लक्ष्मी रोड, 13 मई (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा एक वर्ष के लिए सोना खरीद स्थगित करने के आह्वान के ठीक दो दिन बाद, केंद्र सरकार ने इस दिशा में कदम उठाना शुरू कर दिया है. केंद्र सरकार और वित्त मंत्रालय ने 13 मई 2026 की आधी रात से सोने, चांदी और अन्य कीमती धातुओं पर आयात शुल्क में वृद्धि करने की अधिसूचना जारी की है. अब आयात शुल्क और सेस मिलाकर 15 प्रतिशत होगा. सरकार द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद बुधवार (13 मई) को सर्राफा बाजार में दोनों धातुओं की कीमतों में उम्मीद के मुताबिक बढ़ोतरी देखी गई. पुणे सर्राफा बाजार में 10 ग्राम सोना खरीदने के लिए ग्राहकों को जीएसटी सहित 1 लाख 64 हजार 500 रुपये (1,59,700 रुपये + 3% जीएसटी) देने पड़े. वहीं, 1 किलो चांदी खरीदने के लिए ग्राहकों को 2 लाख 98 हजार 700 रुपये (2,90,000 रुपये + 3% जीएसटी) चुकाने पड़े. पिछले एक हफ्ते की तुलना करें तो सोने की कीमत में 12 हजार रुपये और चांदी की कीमत में 45 हजार रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है. सरकार द्वारा आयात शुल्क बढ़ाए जाने के कारण अब विदेश से सोना, चांदी और प्लैटिनम आयात करने के लिए अधिक कर चुकाना होगा. सरकार ने सोने पर आयात शुल्क को 5% से बढ़ाकर 10% करने के साथ-साथ IDC उपकर (सेस) में भी वृद्धि की है. बताया गया कि इसके अतिरिक्त, एक निश्चित कोटे के तहत संयुक्त अरब अमीरात से आयात होने वाले सोने पर लगने वाले आयात शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है. नए आयात शुल्क केवल बिस्कुट और ब्रिक्स पर ही नहीं, बल्कि आभूषण बनाने में इस्तेमाल होने वाले हुक, पिन और स्क्रू जैसे छोटे हिस्सों पर भी लागू होंगे. इसके अतिरिक्त, पुरानी धातुओं से सोना और चांदी निकालने की प्रक्रिया से उत्पन्न होने वाले कचरे (स्क्रैप) पर भी 10% कर लगाया जाएगा. गौरतलब है कि जुलाई 2024 के बजट में सोने पर कुल आयात शुल्क को 15% से घटाकर 6% कर दिया गया था. इसमें बुनियादी सीमा शुल्क (BCD) को 10% से घटाकर 5% और उपकर ( IDC) को 5% से घटाकर 1% किया गया था. लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में, सरकार द्वारा आयात कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि विदेशी मुद्रा की बचत की जा सके. देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए प्रधानमंत्री ने हाल ही में एक वर्ष के लिए सोने की खरीद स्थगित करने, विदेश यात्राओं से बचने और पेट्रोल तथा डीजल का किफायत से उपयोग करने का आह्वान किया था. पश्चिम एशिया में तनाव, डॉलर के उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की ओर बढ़ते रुझान के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का सोना आयात 24% बढ़कर 71.98 अरब डॉलर के ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. विशेष बात यह है कि सोने की वास्तविक मात्रा में गिरावट आई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में आसमान छूती कीमतों के कारण भारत को इसके लिए बहुत बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार खर्च करना पड़ा है. सोने की प्रति किलो दर 2024-25 में 77,617 डॉलर से बढ़कर 2025-26 में लगभग 99,825 डॉलर हो गई है. इसके परिणामस्वरूप, कम मात्रा में आयात होने के बावजूद कुल आयात मूल्य तेजी से बढ़ा है. दिल्ली के सर्राफा बाजार में 10 ग्राम सोने की कीमत डेढ़ लाख रुपये के पार पहुंचने से आम ग्राहकों पर भी वित्तीय दबाव बढ़ गया है. इस बीच आर्थिक शोध संस्थान ‘जीटीआरआई’ ने भारत-यूएई मुक्त व्यापार समझौते पर पुनर्विचार करने की मांग की है. शुल्क में कटौती के बाद दुबई के रास्ते भारत आने वाले सोने पर प्रभावी शुल्क केवल 5% तक रह गया है, जिससे आयात में बड़ी वृद्धि देखी जा रही है. ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक कौन्सिल की प्रतिक्रिया राजेश रोकड़े (अध्यक्ष, जीजेसी) ने कहा, जीजेसी और संपूर्ण रत्न एवं आभूषण उद्योग राष्ट्र के साथ मजबूती से खड़ा है और बड़े राष्ट्रीय हित में लिए गए सरकार के नीतिगत निर्णयों का सम्मान करता है. हमारा मानना है कि सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में वृद्धि वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में एक अस्थायी और नपा-तुला उपाय है. व्यापार जगत को शांत और आत्मवेिशासी रहना चाहिए, क्योंकि भारत के आभूषण क्षेत्र ने हमेशा चुनौतीपूर्ण समय के दौरान लचीलापन और अनुकूलन क्षमता का प्रदर्शन किया है. GJC उद्योग की स्थिरता, उपभोक्ता वेिशास और निरंतर विकास सुनिश्चित करने के लिए सरकार और सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा. अविनाश गुप्ता (उपाध्यक्ष, जीजेसी) ने कहा, सोना और आभूषण भारत की अर्थव्यवस्था, परंपराओं और बचत की संस्कृति से गहराई से जुड़े हुए हैं. इस मोड़ पर, व्यापारिक बिरादरी के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे घबराहट से बचें और आत्मवेिशास तथा जिम्मेदारी के साथ अपना व्यवसाय जारी रखें. ॠगउ राष्ट्र की व्यापक आर्थिक प्राथमिकताओं का पूरी तरह से समर्थन करता है और कारीगरों, व्यापारियों एवं उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए इस क्षेत्र के दीर्घकालिक विकास और स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए नीति निर्माताओं के साथ सकारात्मक जुड़ाव के लिए प्रतिबद्ध है.
मुद्रा भंडार और व्यापार में संतुलन बनाए रखना जरूरी
हम पूरे मन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के साथ हैं. हम आयात नहीं करेंगे और डॉलर बचाएंगे. हमारे लिए देश सर्वोपरि है. विदेशी मुद्रा भंडार बचाना और व्यापार संतुलन बनाए रखना आज की जरूरत है. इसके लिए एक बेहतर विकल्प यह है कि देश में जो पुराना सोना और गहने उपलब्ध हैं, उन्हें ही नया रूप देकर भविष्य के कार्यक्रमों और त्यौहारों को मनाया जाना चाहिए. इससे सर्राफा कारीगरों को निरंतर रोजगार मिलता रहेगा, जिससे उनका घर चलेगा और साथ ही हमारे स्टाफ और हमारे परिवार का भी गुजारा होगा. किसी का भी नुकसान किए बिना, हम इस तरह देश का फायदा कर सकते हैं. - राजेश सोनी, एचपी ज्वेलर्स, लुल्लानगर
पुराने सोने को नए डिजाइधस में अपग्रेड कर सकते हैं
एक जिम्मेदार ज्वेलर के नाते और हम ज्वेलर होने से पहले भारत के नागरिक हैं. इसलिए, भारतीय नागरिक होने के नाते हमें अपने देश के साथ खड़ा होना चाहिए. देशभक्ति का मतलब केवल ‘हम भारतीय हैं’ चिल्लाना, लाल किले पर जाना या 26 जनवरी और 15 अगस्त को एक-दूसरे को व्हाट्सऐप मैसेज भेजना ही नहीं है. कभी-कभी जब राष्ट्र बलिदान मांगता है, तब इस तरह के त्याग की भावना काम आती है. इसमें बेशक, बिजनेस पर असर पड़ेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन हमेशा कोई न कोई रास्ता जरूर होता है. मेरा व्यक्तिगत रूप से मानना है कि भारत में बहुत सारा ओल्ड गोल्ड (पुराना सोना) है. अब समय आ गया है कि उन डिजाइधस को अपग्रेड किया जाए, सोना बदला जाए और उसका स्वरूप बदला जाए. इस तरह हम घर में सोना भी बरकरार रख सकते हैं और साथ ही नए डिजाइन भी बनवा सकते हैं, जब तक कि देश की स्थिति में सुधार नहीं होता. इसका मतलब यह नहीं है कि हमारी बेटियों को शादी नहीं करनी चाहिए या उन्हें अच्छा और सुंदर नहीं दिखना चाहिए; बेशक उन्हें दिखना चाहिए. लेकिन इसे करने का एक तरीका होता है. और जब हमारे देश ने हमें पुकारा है, तो हमें (देश के साथ) मजबूती से खड़ा होना ही चाहिए. - संगीता ललवाणी, निदेशक, गोल्ड माट
हम सभी सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं
हम सभी सरकार के इस निर्णय का स्वागत करते हैं, क्योंकि अंततः देखा जाए तो यह करंट अकाउंट डेफिसिट को नियंत्रित करने के लिए है. लेकिन इसका दूसरा परिणाम यह हो रहा है कि (ड्यूटी का) अंतर बढ़ने से तस्करी बढ़ने की संभावना काफी अधिक हो जाती है, क्योंकि पहले इसी अंतर को कम करने के लिए ड्यूटी घटाई गई थी. दूसरा मुद्दा यह है कि जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्वर्ण आभूषणों का निर्यात करने वाले निर्माता हैं, उनके लिए अतिरिक्त सीमा शुल्क के कारण भारतीय सोना महंगा हो जाता है. इसका सीधा लाभ मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के देशों को मिलता है, जहां कस्टम ड्यूटी कम है. जिस तरह यूके और यूएस जैसे विदेशी देशों के ग्राहक हैं, जो भारत से आयात करते हैं, वे अब भारत में सोना महंगा होने के कारण मिडिल ईस्ट की ओर रुख करेंगे. इससे निर्यातकों और व्यापार को थोड़ा नुकसान हो रहा है. मुख्य अंतर यही है कि बाकी अन्य देशों की तुलना में भारत में सोना महंगा हो रहा है, जिसका नुकसान उठाना पड़ रहा है. अगर काउंटर रेट को देखा जाए, तो लगभग 9 प्रतिशत की वृद्धि यानी करीब 10,000 रुपये की बढ़त होनी चाहिए थी, लेकिन घरेलू बाजार में फिलहाल केवल 5 से 6 हजार रुपये की ही बढ़त देखी गई है. इसका कारण यह है कि बाजार इतनी बड़ी बढ़त को सोख नहीं पा रहा है. कीमतें बढ़ने के कारण खरीदारी की मांग कम हो गई है. हालांकि, जो लोग अपना मुनाफा बुक करना चाहते हैं, वे अब सोना बेचने के लिए बाजार में बाहर निकल रहे हैं. - वास्तुपाल रांका, रांका ज्वेलर्स, कर्वे रोड
सोना आयात में रिकॉर्ड वृद्धि
(मूल्य अरब डॉलर में)
2019-20 ------------28.2
2020-21 ------------ 34.62
2021-22 ------------ 46.14
2022-23 ------------ 35
2023-24 ------------ 45.54
2024-25 ------------ 58
2025-26 ------------ 71.98
आयात की रही इतनी मात्रा
2022-23 ------------ 678.3 टन
2023-24 ------------ 795.2 टन
2024-25 -----------757.09 टन
2025-26 -----------721.03 टन
भारत में सोना यहां से आता है
स्विट्जरलैंड ------------ 40%
यूएई ------------ 16%
दक्षिण अफ्रीका ------------ 10%
दुबई के रास्ते आने वाला सोना
2022 ------------ 2.9 अरब डॉलर
2023 ------------ 6.7 अरब डॉलर
2025 ----------- 16.5 अरब डॉलर
व्यवसायियों पर होने वाला असर
आयात शुल्क में वृद्धि के कारण सर्राफा व्यापारियों और जौहरियों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाएगा, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ेगा और सोने-चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. औद्योगिक कार्यों या रिसाइकलिंग के लिए कीमती धातुओं का उपयोग करने वाली कंपनियों को भी बढ़े हुए खर्च का सामना करना पड़ेगा.