इलेक्ट्राॅनिक्स और सूचना प्राैद्याेगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने साेमवार काे कहा कि पिछले वर्ष भारत से निर्यात हाेने वाली शीर्ष तीन वस्तुओं में इलेक्ट्राॅनिक्स शामिल रहा और आने वाले समय में इसमें और वृद्धि हाेने की संभावना है.सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2026 में संबाेधित करते हुए वैष्णव ने कहा कि पिछले दशक तक डीजल भारत की सबसे बड़ी निर्यात वस्तु हुआ करती थी, लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं.उन्हाेंने कहा, पिछले वित्तीय वर्ष में पारंपरिक निर्यात वस्तुओं में डीजल, रत्न एवं आभूषण, वस्त्र और इंजीनियरिंग सामान प्रमुख श्रेणियाें में शामिल थे.लेकिन अब स्मार्टफाेन भारत से निर्यात हाेने वाली सबसे बड़ी वस्तु बन गया है और इलेक्ट्राॅनिक्स निर्यात की शीर्ष तीन श्रेणियाें में शामिल हाे चुका है. यह ताे ेवल शुरुआत है. भारत ने अपने पड़ाेसी देश काे लगभग 30 हजार कराेड़ रुपये मूल्य के इलेक्ट्राॅनिक उपकरणाें का निर्यात किया है, जाे एक बड़ा परिवर्तन दर्शाता है. वैष्णव ने बताया कि इलेक्ट्राॅनिक घटकाें के निर्माण के लिए देशभर में अब 71 विनिर्माण इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं.
इनमें से कई इकाइयां निर्माण के उन्नत चरण में हैं और निकट भविष्य में उत्पादन शुरू करेंगी. उन्हाेंने कहा, कई इलेक्ट्राॅनिक घटकाें की घरेलू मांग पूरी तरह देश में ही पूरी की जा सकेगी. अनेककंपनियां वैश्विक मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बनकर दुनिया भर में निर्यात शुरू करेंगी. मैं निर्माताओं से गुणवत्ता, सिक्स सिग्मा, लीन विनिर्माण और डिज़ाइन पर विशेष ध्यान देने का आग्रह करता हूं, ताकि भारत दीर्घकाल तक वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बना रहे और विकसित भारत की दिशा में आगे बढ़ सके.सेमीकंडक्टर निर्माण के विषय में मंत्री ने कहा कि दाे कारखाने पहले ही व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर चुके हैं, जबकि तीसरा कारखाना जुलाई में और चाैथा नवंबर अथवा दिसंबर में उत्पादन शुरू करेगा. उन्हाेंने कहा कि वैश्विक स्तर पर तेजी से हाे रहे तकनीकी नवाचार और भू-राजनीतिक चुनाैतियाें के बीच भारत के पास नेतृत्व करने का बड़ा अवसर है.इसी दृष्टि से भारत ने माइक्राे एलईडी तकनीक काे अपनाने का निर्णय लिया है और अगले 22 महीनाें में देश में माइक्राे एलईडी स्क्रीन का उत्पादन शुरू हाेने की उम्मीद है.