शिवाजीनगर, 10 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पिछले हफ्ते कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में एक ही दिन में 193 रुपये की भारी वृद्धि हुई है. इस मूल्य वृद्धि के कारण शहर के होटल, ढाबे, चाय की टपरी, बेकरी, हलवाई और छोटे-बड़े व्यवसायों का आर्थिक गणित बिगड़ गया है. फरवरी से अब तक कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कुल 1,380 रुपये की वृद्धि हुई है, जो केवल तीन महीनों में 81 प्रतिशत तक पहुंच गई है. फिलहाल सिलेंडर 3 हजार रुपये में मिल रहा है. सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि के कारण छात्र, मजदूर और छोटे दुकानदार भी आर्थिक संकट में फंस गए हैं. सिलेंडर महंगा होने से छोटे-बड़े व्यवसायियों में आक्रोश देखा जा रहा है. व्यवसायी पूछ रहे हैं कि क्या सरकार ने व्यवसायियों की कमर तोड़ने का फैसला कर लिया है? दूसरी ओर होटल और रेस्टोरेंट मालिकों का मानना है कि व्यवसाय को सुचारू रूप से चलाने के लिए अब कीमतों में कम से कम 10 से 15 प्रतिशत की वृद्धि करनी होगी. कुल मिलाकर गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि के कारण वर्तमान में होटल इंडस्ट्री में काफी अनिश्चितता बनी हुई है. रेस्टॉरेट व्यवसायियों ने शिकायत की है कि कीमतें बढ़ाने के बावजूद कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति अभी भी 20 प्रतिशत तक सीमित है. बड़े होटल व्यवसायों के कई कर्मचारी अपने गांवों को लौट गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप होटलों में कर्मचारियों की कमी महसूस हो रही है. पुणे की होटल इंडस्ट्री में लगभग 40 प्रतिशत कर्मचारी मुख्य रूप से बंगाल, असम, गढ़वाल आदि क्षेत्रों से आते हैं. असम और पश्चिम बंगाल के चुनावों के लिए वे उन राज्यों में गए हैं, वह फिलहाल वापिस नहीं आए हैं.
हमें दो-तीन आइटम कम करने ही पड़े
गैस सिलेंडर की कम आपूर्ति के कारण पहले से ही काफी परेशानी हो रही है. मेन्यू में कई आइटम कम हो गए हैं. ऊपर से अब दाम भी बढ़ गए हैं. स्थिति ऐसी है कि अगर हम मेन्यू में रेट बढ़ाते हैं, तो ग्राहक नहीं आएंगे. हमारे यहां बुफे सिस्टम होने के बावजूद हमें दो-तीन आइटम कम करने ही पड़े हैं. हमारे होटल में फेमस भजी, थालीपीठ या तलने वाले जो अन्य अतिरिक्त आइटम होते हैं, वे हम नहीं दे पा रहे हैं. कोयले या लकड़ी के चूल्हे पर टेंपरेचर कंट्रोल करना मुश्किल होता है. हमने इलेक्ट्रिक चूल्हा भी इस्तेमाल करके देखा, लेकिन वह लोड नहीं ले पाता. फिलहाल कई ग्राहक मेन्यू में दो-तीन आइटम कम होने की वजह से कम आ रहे हैं. मतलब, जिन व्यंजनों का आकर्षण था अगर वही नहीं होंगे, तो ग्राहक नहीं आते. उनका कहना है कि जो फेमस और आकर्षक आइटम थे, जब वही नहीं हैं तो हम क्यों आएं..? कुल मिलाकर, एक तो गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं है और दूसरा उनके रेट भी बढ़ गए हैं. इन सब वजहों से मार्जिन पर बहुत दबाव है, कई आइटम बंद कर दिए गए हैं और इस पूरी स्थिति को देखते हुए ग्राहकों की संख्या भी कम हो गई है. - गौरव दुवेदी, प्रबंधक, विष्णूजी की रसोइ
बढ़ती कीमतों की वजह से मार्जिन पर दबाव गैस होटल इंडस्ट्री का दिल है. इसके दाम बढ़ने की वजह से मजबूरी में हमें सभी रेट्स बढ़ाने ही पड़ेंगे. फिलहाल हमारे यहां तुरंत तो दाम नहीं बढ़ाए जाएंगे, लेकिन हम एक महीने तक देखेंगे कि स्थिति कैसी रहती है और फिर फैसला लेंगे. अगर युद्ध रुक जाता है और अगले महीने तक हालात थोड़े सामान्य होते हैं तो ठीक है, वरना रेट्स में बदलाव करना ही पड़ेगा. गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे हैं, यह स्थिति अभी भी वैसी ही बनी हुई है. यानी, अगर सिलेंडर चाहिए तो दो-तीन गैस एजेंसियों से पूछताछ करनी ही पड़ती है. इसका मतलब है कि सप्लाई भी नहीं है और दाम भी बढ़ गए हैं. जूस आइटम्स को छोड़कर बाकी सभी आइटम्स के रेट बदलने पड़ेंगे. बढ़ती कीमतों की वजह से मार्जिन पर दबाव है और अभी भी मेन्यू में कुछ आइटम्स कम किए गए हैं. जब से युद्ध शुरू हुआ है, तब से कुल 80% मेन्यू में 5 से 10 प्रतिशत तक दाम पहले ही बढ़ा दिए गए हैं. क्योंकि युद्ध की वजह से इस इंडस्ट्री, खासकर फूड इंडस्ट्री पर बहुत बड़ा असर पड़ा है. फूड, प्लास्टिक और वो सभी चीजें जिनमें हीटिंग की जरूरत होती है, उन सभी उद्योगों पर इसका प्रभाव पड़ा है और माल की किल्लत हो गई है. बड़े व्यवसायी तो फिर भी कोई रास्ता निकाल लेते हैं या एडजस्टमेंट कर लेते हैं, लेकिन छोटे व्यवसायियों के लिए बहुत बड़ी दिक्कत पैदा हो गई है. -मेहुल भटेवरा होटल आनंद वेज, कर्वे रोड
बिल में 10 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी संभव हमारे व्यवसाय में सिलेंडर एक महत्वपूर्ण रॉ मटेरियल है. इसलिए, स्वाभाविक रूप से इसकी दरों का प्रभाव खाद्य पदार्थों के दामों पर पड़ेगा ही. खाने के बिल में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि की जा सकती है. यह बढ़ोतरी अचानक तो नहीं, लेकिन धीरे-धीरे करनी ही पड़ेगी. इसका असर सामान्य मांग पर भी पड़ेगा, क्योंकि लोग होटल में खाना खाने से पहले दस बार सोचेंगे. जब तक युद्ध जारी है, तब तक हमें और भी नुकसान होने की संभावना है. पिछले एक-डेढ़ महीने से गैस सिलेंडर वैसे भी नहीं मिल रहे हैं. आपूर्ति अभी भी केवल 20-30 प्रतिशत तक ही सीमित है. राजेश शेट्टी, होटल नैवेद्यम, मित्रमंडल चौक
ग्राहक को बनाए रखना ही सबसे बड़ी चुनौती
एक तरफ तो सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी हुई ही है, लेकिन पिछले करीब छह महीनों में तेल और अन्य वस्तुओं के दाम भी लगभग 5% तक बढ़ गए हैं. इस कारण होटल व्यवसाय में कम से कम 5% रेट बढ़ाना ही पड़ेगा. फिलहाल स्टाफ की कमी है और गैस सिलेंडर की किल्लत की वजह से पहले ही कई व्यंजनों को मेनू से हटाना पड़ता है. ऐसी स्थिति में ग्राहक को अपने साथ जोड़े रखना, यही हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है. हिंदू पंचाग के अनुसार अधिक मास (पुरुषोत्तम मास) होने के कारण शादी-ब्याह के कार्यक्रम केवल 15 मई तक ही होने वाले हैं. इसलिए हमारे कैटरिंग व्यवसायी स्वाभाविक रूप से यही सोच रहे हैं कि जो भी काम मिले, उसे हाथ से न जाने दिया जाए. हालांकि, रेट पहले से ही तय होते हैं, इसलिए सिलेंडर के दाम अचानक बढ़ने पर भी हम तुरंत रेट नहीं बढ़ा सकते. अभी गर्मी के दिन हैं, जिससे एसी रेस्टोरेंट, बार और परमिट रूम में बिजली का बिल भी काफी बढ़ जाता है. साथ ही गैस सिलेंडर महंगा होने से लागत बढ़ गई है. लेकिन, तुरंत रेट बढ़ाना किसी की मानसिकता में नहीं बैठता, इसीलिए लोगों ने एकदम से कीमतें नहीं बढ़ाई हैं. हालांकि इससे हमारा मार्जिन कम हो गया है या फिर बिजनेस केवल अस्तित्व बचाने के लिए बिना मार्जिन के चल रहा है. मगर आने वाले समय में रेट बढ़ाने ही पड़ेंगे, ऐसी स्थिति बनी हुई है. फिलहाल कोई दूसरा विकल्प नहीं है, इसलिए होटल व्यवसायी कम मार्जिन या मनो मार्जिनफ पर काम कर रहे हैं, यही वर्तमान स्थिति की हकीकत है. - किशोर सरपोतदार
गैस की कीमतों में वृद्धि पर नजर
एक ही दिन में कमर्शियल सिलेंडर 193 रुपये महंगा
फरवरी से अब मई तक कुल 1,380 रुपये की वृद्धि
तीन महीनों में कीमतों में 81 प्रतिशत की बढ़ोतरी
होटल मालिकों की दुविधा
होटल मालिकों ने बताया कि दूध, तेल, सब्जियां, पनीर और अन्य कच्चे माल की कीमतें पहले ही बढ़ चुकी हैं. अब गैस की कीमतों में वृद्धि के कारण व्यवसाय चलाना और भी कठिन हो गया है. वे इस दुविधा में हैं कि अगर दरें बढ़ाई जाती हैं तो ग्राहक नाराज होते हैं, और अगर नहीं बढ़ाई जातीं तो नुकसान झेलना पड़ता है.