साेना खरीदने के मुद्दे पर घबराने की जरूरत नहीं

परंपरा के तौर पर लोग हमेशा सोना खरीदते रहेंगे : पुणे सराफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अभय गाडगिल ने कहा

    12-May-2026
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लक्ष्मी रोड, 11 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (10 मई) को अपने एक भाषण में कुछ चीजों में कटौती करने का आह्वान किया है. उन्होंने सुझाव दिया है कि एक साल तक सोना नहीं खरीदना चाहिए. इस आह्वान पर प्रतिक्रिया देते हुए पुणे सर्राफ एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अभय गाडगिल ने कहा कि लोग अपनी परंपरा के अनुसार सोना खरीदते रहेंगे. उन्होंने दै.‌‘आज का आनंद‌’ से बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के इस आह्वान का बाजार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. विशेष प्रतिनिधि स्वप्निल बापट द्वारा लिए गए उनके साक्षात्कार का यह संपादित अंश है.  
 
प्रश्न- प्रधानमंत्री मोदी ने जो आह्वान किया है कि एक साल तक सोना न खरीदें, उस बारे में सर्राफा व्यापारियों का क्या कहना है और यह कितना व्यावहारिक है..?
उत्तर -
हम लोगों की भावनाओं को नियंत्रित नहीं कर सकते. मुझे एक बात बहुत महत्वपूर्ण लगती है कि भारतीय संस्कृति और सोने का एक अटूट रिश्ता है और इसे तोड़ा नहीं जा सकता. यह परंपरा से चला आ रहा है. इसलिए, लोग सोना खरीदना जारी रखेंगे और हमेशा खरीदते रहेंगे.

 प्रश्न- यानी अपील का कोई असर नहीं होगा?
उत्तर-
मुझे नहीं लगता कि अपील का कोई असर होगा. इसका कारण यह है कि अपील केवल सोने-चांदी तक ही सीमित नहीं है. इसमें प्रधानमंत्री जी ने और भी कई अन्य बातें बताई हैं, इसलिए लोग निश्चित रूप से उन पर भी विचार करेंगे.

प्रश्न- क्या सोने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री द्वारा खरीदारी रोकने के आह्वान के कारण सर्राफा व्यापारियों में नाराजगी है?
उत्तर-
यह कुछ हद तक है और होना स्वाभाविक भी है, क्योंकि आज यदि पूरी तरह से सोने-चांदी के बारे में बात की गई है, तो व्यापारियों में थोड़ी नाराजगी होना स्वाभाविक है.

प्रश्न- एसोसिएशन के रूप में आपकी क्या भूमिका होगी..? मतलब ग्राहक खरीदारी बंद नहीं करेंगे यह एक अलग विषय है, वह उनकी मानसिकता का हिस्सा है, लेकिन एसोसिएशन के नाते आप क्या रुख अपनाएंगे..?
 उत्तर-
एसोसिएशन के तौर पर हम अपने सदस्यों और व्यापारियों से यही कहेंगे कि किसी भी तरह की पैनिक (घबराहट) की स्थिति पैदा न होने दें.

प्रश्न- इससे पहले 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी इसी तरह की अपील की थी. उस समय एसोसिएशन या व्यापारियों की क्या प्रतिक्रिया थी और अब 13 साल बाद भी वैसी ही स्थिति दिखाई दे रही है?
 उत्तर-
हां, लेकिन अगर आप उस समय भी देखें, तो सोने की खरीद-बिक्री और कुल मिलाकर व्यवसाय पर वैसा कोई (नकारात्मक) असर नहीं पड़ा था. यह व्यवसाय हमेशा की तरह अच्छा चलता रहा, आगे भी जारी रहा और लोग सोना खरीदते रहे. वैसी ही उम्मीद इस बार भी है. सर्राफा व्यापारियों की तब भी यही प्रतिक्रिया थी कि किसी भी बात पर घबराकर विचार करने की आवश्यकता नहीं है.

 प्रश्न- प्रधानमंत्री मोदी ने जो आह्वान किया है, उसके पीछे क्या गहने और बुलियन ये दो अलग पहलू हैं, क्या इस दृष्टिकोण से इसे देखा जा सकता है..?
उत्तर-बु
लियन को निश्चित रूप से निवेश (इन्वेस्टमेंट) के दृष्टिकोण से देखा जाता है और गहने मुख्य रूप से पहनने के लिए खरीदे जाते हैं, इन्हें शादी-ब्याह या अन्य अवसरों के लिए लिया जाता है. इसलिए ये दोनों चीजें अलग हैं. लेकिन आजकल देखा जाए तो लोग निवेश के नजरिए से भी सोने की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं और यह लोगों के जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा बन गया है. सोने में निवेश करना अब एक बहुत महत्वपूर्ण पक्ष बन चुका है.