भाषा बाैद्धिक और प्रेम भाव व माैन का जगत है

    14-May-2026
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Osho 
 
भाषा बाैद्धिक काेटि के लाेग निर्मित करते हैं. उनके लिए प्रेम पागलपन है, विक्षिप्तता है. काेई प्रेम में गिर गया है, इसका मतलब हुआ कि अब वह कुछ भी कर सकता है. अब वह पागल है, बुद्धि उसे काम न आयेगी, तुम उसके साथ तर्क न कर सकाेगे. क्या तुम किसी प्रेमी के साथ तर्क कर सकते हाे? लाेग चेष्टा करते हैं, लेकिन कुछ हाथ नहीं आता. तुम किसी के प्रेम में पड़ गये हाे.हर काेई कहता है कि यह तुम्हारे याेग्य नहीं है, या कि तुम मुसीबत माेल ले रहे हाे, या कि तुम मूर्ख बन रहे हाे, और इससे अच्छा प्रेम-पात्र मिल सकता था. लेकिन यह सब कहने का तुम पर काेई असर न हाेगा, काेई दलील काम न आयेगी. तुम प्रेम में हाे, अब बुद्धि व्यर्थ हाे गई. प्रेम की अपनी तर्क-सरणी है. प्रेम में गिरने का अर्थ है कि तुम्हारा व्यवहार अब अबुद्धिपूर्ण हाेगा. दाे प्रेमियाें काे देखाे, उनके व्यवहार काे, उनके संवाद काे देखाे. सब कुछ अबुद्धिपूर्ण है. वे बच्चाें की तरह बाेलते हैं.
 
क्याें? एक बड़ा वैज्ञानिक भी जब प्रेम में पड़ता है ताे बच्चाें की तरह तुतलाने लगता है. वह बहुत विकसित, टेक्नाेलाॅजी की भाषा में क्याें नहीं बाेलता है? उसकी बातचीत बच्चाें जैसी अटपटी क्याें हाेती है? इसीलिए क्याेंकि प्रेम में बहुत उन्नत टेक्नाेलाॅजी की भाषा काम की नहीं है.मेरे एक मित्र ने विवाह किया. लड़की चेकाेस्लाेवाकिया की थी. लड़की थाेड़ी सी अंग्रेजी जानती थी. और वैसे ही मेरे मित्र थाेड़ी सी चेकाेस्लाेवाकिया की भाषा जानते थे. वे विवाहित हाे गये. मेरे मित्र उच्च शिक्षा प्राप्त व्यक्ति थे, विश्वविद्यालय में प्राेेसर थे. और लड़की भी प्राेेसर थी. मैं एक बार इन मित्र के साथ टिका था. उन्हाेंने मुझसे कहा कि हम दाेनाें बड़ी कठिनाई में पड़े हैं. मेरा चेकाेस्लाेवाकिया की भाषा का ज्ञान टेक्नाेलाॅजी की शब्दावली तक सीमित है, और मेरी पत्नी का अंग्रेजी भाषा का ज्ञान भी टेक्नाेलाॅजी की शब्दावली तक सीमित है. नतीजा है कि हम बच्चाें की भाषा नहीं बाेल सकते हैं. यह अजीब बात है. हमें लगता है कि हमारा प्रेम कहीं सतह पर अटका है, वह गहरे नहीं जा सकता. भाषा बाधा बन जाती है. मैं प्राेेसर की तरह बाेल सकता हूं, जहां तक मेरे विषय का संबंध है, मैं खूब बाेल सकता हूं. वह लड़की भी अपने विषय पर ठीक से बाेल सकती है. लेकिन प्रेम ताे हममें से किसी का भी विषय नहीं रहा.
 
लेकिन तुम प्रेम में बच्चाें की तरह क्याें बाेलने लगते हाे? इसलिए कि तुम्हारा प्रेम का पहला अनुभव मां के साथ बचपन में हाेता है. पहले -पहले तुम जाे शब्द बाेले वे प्रेम के शब्द थे.वे सिर से नहीं, हृदय से आये थे. वे भाव-जगत के शब्द थे. उनकी गुणवत्ता भिन्न थी. इसलिए जब तुम प्रेम में पड़ते हाे ताे अपनी उन्नत भाषा के बावजूद तुम बच्चाें की भाषा बाेलने लगते हाे, तुम पीछे लाैट जाते हाे. वे बाेल कुछ और हैं, वे सिर से नहीं, हृदय से निकलते हैं. वे उतने व्यंजक और अर्थपूर्ण नहीं भी हाे सकते हैं. िफर भी वे ज्यादा व्यंजक और अर्थपूर्ण हाेते हैं. लेकिन उनके अर्थ का आयाम सर्वथा भिन्न हाेता है.अगर तुम बहुत गहरे प्रेम में हाे ताे तुम माैन हाे जाओगे. तब तुम अपनी प्रेमिका से बाेल न सकाेगे. और यदि बाेलाेगे भी ताे नाम के लिए ही. बातचीत संभव नहीं है. प्रेम जब गहराता है तब शब्द व्यर्थ हाे जाते हैं, तुम चुप हाे जाते हाे. अगर तुम अपनी प्रेमिका के साथ माैन नहीं रह सकते हाे ताे भलीभांति समझ लाे कि प्रेम नहीं है.क्याेंकि जिससे तुम्हें प्रेम नहीं है उसके पास चुप रहना बहुत कठिन हाेता है.