राज्य की 9 सेंट्रल जेलाें में क्षमता से 163% अधिक कैदी

    12-May-2026
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jail 
नेशनल क्राइम रिकाॅर्ड्स ब्यूराे द्वारा जारी प्रिज़न स्टैटिस्टिक्स ऑफ इंडिया 2024 की रिपाेर्ट ने महाराष्ट्र की जेल प्रणाली की एक भयावह तस्वीर पेश की है. आंकड़ाें के अनुसार, राज्य की जेलें अपनी वास्तविक क्षमता से कहीं अधिक भरी हुई हैं और वर्तमान में 143.9 प्रतिशत की ऑक्युपेंसी रेट (कब्ज़ा दर) पर चल रही हैं. इसका अर्थ यह है कि 100 कैदियाें की क्षमता वाली जगह पर लगभग 144 कैदियाें काे रखा जा रहा है. सबसे गंभीर स्थिति राज्य की नाै सेंट्रल जेलाें की है, जहां भीड़भाड़ का स्तर 162.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है. रिपाेर्ट के सबसे चाैंकाने वाले आंकड़े विचाराधीन कैदियाें से जुड़े हैं.महाराष्ट्र की जेलाें में बंद कुल 39,003 कैदियाें में से 80 प्रतिशत से अधिक यानी 31,523 कैदी ऐसे हैं जिनका अभी ट्रायल चल रहा है और वे सजायाफ्ता नहीं हैं.
 
इनमें से 1,845 कैदी पिछले पांच साल से अधिक समय से जेलाें में बंद हैं, जबकि उनके मुकदमाें का फैसला आना अभी बाकी है. इस मामले में महाराष्ट्र पूरे देश में उत्तर प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर है. वहीं, 3,130 कैदी ऐसे हैं जाे पिछले 3 से 5 साल से बिना किसी सजा के सलाखाें के पीछे हैं. भीड़भाड़ के अलावा, जेल प्रशासन संसाधनाें और कर्मचारियाें की भारी कमी से भी जूझ रहा है. रिपाेर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र में सुधारात्मक कर्मचारियाेंके 97 पद खाली पड़े हैं, जाे देश में दूसरा सबसे बड़ा आंकड़ा है.स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी चिंताजनक है, जहाँ एक मेडिकल स्टाफ पर औसतन 520 कैदियाें की जिम्मेदारी है. जेलाें में क्षमता से अधिक कैदी और कर्मचारियाें की कमी प्रशासनिक सुधाराें और मानवाधिकाराें के दृष्टिकाेण से एक बड़ी चुनाैती बनी हुई है.