धनकवड़ी, 10 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) विकसित भारत का सपना साकार करना है तो शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी बनना आवश्यक है. आधारभूत सुविधाओं के साथ-साथ उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा समाज के अंतिम स्तर तक के विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए शिक्षा क्षेत्र के लिए बड़े पैमाने पर आर्थिक प्रावधान करना आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन प्रसिद्ध पत्रकार, प्रख्यात लेखक पद्मश्री राजदीप सरदेसाई ने किया. भारती विद्यापीठ के 62वें स्थापना दिवस समारोह में पत्रकारिता क्षेत्र में योगदान के लिए राजदीप सरदेसाई को डॉ. पतंगराव कदम स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया.इस अवसर पर सम्मान के उत्तर में वे बोल रहे थे. दो लाख इक्यावन हजार रुपये, स्मृति चिन्ह और सम्मानपत्र ऐसा इस पुरस्कार का स्वरूप है. इस पुरस्कार का यह दूसरा वर्ष है. राज्य के राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले, राज्य के स्कूल शिक्षा मंत्री दादा भुसे, भारती विद्यापीठ डीम्ड वेिशविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवाजीराव कदम, समारोह के अध्यक्ष कार्यवाह डॉ. वेिशजीत कदम, कार्याध्यक्ष आनंदराव पाटिल, भारती विद्यापीठ के उपाध्यक्ष डॉ. इंद्रजीत मोहिते, कुलगुरु डॉ. विवेक सावजी, भारती विद्यापीठ स्वास्थ्य विज्ञान विभाग की कार्यकारी संचालिका डॉ. अस्मिता जगताप, सहकार्यवाह डॉ. एम. एस. सगरे, डॉ. के. डी. जाधव, जी. जयकुमार तथा विधायक भीमराव तापकीर इस अवसर पर उपस्थित थे. पुणे-सातारा मार्ग स्थित भारती विद्यापीठ के शैक्षणिक परिसर में रविवार (10 मई) को कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. भारती विद्यापीठ कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट्स की विस्तारित इमारत का उद्घाटन तथा ‘विचार भारती’ के स्थापना दिवस विशेषांक और वेिशभारती न्यूज लेटर का प्रकाशन इस अवसर पर मान्यवरों के हाथों किया गया. आज की पत्रकारिता पर टिप्पणी करते हुए राजदीप सरदेसाई ने कहा कि वर्तमान में दूरदर्शन समाचार चैनलों की पत्रकारिता में आवाज अधिक और समाचार कम दिखाई देते हैं. समाचार चैनलों पर लगातार वाद- विवाद दिखाई देते हैं, जिससे युवा पीढ़ी के सामने भारत की सकारात्मक छवि नहीं बनती. पत्रकार के पास राजनीतिक व्यक्तियों से प्रश्न पूछने का अधिकार और शक्ति होना आवश्यक है. प्रो. मिलिंद जोशी ने प्रस्तावना प्रस्तुत की जबकि डॉ. के. डी. जाधव ने आभार व्यक्त किया. कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. राजेंद्र उत्तुरकर और प्रो. डॉ. ज्योति मंडलिक ने किया. सम्मान पत्र का वाचन प्रो. जागृति ठाकुर ने किया. हम देश की नई पीढ़ी तैयार करने प्रयासरत : डॉ. विश्वजीत कदम डॉ. वेिशजीत कदम ने कहा कि बहुजन समाज तक शिक्षा पहुंचाने के उदात्त उद्देश्य से डॉ. पतंगराव कदम ने भारती विद्यापीठ की स्थापना की. आज महाराष्ट्र सहित देश के निर्माण में भारती विद्यापीठ से शिक्षित अनेक विद्यार्थी बड़े पैमाने पर योगदान दे रहे हैं, इस पर गर्व है. भारती विद्यापीठ को सौ से अधिक पेटेंट और सौ करोड़ रुपये से अधिक की रिसर्च ग्रांट प्राप्त हुई ह्ैं. छत्रपति शाहू महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों से प्रेरित होकर भारती विद्यापीठ का कार्य निरंतर जारी है और देश की नई पीढ़ी तैयार करने के लिए हम प्रयासरत हैं.
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रतिबद्ध : चंद्रशेखर बावनकुले
डॉ. पतंगराव कदम ने शिक्षा क्षेत्र में तूफान के बीच भी दीप जलाने का कार्य किया है, ऐसे गौरवपूर्ण शब्दों में चंद्रशेखर बावनकुळे ने कहा कि विकसित भारत का संकल्प पूरा करना है तो जैसे शिक्षा का महत्व है, वैसे ही जनता की संपत्ति की रक्षा करना राजस्व विभाग का कार्य है. बदलती तकनीक के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना शासन के लिए अनिवार्य है. जिस प्रकार भारती विद्यापीठ का शैक्षणिक कार्य पश्चिम महाराष्ट्र के साथ दिल्ली तक पहुंचा है, उसी प्रकार राज्य की उपराजधानी नागपुर में भी भारती विद्यापीठ का शैक्षणिक कार्य जोरों से शुरू हो, इसके लिए ट्रिट-बीट नीति के माध्यम से शैक्षणिक परिसर हेतु भूमि उपलब्ध कराने का मार्ग निकालेंगे, ऐसा ओशासन बावनकुले ने इस अवसर पर दिया.
शिक्षकों के गैर-शैक्षणिक कार्य कम करेंगे : दादा भुसे
सभी स्तरों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए यदि भारती विद्यापीठ द्वारा कोई प्रारूप तैयार किया जाता है तो उसे राज्य सरकार द्वारा स्वीकार किया जाएगा, ऐसा ओशासन देते हुए दादा भुसे ने कहा कि प्रधानमंत्री के सपनों के विकसित भारत के निर्माण के लिए सामान्य अभिभावकों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के प्रयास शासन स्तर पर शुरू हैं. उन्होंने आगे कहा कि देश के प्रति सम्मान और निष्ठा जागृत करने के लिए आज संस्कारों की आवश्यकता है. स्कूल स्तर पर शुद्ध पानी, स्वच्छ शौचालय और अच्छी इमारतें उपलब्ध कराने के साथ-साथ शिक्षकों को दिए जाने वाले गैर-शैक्षणिक कार्यों को कम करने का प्रयास किया जा रहा है. मराठी सरकारी विद्यालय विद्यार्थियों की संख्या कम होने से बंद हो रहे हैं, ऐसे समय में विद्यार्थियों में भाषा के प्रति प्रेम जागृत कर व्यावहारिक शिक्षा देने की योजना है.