी से राहत मिलती है. नर्व ब्लॉक दर्द पहुंचाने वाली नस के आसपास दवा देकर कुछ समय के लिए दर्द के सिग्नल रोके जाते हैं सीआरपीएस और पुराने दर्द में यह काफी असरदार है. रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन जिस नस से बार-बार दर्द के संकेत जा रहे होते हैं, उसे विशेष तकनीक से निष्क्रिय किया जाता है. इसका असर कई महीनों तक रह सकता है. स्पाइनल कॉर्ड स्टिम्युलेशन रीढ़ के पास एक छोटा उपकरण लगाया जाता है, जो हल्की विद्युत तरंगों के जरिए दर्द के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुँचने से रोकता है. ड्राय नीडलिंग पतली सुइयों के माध्यम से ट्रिगर पॉइंट्स को उत्तेजित किया जाता है. इससे मांसपेशियों की गांठ और जकड़न कम होती है. पेन पंप बहुत गंभीर और लंबे समय के दर्द में रीढ़ के पास छोटा पंप लगाया जाता है, जो सीधे दवा पहुंचाता है. इससे कम दवा में ज्यादा राहत मिलती है. दर्द सहना बहादुरी नहीं
प्रश्न : आखिर में मरीजों के लिए आपका क्या संदेश है?
उत्तर: अगर महीनों से दर्द बना हुआ है और रिपोर्ट कुछ नहीं बता रही, तो खुद को दोष न दें. आपका दर्द वास्तविक है और उसका इलाज संभव है. दर्द को सहते रहना बहादुरी नहीं है.सही समय पर विशेषज्ञ से इलाज करवाना ही समझदारी है. अगर दर्द आपकी नींद, काम और जिंदगी को प्रभावित कर रहा है, तो पेन क्लिनिक जरूर जाएँ क्योंकि हर व्यक्ति दर्द-मुक्त और बेहतर जीवन का हकदार है.