पवना नदी में जानवराें का मांस फेंकने से हड़कंप; केस दर्ज

    14-May-2026
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pawana 
 
पिंपरी-चिंचवड़ शहर की जीवनदायिनी मानी जाने वाली पवना नदी के प्रदूषण का एक भयावह मामला सामने आया है. पुनावले स्थित घाट के पास नदी के पात्र में भारी मात्रा में जानवराें का मांस और प्लास्टिक की थैलियाें का ढेर मिला है. पीने के पानी के स्राेत में मांस फेंककर नागरिकाें के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले अज्ञात आराेपियाें के खिलाफ मनपा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है.इस मामले में मनपा के पर्यावरण इंजीनियरिंग विभाग के उप अभियंता पंकज सुधाकर धेंडे (उम्र-37 वर्ष) ने रावेत पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज कराई है. पुलिस ने प्रदूषण राेकथाम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. हैरानी की बात यह है कि 5 मई काे हुई मनपा की महासभा में सभी दलाें के नगरसेवकाें ने शहर में अशुद्ध, कम दबाव और अपर्याप्त पानी की आपूर्ति का मुद्दा उठातेहुए प्रशासन काे घेरा था. नगरसेवकाें ने आराेप लगाया था कि शहरवासियाें काे स्वच्छ पानी के बजाय विष दिया जा रहा है. इस सभा के ठीक अगले दिन, 6 मई काे पुनावले में मांस का ढेर मिलने से नगरसेवकाें के आराेपाें की पुष्टि हाेती नजर आ रही है.
 
बता दें कि पवना बांध से राेजाना 550 एमएलडी पानी नदी में छाेड़ा जाता है, जिसे रावेत स्थित बांध से लाकर निगड़ी के जल शुद्धिकरण केंद्र में शुद्ध किया जाता है और फिर शहर में पाइपलाइन के जरिए वितरित कया जाता है. नदी में मांस फेंकने से पानी की शुद्धता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है. इस बीच शहर के नागरिकाें ने मांग की है कि, नदी किनारे के संवेदनशील इलाकाें में तत्काल सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, साथ ही निगरानी दस्ताें की गश्त बढ़ाई जाए, जल प्रदूषण करने वाले अपराधियाें के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए. साथ ही लाेगाें ने यह भी मांग की है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई के बजाय ठाेस जमीनी उपाय करे ताकि उन्हें स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल मिल सके.14 दिनाें में दूसरी बड़ी घटना - नदी में मांस फेंकने की यह काेई पहली घटना नहीं है. इससे पहले 23 अप्रैल काे भी नदी पात्र में मांस से भरी 30 थैलियां मिली थीं.इस घटना के महज 14 दिन बाद दाेबारा 12 थैलियाें में मांस भरकर फेंका गया है. मनपा की ‘न्यूसेंस डिटेक्शन स्क्वाड़’ (उपद्रव शाेध पथक) द्वारा गश्त और दंडात्मक कार्रवाई के दावाें के बावजूद, इस तरह की घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं.